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Panipat News: शनिवार को शनिश्चरी अमावस्या पर बन रहा दुर्लभ शुभ योग, पितृ तर्पण और दान से चमकेगा भाग्य

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 06 Oct 2026 07:15 PM IST
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A rare auspicious alignment is forming this Saturday on Shanishchari Amavasya; performing *Pitri Tarpan* (offering oblations to ancestors) and charity will brighten one's fortune.
संवाद न्यूज एजेंसी
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पानीपत। सनातन धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व होता है। इस बार शनिवार को पड़ने वाली अमावस्या पर अत्यंत शुभ और दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस दिन पितृ तर्पण और दान करने से भाग्य में चमक आएगी।
आचार्य लालमणि पांडेय ने बताया कि जब भी अमावस्या शनिवार के दिन आती है तो उसे शनिश्चरी अमावस्या कहा जाता है। ज्योतिषीय दृष्टि से यह संयोग शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और शनि दोषों से मुक्ति पाने के लिए वर्ष का सबसे उत्तम अवसर माना जाता है। अमावस्या पर पवित्र नदियों में स्नान, ध्यान और दान-पुण्य करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। इस विशेष योग में अपने सभी ज्ञात-अज्ञात पितरों का तर्पण करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और परिवार पर उनका आशीर्वाद सदैव बना रहता है।
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यमुना के सनौली घाट पर स्नान और तर्पण की तैयारी
विशेष योग के अवसर पर पानीपत स्थित यमुना नदी के सनौली घाट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटने की संभावना है। तड़के ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:36 से 05:20 बजे से ही श्रद्धालु पवित्र यमुना में आस्था की डुबकी लगाएंगे। इसके बाद दोपहर अभिजित मुहूर्त 12:09 से 01:01 बजे तक पितरों के निमित्त जल, तिल और कुशा से जलांजलि देकर तर्पण किया जाएगा।
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शनिश्चरी अमावस्या पर इन चीजों का करें दान

मान्यता है कि इस दिन विशेष योग में किया गया दान सोया हुआ भाग्य जगा देता है। श्रद्धालुओं को इस दिन काले तिल व लोहे की वस्तुएं दान करनी चाहिए। ये शनि देव की प्रसन्नता के लिए अति उत्तम हैं। छाता और जूते-चप्पल जरूरतमंदों को देने से शारीरिक कष्ट दूर होते हैं। जल, शरबत व रसीले फल का दान पितरों को तृप्ति प्रदान करता है।

एक नवरात्र बढ़ने से नौवें दिन होगी अष्टमी-

आचार्य लालमणि पांडेय ने बताया कि नवरात्र 11 से 19 अक्तूबर तक होंगे। इस बार एक नवरात्र बढ़ने से दुर्गाष्टमी 19 अक्तूबर को मनाई जाएगी।
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