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नाराज किसान धरने पर आश्वासन मिला तो माने

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 22 Jan 2022 01:36 AM IST
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Angry farmers agree if they get assurance on dharna
मतलौडा। रिफायनरी के गेट पर धरना देते किसान - फोटो : Panipat
मतलौडा (पानीपत)। बोहली रिफाइनरी से निकलने वाली जहरीली गैस के कारण आसपास क्षेत्र के आठ गांवों के किसानों की फसलें खराब हो गई हैं। इसी के विरोध के चलते शुक्रवार को किसानों ने रिफाइनरी के मुख्य गेट पर धरना देकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान मौके पर पहुंचे ड्यूटी मजिस्ट्रेट बीडीपीओ मतलौडा अशोक छिक्कारा व रिफाइनरी के अधिकारियों के आश्वासन पर किसानों ने करीब छह घंटे बाद धरना समाप्त किया।
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धरने का नेतृत्व किसान यूनियन के करनाल प्रधान जगदीप औलख ने किया। शुक्रवार सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक क्षेत्र के बोहली, सिठाना, रेरकलां, ददलाना, कुताना व रजापुर आदि के सैकड़ों किसानों ने रिफाइनरी के मुख्य गेट पर धरना दिया और रिफाइनरी प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। शाम चार बजे ड्यूटी मजिस्ट्रेट बीडीपीओ मतलौडा अशोक छिक्कारा व रिफाइनरी के डीजीएम रावत ने धरना स्थल पर पहुंचकर किसानों को आश्वासन दिया कि 26 जनवरी के बाद कृषि वैज्ञानिकों को बुलाकर आंकलन करवाएंगे कि ये फसलें प्रदूषण के कारण खराब हो रही हैं या नहीं। इसके बाद जो उचित होगा वही कार्रवाई करेंगे। इस आश्वासन के बाद किसानों ने धरना समाप्त कर दिया।
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बोहली रिफाइनरी के गेट पर धरने पर बैठे किसान बोहली सरपंच विक्रम सिंह, प्रधान जगदीप औलख, परगट सिंह, सतनाम सिंह, मेजर सिंह, अवतार सिंह, बख्खा सिंह व बलकार सिंह ने आरोप लगाते हुए कहा कि रिफाइनरी से निकलने वाली जहरीली गैस के कारण उनकी फसलें पीली पड़ चुकी हैं। इसका खराब मौसम के कारण भी ज्यादातर प्रभाव पड़ता है। वैसे भी रिफाइनरी के प्रदूषण के कारण फसलों की पैदावार कम हो रही है। पिछले दिनों प्रदूषण के कारण एनजीटी ने रिफाइनरी पर सैकड़ों करोड़ का जुर्माना किया गया था। इस दौरान किसानों ने मांग की है कि उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए। उन्होंने बताया कि किसान अपनी जमीनों को बेचकर जाना चाहते हैं लेकिन रिफाइनरी की ओर से उन्हें उचित मुआवजा नहीं दिया जा रहा।
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