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Panipat News: शरीर का दान कर मानवता के लिए कायम की मिसाल
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कृष्ण कुमार वर्मा इंसा। स्रोत : स्वयं
विश्व अंगदान दिवस
समाज की भलाई के लिए पुरुषों के साथ महिलाएं भी कर रहीं कदम ताल
संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। जीते जी तो सही लेकिन मरने के बाद भी कुछ ऐसा करके जाओ कि जिंदगी भर लोग आप को सलाम करते रहें। ऐसा ही कुछ अलग करके औद्योगिक नगरी के लोग नाम चमका रहे हैं। बुधवार को अंगदान दिवस है। आइये हम ऐसे लोगों से मिलवाते हैं जो ऐसा पुण्य का कार्य कर लोगों के लिए एक उदाहरण बन गए हैं।
एल्डिको के कृष्ण ने रिसर्च के लिए दे दिया शरीर व आंखें
एल्डिको निवासी कृष्ण कुमार वर्मा इसां की अंतिम इच्छा थी कि उनके मरणोपरांत उनका पार्थिव शरीर व आंखें दान की जाएं। उनकी पत्नी व बेटों ने उनकी अंतिम इच्छा को पूरा किया और उनके मरणोपरांत उनका पार्थिव शरीर दून आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज सहारनपुर (यूपी) को दान किया गया। परिजनों ने उनका पार्थिव शरीर मेडिकल रिसर्च के लिए दान कर एक मिसाल कायम की है। पार्थिव देह को बेटों और बहू गीतिका और श्वेता ने उनकी अर्थी को कंधा दिया। दोनों बहुओं ने बताया कि उनके ससुर ने उन्हें कभी भी बेटियों से कम नहीं समझा है। उनके लिए बेटा और बेटी एक समान थे। कृष्ण वर्मा के बेटे पुनीत वर्मा ने बताया कि पिता ने हमें हमेशा अच्छे कार्य करने के लिए प्रेरित किया है। उन्होंने शरीर दान करके पूरे समाज में मानवता भलाई की अलख जगाई है। उन्होंने पहले ही घर पर बोल रखा था कि अगर मेरी मिट्टी होती है तो मेरे शरीर को जलाकर राख ना किया जाए बल्कि मानवता बिहारी कार्य में समर्पित कर दिया जाए। उनके इस फैसले से हमें अपने आप पर गर्व है।
पुष्पा बरेजा ने कायम की मिसाल
माॅडल टाउन की पुष्पा बरेजा ( 58 ) की अंतिम इच्छा थी कि उनका अंतिम संस्कार न किया जाए बल्कि शरीर दान किया जाए। क्योंकि जीते जी खून दान से बड़ा कोई दान नहीं हो सकता और मरने के बाद शरीर दान महादान है। ऐसा करने से दो अंधेरी जिंदगियों को रोशनी भी मिलती है और शरीर पर रिसर्च कर 10 चिकित्सक तैयार होते हैं जो आगे चलकर मरीजों का इलाज करते हैं और धरती पर भगवान का रूप में कार्य करते हैं। पुष्पा बरेजा की इच्छानुसार उनके पति मोहन लाल बरेजा, उनके बेटे-बेटियों ने उनका शरीर का अंतिम संस्कार ना करके बल्कि समाज भलाई के लिए कुरुक्षेत्र के शाहाबाद आदेश मेडिकल कॉलेज को दान किया है। पार्थिव शरीर का दान जन सेवा दल के सहयोग से करवाया गया। बच्चों ने कहा कि मां की कमी कभी पूरी नहीं हो सकती लेकिन हमें अपनी मां पर गर्व है। जिन्होंने जीते जी घर की जिम्मेदारियों के साथ-साथ समाज की सेवा भी की है और मरने के बाद भी समाज कल्याण के लिए कार्य करके गए हैं। यह उनकी अंतिम इच्छा थी उनकी कमी हमें हमेशा रहेगी लेकिन उनके बताए गए मार्ग पर हम सदा चलते रहेंगे।
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12 साल पहले लिया था शरीर दान का संकल्प
पुरेवाल कॉलोनी के कश्मीरी लाल दुरेजा ( 72) ने 12 साल पहले शरीर दान का संकल्प लेकर फॉर्म भरा था। जिसके मरणोपरांत उनके बेटे ने कपिल कुमार और उनकी बेटियां डिंपल, वर्षा, सोनिया, रानी ने अपने पापा की अंतिम इच्छा को पूरा किया। परिजनों की सहमति से उनके पार्थिव शरीर को जन सेवा दल के सहयोग से आदेश मेडिकल शाहाबाद को रिसर्च के लिए दान किया गया। उनके बेटे कपिल ने बताया कि मेरे पापा डेरा ब्यास के साथ जुड़े हुए हैं और लंबे समय से ही परिवार भी सेवा कर रहा है। उनके पार्थिव शरीर को मेडिकल में भेजने से पहले माधव आई बैंक की टीम डॉ. चंद्र मोहन चावल ने आंखों का दान कराया। जिसमें दो अंधेरी जिंदगी को रोशनी देने का काम करेंगे। जन सेवा दल के सचिव चमन गुलाटी ने बताया कि आज लोगों की सोच बदल रही है काफी लोग मरने के बाद अपने शरीर को आग के हवाले ना करके दान कर रहे हैं। कुछ लोग मरने से पहले ही नेत्र दान व शरीर दान के लिए पंजीकरण करवा रहे हैं। ताकि नेत्र दान से किसी को रोशनी व देह दान से किसी को रिसर्च करने में मदद मिल सके। क्योंकि रिसर्च करने के बाद ही भावी चिकित्सक तैयार होते हैं।
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समाज की भलाई के लिए पुरुषों के साथ महिलाएं भी कर रहीं कदम ताल
संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। जीते जी तो सही लेकिन मरने के बाद भी कुछ ऐसा करके जाओ कि जिंदगी भर लोग आप को सलाम करते रहें। ऐसा ही कुछ अलग करके औद्योगिक नगरी के लोग नाम चमका रहे हैं। बुधवार को अंगदान दिवस है। आइये हम ऐसे लोगों से मिलवाते हैं जो ऐसा पुण्य का कार्य कर लोगों के लिए एक उदाहरण बन गए हैं।
एल्डिको के कृष्ण ने रिसर्च के लिए दे दिया शरीर व आंखें
एल्डिको निवासी कृष्ण कुमार वर्मा इसां की अंतिम इच्छा थी कि उनके मरणोपरांत उनका पार्थिव शरीर व आंखें दान की जाएं। उनकी पत्नी व बेटों ने उनकी अंतिम इच्छा को पूरा किया और उनके मरणोपरांत उनका पार्थिव शरीर दून आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज सहारनपुर (यूपी) को दान किया गया। परिजनों ने उनका पार्थिव शरीर मेडिकल रिसर्च के लिए दान कर एक मिसाल कायम की है। पार्थिव देह को बेटों और बहू गीतिका और श्वेता ने उनकी अर्थी को कंधा दिया। दोनों बहुओं ने बताया कि उनके ससुर ने उन्हें कभी भी बेटियों से कम नहीं समझा है। उनके लिए बेटा और बेटी एक समान थे। कृष्ण वर्मा के बेटे पुनीत वर्मा ने बताया कि पिता ने हमें हमेशा अच्छे कार्य करने के लिए प्रेरित किया है। उन्होंने शरीर दान करके पूरे समाज में मानवता भलाई की अलख जगाई है। उन्होंने पहले ही घर पर बोल रखा था कि अगर मेरी मिट्टी होती है तो मेरे शरीर को जलाकर राख ना किया जाए बल्कि मानवता बिहारी कार्य में समर्पित कर दिया जाए। उनके इस फैसले से हमें अपने आप पर गर्व है।
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पुष्पा बरेजा ने कायम की मिसाल
माॅडल टाउन की पुष्पा बरेजा ( 58 ) की अंतिम इच्छा थी कि उनका अंतिम संस्कार न किया जाए बल्कि शरीर दान किया जाए। क्योंकि जीते जी खून दान से बड़ा कोई दान नहीं हो सकता और मरने के बाद शरीर दान महादान है। ऐसा करने से दो अंधेरी जिंदगियों को रोशनी भी मिलती है और शरीर पर रिसर्च कर 10 चिकित्सक तैयार होते हैं जो आगे चलकर मरीजों का इलाज करते हैं और धरती पर भगवान का रूप में कार्य करते हैं। पुष्पा बरेजा की इच्छानुसार उनके पति मोहन लाल बरेजा, उनके बेटे-बेटियों ने उनका शरीर का अंतिम संस्कार ना करके बल्कि समाज भलाई के लिए कुरुक्षेत्र के शाहाबाद आदेश मेडिकल कॉलेज को दान किया है। पार्थिव शरीर का दान जन सेवा दल के सहयोग से करवाया गया। बच्चों ने कहा कि मां की कमी कभी पूरी नहीं हो सकती लेकिन हमें अपनी मां पर गर्व है। जिन्होंने जीते जी घर की जिम्मेदारियों के साथ-साथ समाज की सेवा भी की है और मरने के बाद भी समाज कल्याण के लिए कार्य करके गए हैं। यह उनकी अंतिम इच्छा थी उनकी कमी हमें हमेशा रहेगी लेकिन उनके बताए गए मार्ग पर हम सदा चलते रहेंगे।
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12 साल पहले लिया था शरीर दान का संकल्प
पुरेवाल कॉलोनी के कश्मीरी लाल दुरेजा ( 72) ने 12 साल पहले शरीर दान का संकल्प लेकर फॉर्म भरा था। जिसके मरणोपरांत उनके बेटे ने कपिल कुमार और उनकी बेटियां डिंपल, वर्षा, सोनिया, रानी ने अपने पापा की अंतिम इच्छा को पूरा किया। परिजनों की सहमति से उनके पार्थिव शरीर को जन सेवा दल के सहयोग से आदेश मेडिकल शाहाबाद को रिसर्च के लिए दान किया गया। उनके बेटे कपिल ने बताया कि मेरे पापा डेरा ब्यास के साथ जुड़े हुए हैं और लंबे समय से ही परिवार भी सेवा कर रहा है। उनके पार्थिव शरीर को मेडिकल में भेजने से पहले माधव आई बैंक की टीम डॉ. चंद्र मोहन चावल ने आंखों का दान कराया। जिसमें दो अंधेरी जिंदगी को रोशनी देने का काम करेंगे। जन सेवा दल के सचिव चमन गुलाटी ने बताया कि आज लोगों की सोच बदल रही है काफी लोग मरने के बाद अपने शरीर को आग के हवाले ना करके दान कर रहे हैं। कुछ लोग मरने से पहले ही नेत्र दान व शरीर दान के लिए पंजीकरण करवा रहे हैं। ताकि नेत्र दान से किसी को रोशनी व देह दान से किसी को रिसर्च करने में मदद मिल सके। क्योंकि रिसर्च करने के बाद ही भावी चिकित्सक तैयार होते हैं।

कृष्ण कुमार वर्मा इंसा। स्रोत : स्वयं

कृष्ण कुमार वर्मा इंसा। स्रोत : स्वयं