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सीपीसीबी के निर्देशों के खिलाफ आंदोलन का एलान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 10 Dec 2021 01:45 AM IST
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Announcement of agitation against the instructions of CPCB
पानीपत। जीटी रोड स्थित निजी होटल में आयोजित उद्योगपतियों की बैठक को संबोधित करते हुए डायर्स एसो? - फोटो : Panipat
पानीपत। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के निर्देशों के खिलाफ उद्योगों से जुड़ी 36 एसोसिएशन एक मंच पर आ गई हैं। साथ ही विरोध में सड़कों पर उतरने का एलान किया है। इस संबंध में उन्होंने वीरवार को बैठक के बाद डीसी से मिलकर ज्ञापन सौंपा। इससे पहले बैठक में पानीपत को एनसीआर से अलग करने की मांग उठाई गई एवं इसके लिए नई एसोसिएशन बनाकर आंदोलन का निर्णय लिया गया।
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केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एनसीआर में कोयला संचालित सभी प्रकार के उद्योगों को 12 दिसंबर तक बंद कर दिया है और उद्योगों के लिए पीएनजी लगाना अनिवार्य किया है। इससे नाराज उद्यमियों ने वीरवार को एक होटल में बैठक की, जिसमें निर्णय लिया गया कि शनिवार को 60 हजार उद्योगपति और श्रमिक सड़कों पर उतरेंगे और सीपीसीबी तथा सरकार के खिलाफ रोष प्रदर्शन करेंगे। रोष प्रदर्शन जिम खाना क्लब से लघु सचिवालय तक निकाला जाएगा।
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इसके बाद भी अगर सीपीसीबी व सरकार ने उनकी मांगे नहीं मानी तो प्रदेश स्तर पर आंदोलन किया जाएगा। इस संबंध में उद्यमियों के प्रतिनिधिमंडल ने वीरवार को डीसी से मिलकर ज्ञापन भी सौंपा। वहीं उद्यमियों ने मीटिंग में ये भी तय किया कि एक अलग से एसोसिएशन बनाई जाएगी जो पानीपत को एनसीआर से बाहर कराने के लिए संघर्ष करेगी, ताकि सीपीसीबी के नियम यहां लागू न हों और उद्योग चलते रहें।
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सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे उद्यमी
उद्यमियों ने सीपीसीबी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का भी ऐलान कर दिया है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण को उद्योगों से कितना नुकसान हो रहा है। इसकी रिपोर्ट तकनीकी एक्सपर्ट से तैयार कराया जाएगा। जिसके आधार पर वो सुप्रीम कोर्ट में सीपीसीबी के खिलाफ याचिका दायर करेंगे। साथ ही उद्यमी पीएनजी का भी मुद्दा उठाएंगे, क्योंकि पीएनजी की सप्लाई लेने से उत्पादन की कीमत तीन गुना तक बढ़ जाती है।
तीन दिन में करीब 950 करोड़ रुपये की चपत
सीपीसीबी के निर्देशों पर शहर के दो हजार उद्योग लगातार तीसरे दिन भी पूर्ण रूप से बंद रहे। ऐसे में उद्यमियों को इन तीन दिनों में लगभग 950 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। वहीं लगभग दो लाख श्रमिक घर बैठ गए हैं। मीटिंग में पहुंचे भाजपा नेता विजय जैन ने विधायक प्रमोद विज व महिपाल ढांडा पर ही सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि भाजपा के दो विधायक होने के बाद भी उद्यमियों की सुनवाई नहीं हो रही है, ये गंभीर मामला है।
सिर्फ 47 उद्योग ही चल रहे
पानीपत में 2 हजार उद्योग कोयले पर चलते हैं। सिर्फ 47 उद्योगों में ही पीएनजी की सप्लाई है। सीपीसीबी की टीमें फील्ड में उद्योगों की मॉनीटरिंग भी कर रही हैं। उद्यमियों का कहना है कि पानीपत का एक्यूआई बहुत ज्यादा नहीं है, इसलिए पानीपत को 24 घंटे उद्योग चलाने की अनुमति मिलनी चाहिए।
अगर सीपीसीबी ने निर्देश वापस नहीं लिए तो होगा आंदोलन : राणा
सरकार के लिए इंडस्ट्री को टारगेट करना बड़ा आसान है। सीपीसीबी प्रदूषण के असल कारकों का पता नहीं लगाती। सीधे तौर पर उद्योगों को टारगेट करती है। सीपीसीबी का दबाव है कि पीएनजी पर उद्योगों को लेकर आए, पीएनजी पर उद्योगों को लाने में 40 लाख रुपये का खर्च होगा। मीटिंग में ये तय हुआ है शनिवार को वो सड़कों पर उतरेंगे और विरोध प्रदर्शन करेंगे। अगर सीपीसीबी ने उनकी मांगे नहीं मानी तो प्रदेश स्तर पर आंदोलन होगा।
--भीम राणा, प्रधान डायर्स एसोसिएशन
सभी उद्योग प्रभावित, सभी एसोसिएशन एकजुट : अग्रवाल
प्रदूषण के लिए उद्योगों को टारगेट किया जाना गलत है। उद्यमियों को इतना परेशान किया जा रहा है कि वो पलायन करने को मजबूर हैं। कोयला संचालित सभी उद्योग बंद हैं। सभी उद्योग एक दूसरे से जुड़े हैं। सभी उद्योग प्रभावित हैं, सभी एसोसिएशन आंदोलन के लिए एकजुट होकर एक मंच पर आ गई हैं।

--श्री भगवान अग्रवाल, प्रधान सेक्टर 29 इंडस्ट्रियल एस्टेट एसोसिएशन
कोरोना, लॉकडाउन व किसान आंदोलन की मार से उबरने का कर रहे थे प्रयास : सचदेवा
कोरोना, लॉकडाउन और किसान आंदोलन से उद्योगों को करोड़ों का नुकसान हुआ है। इस नुकसान से उबरने का प्रयास कर रहे थे, उन्हें ऑर्डर भी अच्छे मिले थे। अब सीपीसीबी के निर्देशों ने मुसीबत खड़ी कर दी है। उद्यमी आंदोलन करने को मजबूर हो रहे हैं। सरकार को इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए।
--प्रीतम सचदेवा, प्रधान पानीपत इंडस्ट्रियल एसोसिएशन

पानीपत। बैठक के दौरान मौजूद उद्योगपति।

पानीपत। बैठक के दौरान मौजूद उद्योगपति।- फोटो : Panipat

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