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बरसात के बाद एनएच-44 की हालत हुई खस्ता,यात्रियों के लिए मुश्किल हुआ रास्ता
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पानीपत। तीन दिन की लगातार बरसात से अब एनएच-44 की हालत खस्ता हो गई है। दिल्ली से पानीपत आते हुए सिवाह गांव में निर्माणाधीन नए बस डिपो से लेकर नांगलखेड़ी तक सड़कों में गड्ढे हो गए हैं। सड़कों में गड्ढे होने के कारण प्रतिदिन आवागमन करने वाले यात्रियों के लिए रास्ता मुश्किल हो गया है। लगभग एक किलोमीटर की सड़क में दो फुट के गड्ढे हो गए हैं। सिवाह से लेकर नांगलखेड़ी तक पुल बन रहा है, जिससे पानीपत की ओर आने वाला रास्ता केवल टू लेन है। इससे ज्यादा परेशानी हो रही है।
तेज रफ्तार गाड़ियां रात में गड्ढे न दिखने के कारण नियंत्रण खो देते हैं। इससे अक्सर रात में हादसे हो जाते हैं। सिवाह चौक के पास जीटी रोड पर लाइट भी नहीं लगी है, जिससे रात में वाहन चालकों को दिखाई नहीं देता। गांव के लोगों का कहना है कि अक्सर रात में हादसे हो रहे हैं। जिसके बाद भी एनएचएआई द्वारा न तो पैच वर्क करवाया जा रहा है न ही सड़क का निर्माण दोबारा किया जा रहा है।
समालखा में सीएम के आने पर सड़क का निर्माण कराया गया था। इसके बाद इस बरसात से एक बार फिर अच्छी सड़क बनने का दावा धुल गया है। समालखा में 15 अगस्त को झंडा फहराया गया था। इस दौरान 10 साल से टूटी हुई जमुना पेट्रोल पंप के सामने की सड़क को फिर से बनाया गया था। तब दावा किया गया था कि अब यह सड़क नहीं टूटेगी। मगर तीन दिन की बारिश में ही सड़क में गड्ढे हो गए और घुटने तक पानी भर जा रहा है। जिससे समालखा में अब वाहन चालकों को रांग साइड वाहन चलाकर पानीपत की ओर आना पड़ रहा है। इससे पिछले सप्ताह चार हादसे हुए। वाहन चालकों का कहना है कि एनएच-44 की हालत नहीं सुधर पा रही है तो अन्य सड़कों का क्या होगा। एनएच-44 पर रोजाना दो लाख से अधिक वाहनों का आवागमन होता है।
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तेज रफ्तार गाड़ियां रात में गड्ढे न दिखने के कारण नियंत्रण खो देते हैं। इससे अक्सर रात में हादसे हो जाते हैं। सिवाह चौक के पास जीटी रोड पर लाइट भी नहीं लगी है, जिससे रात में वाहन चालकों को दिखाई नहीं देता। गांव के लोगों का कहना है कि अक्सर रात में हादसे हो रहे हैं। जिसके बाद भी एनएचएआई द्वारा न तो पैच वर्क करवाया जा रहा है न ही सड़क का निर्माण दोबारा किया जा रहा है।
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समालखा में सीएम के आने पर सड़क का निर्माण कराया गया था। इसके बाद इस बरसात से एक बार फिर अच्छी सड़क बनने का दावा धुल गया है। समालखा में 15 अगस्त को झंडा फहराया गया था। इस दौरान 10 साल से टूटी हुई जमुना पेट्रोल पंप के सामने की सड़क को फिर से बनाया गया था। तब दावा किया गया था कि अब यह सड़क नहीं टूटेगी। मगर तीन दिन की बारिश में ही सड़क में गड्ढे हो गए और घुटने तक पानी भर जा रहा है। जिससे समालखा में अब वाहन चालकों को रांग साइड वाहन चलाकर पानीपत की ओर आना पड़ रहा है। इससे पिछले सप्ताह चार हादसे हुए। वाहन चालकों का कहना है कि एनएच-44 की हालत नहीं सुधर पा रही है तो अन्य सड़कों का क्या होगा। एनएच-44 पर रोजाना दो लाख से अधिक वाहनों का आवागमन होता है।
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