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Panipat News: पानीपत में गर्भवतियों की जांच करने आज उतरेगी एम्स की टीम
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पानीपत। पानीपत में शुक्रवार को एम्स के डॉक्टरों की टीम गर्भवतियों के स्वास्थ्य जांचने के लिए फील्ड में उतरेगी। डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. शशि गर्ग उन्हें जिले की गर्भवतियों की स्थिति से अवगत कराएंगी। स्वास्थ्य विभाग ने एम्स की मात्रे संस्था से इसके लिए एमओयू साइन किया है। जिले की हर गर्भवती को ट्रेस किया जाएगा। हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के अंतर्गत आने वाली गर्भवतियों की जांच होगी। उनका तुरंत इलाज शुरू किया जाएगा। सभी गर्भवतियों का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन किया जाएगा।
जिले में जच्चा बच्चा मृत्यु दर कम करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने यह पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। एम्स के साथ मिलकर जच्चा बच्चा मृत्यु दर कम करने कोशिश करने वाला पानीपत देश में पहला जिला है। पानीपत में 60 प्रतिशत गर्भवतियों में खून की कमी है। 10 प्रतिशत गर्भवतियां हाई रिस्क डिलीवरी के दायरे में रहती हैं। 10 में एक महिला की प्री मैच्योर डिलीवरी होती है। 20 प्रतिशत से अधिक गर्भवतियों में बीपी की दिक्कत है।
गर्भवतियों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए स्वास्थ्य विभाग पिछले साढ़े छह साल से हर माह की नौ तारीख को प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा अभियान के तहत विशेष जांच शिविर लगाता है। शिविर में गर्भवतियों की जांच के साथ साथ बेहतर परामर्श दिए जाते हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग का यह प्रयास अब तक कारगर साबित नहीं हुआ है। पिछले दो साल में 20 से अधिक गर्भवतियों की डिलीवरी के दौरान मौत हो चुकी हैं। नवजातों का यह आंकड़ा प्रसूताओं से अधिक है। पिछले साढ़े आठ माह में 950 गर्भवतियां हाई रिस्क डिलीवरी के दायरे में मिली हैं। इसलिए स्वास्थ्य विभाग ने यह पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है।
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बॉक्स
होम डिलीवरी पर लगेगा अंकुश
इस पहल से जिले में होम डिलीवरी पर अंकुश लगेगा। जिले में अब भी एक प्रतिशत होम डिलीवरी होती हैं। होम डिलीवरी के दौरान जच्चा बच्चा की जान को खतरा होता है। एम्स की टीम हर गर्भवती तक पहुंचेगी। उसका रिकॉर्ड ऑनलाइन किया जाएगा। उसको डिलीवरी होने तक ट्रेस किया जाएगा। इसलिए होम डिलीवरी पर इससे पूर्ण रूप से अंकुश लगेगा।
वर्जन-
सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने बताया कि पानीपत यह सेवा शुरू करने वाला देश का पहला जिला है। इसके लिए एम्स से काफी वक्त से बात चल रही थी। शुक्रवार से एम्स के मात्रे संस्था की टीमें पानीपत में फील्ड में उतरकर अपना काम शुरू करेंगी। उनका उद्देश्य जच्चा बच्चा मृत्यु दर में कमी लाना है। इसके अनुसार काम चल रहा है।
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जिले में जच्चा बच्चा मृत्यु दर कम करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने यह पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। एम्स के साथ मिलकर जच्चा बच्चा मृत्यु दर कम करने कोशिश करने वाला पानीपत देश में पहला जिला है। पानीपत में 60 प्रतिशत गर्भवतियों में खून की कमी है। 10 प्रतिशत गर्भवतियां हाई रिस्क डिलीवरी के दायरे में रहती हैं। 10 में एक महिला की प्री मैच्योर डिलीवरी होती है। 20 प्रतिशत से अधिक गर्भवतियों में बीपी की दिक्कत है।
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गर्भवतियों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए स्वास्थ्य विभाग पिछले साढ़े छह साल से हर माह की नौ तारीख को प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा अभियान के तहत विशेष जांच शिविर लगाता है। शिविर में गर्भवतियों की जांच के साथ साथ बेहतर परामर्श दिए जाते हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग का यह प्रयास अब तक कारगर साबित नहीं हुआ है। पिछले दो साल में 20 से अधिक गर्भवतियों की डिलीवरी के दौरान मौत हो चुकी हैं। नवजातों का यह आंकड़ा प्रसूताओं से अधिक है। पिछले साढ़े आठ माह में 950 गर्भवतियां हाई रिस्क डिलीवरी के दायरे में मिली हैं। इसलिए स्वास्थ्य विभाग ने यह पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है।
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होम डिलीवरी पर लगेगा अंकुश
इस पहल से जिले में होम डिलीवरी पर अंकुश लगेगा। जिले में अब भी एक प्रतिशत होम डिलीवरी होती हैं। होम डिलीवरी के दौरान जच्चा बच्चा की जान को खतरा होता है। एम्स की टीम हर गर्भवती तक पहुंचेगी। उसका रिकॉर्ड ऑनलाइन किया जाएगा। उसको डिलीवरी होने तक ट्रेस किया जाएगा। इसलिए होम डिलीवरी पर इससे पूर्ण रूप से अंकुश लगेगा।
वर्जन-
सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने बताया कि पानीपत यह सेवा शुरू करने वाला देश का पहला जिला है। इसके लिए एम्स से काफी वक्त से बात चल रही थी। शुक्रवार से एम्स के मात्रे संस्था की टीमें पानीपत में फील्ड में उतरकर अपना काम शुरू करेंगी। उनका उद्देश्य जच्चा बच्चा मृत्यु दर में कमी लाना है। इसके अनुसार काम चल रहा है।