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Panipat News: महाशिवरात्रि पर 72 साल बाद बन रहे महासंयोग
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पानीपत। मार्च का पूरा माह शिव पूजा के लिए विशेष है। इस माह महाशिवरात्रि और शुक्र प्रदोष व्रत का संयोग बन रहा है। विवाह से लेकर मुंडन तक लिए यह माह शुभ है। वहीं महाशिवरात्रि का त्योहार आठ मार्च को मनाया जाएगा। फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाता है। इस दिन का शिव भक्त बेसब्री से इंतजार करते रहते हैं।
शास्त्रों के अनुसार इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव का विवाह हुआ था। इस कारण इस दिन को अबूझ मुहूर्तों में से एक माना जाता है। इस दिन जो भगवान शिव का व्रत व पूजन करेगा, उसे परम सिद्धि प्राप्त होगी। महाशिवरात्रि पर इस बार सर्वार्थ सिद्धि समेत चार शुभ योग बन रहे हैं। वहीं, 72 साल बाद महाशिवरात्रि पर अद्भुत शिव योग, सिद्ध योग और चतुर्ग्रही योग का संयोग बन रहा है। साथ ही, शुक्र प्रदोष व्रत भी पड़ रहा है, जो मां लक्ष्मी को समर्पित है। महाशिवरात्रि पर श्रवण नक्षत्र होने से यह दिन ओर भी फलदायी बन गया है। महासंयोग में भगवान शिव की पूजा और आराधना फलदायी होगी। इस दिन शिव स्तुति, शिव चालीसा, रुद्राष्टक, शिवपुराण आदि का पाठ करना लाभदायक है।
ज्योतिषाचार्य पंडित राधे-राधे महाराज ने बताया कि महाशिवरात्रि के दिन भक्तगण भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए व्रत रखने के साथ विभिन्न तरह के उपाय अपनाते हैं। इस दिन शिवलिंग की पूजा करना काफी शुभ माना जाता है। शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, आक का फूल सहित कई चीजों को अर्पित किया जाता है। चार पहर की पूजा में भोलेनाथ को दूध, दही, घी, शक्कर, पंचामृत, गन्ने का रस, गिलोय बेल के सर से अभिषेक करने का विशेष महत्व है। शिवपुराण में बताया गया है कि जो लोग विवाहित हैं उन्हें अपने जीवनसाथी के साथ इस दिन पूरे विधि-विधान से शिवरात्रि की पूजा करनी चाहिए।
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हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि का आरंभ शाम 9 बजकर 57 मिनट पर होगा, जो 9 मार्च को संध्याकाल 6 बजकर 17 मिनट पर समाप्त होगी। शिवजी की पूजा प्रदोष काल में की जाती है। इसलिए इस साल महाशिवरात्रि का व्रत 8 मार्च को रखा जाएगा।
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शुभ मुहूर्त-
- महाशिवरात्रि के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग 6:38 से 10:41 तक पूजा का शुभ योग बन रहा है। निशिता काल मुहूर्त 12:07 रात्रि से लेकर 12:56 मिनट अगले दिन तक रात्रि में रहेगा।
- आमलकी एकादशी 19 मार्च को रात में 12 बजकर 22 मिनट से आरंभ होकर 20 मार्च को रात में 2 बजकर 23 मिनट पर समाप्त हो रही है।
- विजया एकादशी 06 मार्च को सुबह 06 बजकर 30 मिनट से 07 मार्च सुबह 04 बजकर 13 मिनट तक रहेगा।
- होलिका दहन का शुभ मुहूर्त 24 मार्च को देर रात 11 बजकर 13 मिनट से शुरू होगा और 12 बजकर 27 मिनट तक रहेगा।
- कृष्ण पक्ष की अमावस्या को फाल्गुन की अमावस्या कहा जाता है। इस वर्ष 10 मार्च को फाल्गुन अमावस्या है। इस अमावस्या पर किसी पवित्र नदी में स्नान के बाद सूर्य देव को जल देना चाहिए। मनोकामना पूर्ण होती है।
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शास्त्रों के अनुसार इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव का विवाह हुआ था। इस कारण इस दिन को अबूझ मुहूर्तों में से एक माना जाता है। इस दिन जो भगवान शिव का व्रत व पूजन करेगा, उसे परम सिद्धि प्राप्त होगी। महाशिवरात्रि पर इस बार सर्वार्थ सिद्धि समेत चार शुभ योग बन रहे हैं। वहीं, 72 साल बाद महाशिवरात्रि पर अद्भुत शिव योग, सिद्ध योग और चतुर्ग्रही योग का संयोग बन रहा है। साथ ही, शुक्र प्रदोष व्रत भी पड़ रहा है, जो मां लक्ष्मी को समर्पित है। महाशिवरात्रि पर श्रवण नक्षत्र होने से यह दिन ओर भी फलदायी बन गया है। महासंयोग में भगवान शिव की पूजा और आराधना फलदायी होगी। इस दिन शिव स्तुति, शिव चालीसा, रुद्राष्टक, शिवपुराण आदि का पाठ करना लाभदायक है।
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ज्योतिषाचार्य पंडित राधे-राधे महाराज ने बताया कि महाशिवरात्रि के दिन भक्तगण भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए व्रत रखने के साथ विभिन्न तरह के उपाय अपनाते हैं। इस दिन शिवलिंग की पूजा करना काफी शुभ माना जाता है। शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, आक का फूल सहित कई चीजों को अर्पित किया जाता है। चार पहर की पूजा में भोलेनाथ को दूध, दही, घी, शक्कर, पंचामृत, गन्ने का रस, गिलोय बेल के सर से अभिषेक करने का विशेष महत्व है। शिवपुराण में बताया गया है कि जो लोग विवाहित हैं उन्हें अपने जीवनसाथी के साथ इस दिन पूरे विधि-विधान से शिवरात्रि की पूजा करनी चाहिए।
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हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि का आरंभ शाम 9 बजकर 57 मिनट पर होगा, जो 9 मार्च को संध्याकाल 6 बजकर 17 मिनट पर समाप्त होगी। शिवजी की पूजा प्रदोष काल में की जाती है। इसलिए इस साल महाशिवरात्रि का व्रत 8 मार्च को रखा जाएगा।
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शुभ मुहूर्त-
- महाशिवरात्रि के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग 6:38 से 10:41 तक पूजा का शुभ योग बन रहा है। निशिता काल मुहूर्त 12:07 रात्रि से लेकर 12:56 मिनट अगले दिन तक रात्रि में रहेगा।
- आमलकी एकादशी 19 मार्च को रात में 12 बजकर 22 मिनट से आरंभ होकर 20 मार्च को रात में 2 बजकर 23 मिनट पर समाप्त हो रही है।
- विजया एकादशी 06 मार्च को सुबह 06 बजकर 30 मिनट से 07 मार्च सुबह 04 बजकर 13 मिनट तक रहेगा।
- होलिका दहन का शुभ मुहूर्त 24 मार्च को देर रात 11 बजकर 13 मिनट से शुरू होगा और 12 बजकर 27 मिनट तक रहेगा।
- कृष्ण पक्ष की अमावस्या को फाल्गुन की अमावस्या कहा जाता है। इस वर्ष 10 मार्च को फाल्गुन अमावस्या है। इस अमावस्या पर किसी पवित्र नदी में स्नान के बाद सूर्य देव को जल देना चाहिए। मनोकामना पूर्ण होती है।