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Panipat News: धूप-छांव के बीच उमस ने छुड़ाए पसीने, अगले हफ्ते हल्की से मध्यम बारिश की संभावना
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दिनभर आसमान में छाए रहे बादल। संवाद
- फोटो : Archive
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पानीपत। जिले में मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है। शनिवार को दिनभर कभी हल्के बादल तो कभी चिलचिलाती धूप खिली रही। धूप और बादलों की इस लुका-छिपी के बीच सुबह और शाम के समय हवा में नमी बढ़ने से भारी उमस बनी रही। इससे लोगों को पसीने से तर-बतर होना पड़ा। दिन का अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
रविवार को मुख्य रूप से मौसम साफ रहने की उम्मीद है, जबकि अगले सप्ताह के मध्य में क्षेत्र में हल्के से मध्यम बादल छाए रहने और हल्की बूंदाबांदी की संभावना बन रही है। कृषि विज्ञान केंद्र उझा के समन्वयक डॉ. सतपाल सिंह ने बताया कि आने वाले सप्ताह में आंशिक रूप से बादल छाए रहने और कहीं-कहीं हल्की बौछारें पड़ने की संभावना है। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि मानसूनी मौसम में खेत में पानी जमा न होने दें और उमस भरे इस माहौल में फसलों की नियमित निगरानी करें। यदि बीमारी के लक्षण दिखें तो विशेषज्ञों की सिफारिश के अनुसार ही दवाओं का इस्तेमाल करें।
अब तक 380 मिमी बारिश दर्ज
इस मानसून के सीजन में अब तक लगभग 380 मिलीमीटर (मिमी) अनुमानित बारिश दर्ज की है। बारिश और फिर गर्मी के चलते धान की फसल पर विपरीत असर पड़ रहे हैं। इससे फसल में बीमारी आने का खतरा बढ़ गया है।
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धान की फसल पर प्रभाव: किसानों की जुबानी
पट्टीकल्याणा के किसान किसान राममेहर सिंह ने बताया कि इस बार मौसम अनुकूल नहीं रहा है। कभी बारिश तो कभी मौसम साफ रहा है। लगातार बारिश न होने पर धान फसल अपेक्षाकृत नहीं हो पाई है।
बिंझौल के किसान सतपाल शर्मा ने बताया कि बारिश से धान के पौधों को प्राकृतिक नाइट्रोजन मिल जाती है। इस बार बारिश अपेक्षाकृत कम हुई है। अब तेज हवाओं के साथ भारी बारिश होती है तो कीटों के हमले का डर बना जाएगा इसराना के किसान कर्मवीर ने बताया कि कम बारिश वाले दिनों में जो उमस बढ़ रही है। इससे धान में तना छेदक (स्टेम बोरर) बीमारी का खतरा बढ़ता है।
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रविवार को मुख्य रूप से मौसम साफ रहने की उम्मीद है, जबकि अगले सप्ताह के मध्य में क्षेत्र में हल्के से मध्यम बादल छाए रहने और हल्की बूंदाबांदी की संभावना बन रही है। कृषि विज्ञान केंद्र उझा के समन्वयक डॉ. सतपाल सिंह ने बताया कि आने वाले सप्ताह में आंशिक रूप से बादल छाए रहने और कहीं-कहीं हल्की बौछारें पड़ने की संभावना है। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि मानसूनी मौसम में खेत में पानी जमा न होने दें और उमस भरे इस माहौल में फसलों की नियमित निगरानी करें। यदि बीमारी के लक्षण दिखें तो विशेषज्ञों की सिफारिश के अनुसार ही दवाओं का इस्तेमाल करें।
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अब तक 380 मिमी बारिश दर्ज
इस मानसून के सीजन में अब तक लगभग 380 मिलीमीटर (मिमी) अनुमानित बारिश दर्ज की है। बारिश और फिर गर्मी के चलते धान की फसल पर विपरीत असर पड़ रहे हैं। इससे फसल में बीमारी आने का खतरा बढ़ गया है।
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धान की फसल पर प्रभाव: किसानों की जुबानी
पट्टीकल्याणा के किसान किसान राममेहर सिंह ने बताया कि इस बार मौसम अनुकूल नहीं रहा है। कभी बारिश तो कभी मौसम साफ रहा है। लगातार बारिश न होने पर धान फसल अपेक्षाकृत नहीं हो पाई है।
बिंझौल के किसान सतपाल शर्मा ने बताया कि बारिश से धान के पौधों को प्राकृतिक नाइट्रोजन मिल जाती है। इस बार बारिश अपेक्षाकृत कम हुई है। अब तेज हवाओं के साथ भारी बारिश होती है तो कीटों के हमले का डर बना जाएगा इसराना के किसान कर्मवीर ने बताया कि कम बारिश वाले दिनों में जो उमस बढ़ रही है। इससे धान में तना छेदक (स्टेम बोरर) बीमारी का खतरा बढ़ता है।