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सार्वजनिक स्थलों पर बढ़ानी होगी सुरक्षा
Panipat
Updated Mon, 12 Nov 2012 12:00 PM IST
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पानीपत। भले की महिलाआें को उनके हक देने को लेकर आए दिन कितने भी लंबे चौडे़ दावे किए जा रहे हों लेकिन वे आज भी वह सुरक्षित नहीं है। कालेज की छात्राआें से उनकी सुरक्षा को लेकर अमर उजाला द्वारा की गई बातचीत में यह बात निकलकर सामने आई।
आर्य पीजी कालेज की चेष्ठा पवार का कहना है आज भी अनेक स्थानाें पर महिलाएं अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित रहती हैं। कई परिवाराें में लड़काें की परवरिश सही ढंग से नहीं हो रही जिसकी वजह से उनमें संस्काराें की कमी रहती जाती है। यही बाद में महिलाआें के लिए परेशानी का कारण बनती है।
आर्य पीजी कालेज की शीतल राव का कहना है कि महंगाई के दौर में आजकल परिवार के अधिकांश सदस्य वर्किंग हो चुके हैं। इसकी वजह से बच्चाें को पूरा समय नहीं पाते। अगर बच्चाें को कोई सही ढंग से गाइड करेगा ही नहीं तो उसका खामियाजा समाज को झेलना ही पडे़गा। इसका सबसे अधिक खामियाजा आज सबसे अधिक महिला को असुरक्षा की भावना में जीकर झेलना पड़ रहा है।
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आर्य पीजी कालेज की एकता कुंडू बताती हैं कि टीवी व इंटरनेट संस्कृति से युवा बेहद प्रभावित हैं। उनका असर उनके लाइफ स्टाइल में साफ-साफ देखा जा सकता है। वह उसे हकीकत में उतारने की कोशिश करते हैं। रही-सही कसर हमारा कमजोर कानून पूरी कर देता है। किसी को अपने जुर्म की ठोस सजा न मिलने पर वह उन्मुक्त होता चला जाता है।
आर्य पीजी कालेज की रूबी कंधोल ने कहा कि आज 21 शताब्दी में आकर भी महिलाएं सुरक्षित नहीं है। सार्वजनिक स्थलाें पर मनचले फब्तियां यहां तक शारीरिक छेड़छाड़ करने तक नहीं चूकते। हमारी कमजोर सुरक्षा व्यवस्था उनके हौसले बढ़ाने को काफी है। मगर उनकी मांग है कि ऐसे लोगों को कड़ी सजा मिले तभी छेड़छाड़ की घटनाआें पर अंकुश लग पाएगा।
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आर्य पीजी कालेज की चेष्ठा पवार का कहना है आज भी अनेक स्थानाें पर महिलाएं अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित रहती हैं। कई परिवाराें में लड़काें की परवरिश सही ढंग से नहीं हो रही जिसकी वजह से उनमें संस्काराें की कमी रहती जाती है। यही बाद में महिलाआें के लिए परेशानी का कारण बनती है।
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आर्य पीजी कालेज की शीतल राव का कहना है कि महंगाई के दौर में आजकल परिवार के अधिकांश सदस्य वर्किंग हो चुके हैं। इसकी वजह से बच्चाें को पूरा समय नहीं पाते। अगर बच्चाें को कोई सही ढंग से गाइड करेगा ही नहीं तो उसका खामियाजा समाज को झेलना ही पडे़गा। इसका सबसे अधिक खामियाजा आज सबसे अधिक महिला को असुरक्षा की भावना में जीकर झेलना पड़ रहा है।
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आर्य पीजी कालेज की एकता कुंडू बताती हैं कि टीवी व इंटरनेट संस्कृति से युवा बेहद प्रभावित हैं। उनका असर उनके लाइफ स्टाइल में साफ-साफ देखा जा सकता है। वह उसे हकीकत में उतारने की कोशिश करते हैं। रही-सही कसर हमारा कमजोर कानून पूरी कर देता है। किसी को अपने जुर्म की ठोस सजा न मिलने पर वह उन्मुक्त होता चला जाता है।
आर्य पीजी कालेज की रूबी कंधोल ने कहा कि आज 21 शताब्दी में आकर भी महिलाएं सुरक्षित नहीं है। सार्वजनिक स्थलाें पर मनचले फब्तियां यहां तक शारीरिक छेड़छाड़ करने तक नहीं चूकते। हमारी कमजोर सुरक्षा व्यवस्था उनके हौसले बढ़ाने को काफी है। मगर उनकी मांग है कि ऐसे लोगों को कड़ी सजा मिले तभी छेड़छाड़ की घटनाआें पर अंकुश लग पाएगा।