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12 वर्ग फुट के कमरे में चल रहीं आंगनबाड़ियां, 10 नौनिहाल भी नहीं बैठ सकते

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 05 Oct 2021 11:30 PM IST
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Anganwadis running in 12 square feet room, even 10 children cannot sit
पानीपत। खटीक बस्ती स्थित छह बाई छह के आंगनवाड़ी केंद्र में पड़ी कुर्सियां। - फोटो : Panipat
सरकार आंगनबाड़ियों को नौनिहालों में शिक्षा की नींव रखने के तौर पर देख रही है, लेकिन जमीनी हकीकत से मुंह मोड़ती दिख रही है। आंगनबाड़ियों की हालत ऐसी है कि ये कॉलोनियों में गंदगी के बीच 12 वर्ग फुट के कमरों में चलाई जा रहीं हैं। जहां एक साथ 10 नौनिहाल तक नहीं बैठ सकते। बच्चों को बैठाने के बाद आंगनबाड़ी वर्कर्स के पास खड़े होने तक की जगह नहीं बचती है। इन हालातों में नई शिक्षा नीति के तहत आंगनबाड़ियों को निजी प्लेवे स्कूलों से समकक्ष लाने की तैयारी है, लेकिन सवाल है कि यह होगा कैसे।
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मंगलवार को अमर उजाला संवाददाता ने जिले की तीन आंगनबाड़ियों का दौरा किया। जहां हालात बद से बदतर मिले। ये तंग जगह पर चल रहे हैं। इतनी जगह में चार कुर्सी लगाकर बैठा भी नहीं जा सका। पानीपत में 1100 आंगनबाड़ी केंद्र चल रही हैं, लेकिन यह किसी घर के छोटे से आंगन या स्टोर रूम में चल रहे हैं। इसकी बड़ी वजह से है जगह का किराया। इन्हें एक हजार से 1500 रुपये किराए के लिए मिलते हैं, इतने रुपये बड़ी मुश्किल से यह जगह भी मिल पाती है। गौर करने वाली बात है कि सरकार ने आंगनबाड़ी केंद्रों के इंफ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान ही नहीं दिया है।
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किराए के मुताबिक जगह खोजना है बेहद मुश्किल
आंगनबाड़ी वर्कर्स ने बताया कि कमरे में किराए के नाम पर इतने कम पैसे मिलते हैं, उसमें बेहतर जगह खोजना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। जगहों का किराया लगातार बढ़ता जा रहा है, लेकिन सरकार किराया नहीं बढ़ा रही है। नतीजा हालात सुधर नहीं रहे। वर्कर्स ने बताया कि स्टाफ तक नहीं बैठ पाता है।
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बैठने की जगह नहीं तो खेलेगा कहां
आंगनबाड़ी के कमरों में जब बैठने की जगह नहीं है तो बच्चों के लिए खेलने की जगह की उम्मीद करना सपना ही है। प्री प्राइमरी के बच्चों के लिए खेल बेहद जरूरी है, लेकिन इसी का ख्याल यहां नहीं है। यहां तक कि प्री प्राइमरी में बच्चों के खेल के जरिए ही पढ़ाना भी होता है।
गांव में किराए के 200 रुपये मिलते हैं
आंगनबाड़ी वर्करों को किराए के नाम पर कुछ नहीं मिलता है। शहर में किराए के नाम पर मुश्किल से हजार से 1500 रुपये मिल जाते हैं, गांव में तो 200 रुपये दिए जाते हैं। इतने रुपये में आंगनबाड़ी किराए पर कमरा कैसे लें। जबकि वर्ष 2012 में गांव में कमरे का किराया 750 रुपये देने की बात कही गई थी, लेकिन आज तक 200 दिए जा रहे हैं।

-संतोष रावल, जिला प्राधन एवं राज्य उपप्रधान, आंगनबाड़ी एसोसिएशन
जिले की आंगनबाड़ियों की जिम्मेदारी बाल कल्याण विभाग के पास है। आंगनबाड़ी विभाग बच्चों को खेल के जरिए पढ़ाने का काम करेगा। हालांकि शिक्षा विभाग नजर रखेगा। जब बच्चा नर्सरी और पहली कक्षा में दाखिले के लायक हो जाएगा तो उन्हें सरकारी स्कूलों में भेजने का काम शिक्षा विभाग करेगा।
- बृजमोहन, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी

पानीपत। संतोष रावल।

पानीपत। संतोष रावल।- फोटो : Panipat

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