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Panipat News: जमीन में 30 फुट नीचे दबी लाइन दिखी, 21 फुट की दूरी में मिले नौ छेद
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पानीपत। सेक्टर 29 पार्ट-2 में सीईटीपी प्लांट के सामने धंसी जमीन और लीकेज नगर निगम की सीवरेज लाइन शनिवार को छठे दिन दिखने लगी। निगम अधिकरियों ने जमीन में 30 फुट नीचे गड्ढे की ओर खुदाई कर पानी सुखाकर बिछी पाइपलाइन का लीकेज ढूंढ निकाला। छह फुट चौड़ी इस लाइन में 21 फुट की दूरी में नौ छेद मिले हैं। अधिकारियों का दावा है कि इन छेदों वाली जगह पर पाइपलाइन की मरम्मत शनिवार रात में ही पूरी की जाएगी। इसके बाद दूसरे गड्ढे में लीकेज को तलाशा जाएगा।
अधिकारियों का कहना है कि बबैल नाके से लेकर सीटीपी प्लांट तक करीब 10 किलोमीटर लंबी लाइन 1996 में आरसीसी से बनाई गई थी। आरसीसी में सरिया और कंक्रीट दोनों को शामिल किया जाता है। पाइपलाइन में पिछले 27 साल से लगातार सीवरेज का पानी बह रहा है। पानी की वजह से सरिया गलकर खत्म हो चुका है। वहीं, कंक्रीट की क्षमता भी न के बराबर हो चुकी है। इसलिए पाइपलाइन कमजोर हो चुकी है। इससे मिट्टी के दबाव और अवैध कनेक्शनों के कारण लीक हो रही है।
सीवरेज की इस पाइपलाइन पर रेलवे लाइन से पूरब दिशा की ओर वाले पूरे शहर की निकासी निर्भर है। इसमें वार्ड एक से 14 तक के एरिया की कॉलोनियाें का सीवरेज पानी एसटीपी पर भेजा जाता है। फिलहाल लाइन खस्ताहाल हो चुकी है। काफी पुरानी और जर्जर पाइपलाइन के अन्य जगहों से भी लीक होने की आशंका है। अगर यह लाइन टूटी तो आधे शहर की निकासी पर संकट छा जाएगा।
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निगम अधिकारी लगातार विशेषज्ञों की राय ले रहे हैं। रिटायर्ड और चीफ इंजीनियर स्तर के अधिकारियों से लगातार संपर्क किया जा रहा है। एक्सपर्ट व्यू में सामने आया कि अगर 10 किलोमीटर लंबी इस लाइन के अंदर दूसरी पाइपलाइन बिछाई जाए तो इस पर करीब 150 करोड़ रुपये का खर्च आ सकता है। हालांकि अब तक इसका एस्टीमेट तैयार नहीं किया गया है।
लीक पाइपलाइन में छेद मिले हैं। रात में ही इसकी मरम्मत की जाएगी। लीकेज वाली जगह पर स्टील की प्लेट लगाकर ऊपर कंक्रीट लगाया जाएगा। इसके बाद गड्ढे को भर देंगे। -
- अर्पित बुधवार, एसडीओ, नगर निगम।
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अधिकारियों का कहना है कि बबैल नाके से लेकर सीटीपी प्लांट तक करीब 10 किलोमीटर लंबी लाइन 1996 में आरसीसी से बनाई गई थी। आरसीसी में सरिया और कंक्रीट दोनों को शामिल किया जाता है। पाइपलाइन में पिछले 27 साल से लगातार सीवरेज का पानी बह रहा है। पानी की वजह से सरिया गलकर खत्म हो चुका है। वहीं, कंक्रीट की क्षमता भी न के बराबर हो चुकी है। इसलिए पाइपलाइन कमजोर हो चुकी है। इससे मिट्टी के दबाव और अवैध कनेक्शनों के कारण लीक हो रही है।
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सीवरेज की इस पाइपलाइन पर रेलवे लाइन से पूरब दिशा की ओर वाले पूरे शहर की निकासी निर्भर है। इसमें वार्ड एक से 14 तक के एरिया की कॉलोनियाें का सीवरेज पानी एसटीपी पर भेजा जाता है। फिलहाल लाइन खस्ताहाल हो चुकी है। काफी पुरानी और जर्जर पाइपलाइन के अन्य जगहों से भी लीक होने की आशंका है। अगर यह लाइन टूटी तो आधे शहर की निकासी पर संकट छा जाएगा।
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निगम अधिकारी लगातार विशेषज्ञों की राय ले रहे हैं। रिटायर्ड और चीफ इंजीनियर स्तर के अधिकारियों से लगातार संपर्क किया जा रहा है। एक्सपर्ट व्यू में सामने आया कि अगर 10 किलोमीटर लंबी इस लाइन के अंदर दूसरी पाइपलाइन बिछाई जाए तो इस पर करीब 150 करोड़ रुपये का खर्च आ सकता है। हालांकि अब तक इसका एस्टीमेट तैयार नहीं किया गया है।
लीक पाइपलाइन में छेद मिले हैं। रात में ही इसकी मरम्मत की जाएगी। लीकेज वाली जगह पर स्टील की प्लेट लगाकर ऊपर कंक्रीट लगाया जाएगा। इसके बाद गड्ढे को भर देंगे। -
- अर्पित बुधवार, एसडीओ, नगर निगम।