{"_id":"84-56688","slug":"Panipat-56688-84","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब खुद जांच सकेंगे पानी की शुद्धता ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब खुद जांच सकेंगे पानी की शुद्धता
Panipat
Updated Fri, 07 Jun 2013 05:30 AM IST
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पानीपत। घरों में आने वाला पानी कितना शुद्ध है? क्या यह पानी पीने लायक है? अथवा यह स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है? सहित कई सवालों के जवाब आपको खुद ही मिल जाएंगे। अब लोग खुद ही अपने घर, मोहल्ले, गांव या शहर में आने वालेे पानी की शुद्धता जांच सकेंगे। पानी की शुद्धता को जांचने के लिए जन स्वास्थ्य विभाग लोगाें को एचटूएस नाम से बोतल उपलब्ध कराएगा। यह बोतल गांव-गांव जाकर बिल्कुल मुफ्त दी जाएंगी। इसके इस्तेमाल से लोग खुद ही पानी की शुद्धता को जांच सकेंगे।
वित्तीय वर्ष 2013-14 के दौरान प्रथम चरण में एक हजार बोतलें बांटी जाएंगी। लोगों को शुद्ध पानी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जन स्वास्थ्य विभाग ने यह कदम उठाया है। विभागीय अधिकारियों की माने तो खराब पानी कई तरह से स्वास्थ्य को खराब करता है। इससे बचने के लिए लोगों को शुद्ध पानी मिलना जरूरी है।
ऐेसे जांची जाएगी शुद्धता
जन स्वास्थ्य विभाग की ओर एचटूएस नाम से दी गई बोतल से पानी की शुद्धता को आसानी से जांचा जा सकता है। जन स्वास्थ्य विभाग के खंड संसाधन संयोजक (बीआरसी) सत्यवान ने बताया कि बोतल पर एक तीर का निशान बना है। उपभोक्ता को उस निशान तक पानी भरकर 48 घंटे तक रखना है। अगर 48 घंटे के बाद बोतल में डाले पानी का रंग काला हो जाता है तो समझो यह पानी पीने के लायक नहीं है। उसमें किसी न किसी रूप में कीटाणु हैं। पानी को खराब बता चुकी बोतल उपभोक्ताओं को अपने नजदीकी जन स्वास्थ्य विभाग में देनी होगी। विभाग ही उसकी अपनी लेबोरेट्री में जांच कराएगा। इसके बाद पता लगेगा कि पानी में किस तरह के कीटाणु या केमिकल हैं।
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पानी को शुद्ध करने के लिए करेें उपचार
अगर पानी खराब है तो पानी की रिपोर्ट आने और समस्या का हल होने तक उपभोक्ताओं को खुद भी संभल कर पानी पीना होगा। उबाल कर, चिकित्सा विभाग द्वारा उपलब्ध क्लोरिन और हैलोजन टेबलेट्स मिलाकर या ब्लीचिंग पाउडर की निर्धारित मात्रा डालने पानी कीटाणु रहित हो जाता है।
वर्जन
सभी को शुद्ध पेयजल मिले, यही विभाग का प्रयास है। उपभोक्ता खुद भी पानी की शुद्धता को जांच सकते हैं। पानी की शुद्धता को जांचने के लिए विभाग की ओर से एचटूएस नामक बोतल मुफ्त में उपलब्ध कराई जाएंगी। बोतलों को बांटने का कार्य जल्द शुरू होगा। अगर किसी उपभोक्ता को लगता है उनके क्षेत्र में आने वाला पानी शुद्ध नहीं है तो वह कार्यालय से एचटूएस बोतल ले जाकर शुद्धता को जांच सकता है।
विकास सिंग्रोहा, कार्यकारी अभियंता, जन स्वास्थ्य विभाग, पानीपत।
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वित्तीय वर्ष 2013-14 के दौरान प्रथम चरण में एक हजार बोतलें बांटी जाएंगी। लोगों को शुद्ध पानी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जन स्वास्थ्य विभाग ने यह कदम उठाया है। विभागीय अधिकारियों की माने तो खराब पानी कई तरह से स्वास्थ्य को खराब करता है। इससे बचने के लिए लोगों को शुद्ध पानी मिलना जरूरी है।
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ऐेसे जांची जाएगी शुद्धता
जन स्वास्थ्य विभाग की ओर एचटूएस नाम से दी गई बोतल से पानी की शुद्धता को आसानी से जांचा जा सकता है। जन स्वास्थ्य विभाग के खंड संसाधन संयोजक (बीआरसी) सत्यवान ने बताया कि बोतल पर एक तीर का निशान बना है। उपभोक्ता को उस निशान तक पानी भरकर 48 घंटे तक रखना है। अगर 48 घंटे के बाद बोतल में डाले पानी का रंग काला हो जाता है तो समझो यह पानी पीने के लायक नहीं है। उसमें किसी न किसी रूप में कीटाणु हैं। पानी को खराब बता चुकी बोतल उपभोक्ताओं को अपने नजदीकी जन स्वास्थ्य विभाग में देनी होगी। विभाग ही उसकी अपनी लेबोरेट्री में जांच कराएगा। इसके बाद पता लगेगा कि पानी में किस तरह के कीटाणु या केमिकल हैं।
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पानी को शुद्ध करने के लिए करेें उपचार
अगर पानी खराब है तो पानी की रिपोर्ट आने और समस्या का हल होने तक उपभोक्ताओं को खुद भी संभल कर पानी पीना होगा। उबाल कर, चिकित्सा विभाग द्वारा उपलब्ध क्लोरिन और हैलोजन टेबलेट्स मिलाकर या ब्लीचिंग पाउडर की निर्धारित मात्रा डालने पानी कीटाणु रहित हो जाता है।
वर्जन
सभी को शुद्ध पेयजल मिले, यही विभाग का प्रयास है। उपभोक्ता खुद भी पानी की शुद्धता को जांच सकते हैं। पानी की शुद्धता को जांचने के लिए विभाग की ओर से एचटूएस नामक बोतल मुफ्त में उपलब्ध कराई जाएंगी। बोतलों को बांटने का कार्य जल्द शुरू होगा। अगर किसी उपभोक्ता को लगता है उनके क्षेत्र में आने वाला पानी शुद्ध नहीं है तो वह कार्यालय से एचटूएस बोतल ले जाकर शुद्धता को जांच सकता है।
विकास सिंग्रोहा, कार्यकारी अभियंता, जन स्वास्थ्य विभाग, पानीपत।