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गन्ना किसानों ने शुगर मिल के बाहर की महापंचायत, नए शुगर मिल व अतिरिक्त गन्ने के भुगतान की रखी मांग, स्थानीय दुकानदारों ने स्टर ब
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गन्ना किसानों ने शुगर मिल के बाहर की महापंचायत, नए शुगर मिल व अतिरिक्त गन्ने के भुगतान की रखी मांग, स्थानीय दुकानदारों ने स्टर बंद करके दिया किसानों को समर्थन
पानीपत। गोहाना रोड स्थित शुगर मिल गेट पर गन्ना किसानों ने वीरवार दोपहर एक माहपंचायत का आयोजन किया। पंचायत में भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष रत्नमान, जिला प्रधान सतनारायण बांगड़ सहित जिले के गन्ना किसान मौजूद रहे। साथ ही स्थानिय नागरिकों ने भी पंचायत में भाग लिया। जिसमें मुख्य रूप से किसानों की दो मांगों पर चर्चा हुई, पहली मिल शिफ्टिंग व दूसरी किसानों के अतिरिक्त गन्ने की अन्य जिले की मिलों में बाँडिंग करवाने की। किसानों ने इस मौके पर बीजेपी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। साथ ही किसानों ने कहा कि नई मिल ना बनने के कारण किसानों को दूसरे प्रदेशों में गन्ना डालना पड़ता है, जिस कारण किसानों का आने जाने का खर्चा होता है, जो बहुत महंगा पड़ता है। पिछले साल किसानों ने यूपी की मिलों में गन्ना डाला था, जिसका यूपी की शुगर मिलों ने अब तक किसानों के गन्ने का भुगतान नहीं किया है। किसानों ने बताया कि यूपी के मिलों में पानीपत के किसानों का दो करोड़ से भी अधिक रुपया बकाया है। किसानों ने मुख्यमंत्री द्वारा किए गए शिलान्यास पर कहा कि जब मुख्यमंत्री के द्वारा शिलान्यास किए गए किसी काम को ही प्रगती नहीं मिलती है तो सरकार में किसी और से क्या उम्मीद रखी जा सकती है। साथ ही कहा कि मुख्यमंत्री ने स्टेज से कहा था कि शुगर मिल की मांग किसानों की 25 साल पुरानी है जो अब पूरी हो रही है, लेकिन अब मांग को 28 साल हो चुके हैं और मांग अब तक भी पूरी नहीं हुई है। अब तो मिल की क्षमता भी घट कर 13 हजार क्विंटल रह गई है। जिस कारण इस साल की गति को देखते हुए टारगेट भी पूरा होता नहीं दिखाई दे रहा है। इस मौके पर स्थानीय दुुकानदारों ने भी स्टर बंद करके किसानों को समर्थन दिया। किसानों ने पंचायत में आगामी रणनीति तैयार करने के बाद एमडी शुगर मिल संदीप अग्रवाल को ज्ञापन सौंपा व अपनी समस्याओं के बारे में उनको अवगत करवाया।
किसानों ने कहा कि शुगर मिल आम तौर पर मार्च अप्रैल तक चलता है, लेकिन पुरानी मिल होने के कारण पिछले वर्ष अप्रैल तक मिल चली, जिस कारण सरकार व किसान दोनों को नुकसान झेलना पड़ा। सरकार व किसान पिछले तीन साल में इतना नुकसान झेल चुके हैं, जिसमें नई मिल तैयार हो जाती। किसान सुरेंद्र नांदल ने कहा कि मिल में रेलवे के इंजन लगे हुए है, जो रेलवे ने भी कब के प्रयोग करने छोड़ दिये है।
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किसानों ने डेढ वर्ष पहले चार दिन का आंदोलन किया था, जिसके बाद प्रशासन ने आश्वासन दिया था कि एक माह के अंदर मिल का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा, लेकिन आज तक मिल का निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है।
किसानों ने याद रखी हुई थी शिलान्यास की तारीख :
गन्ना किसानों ने कहा कि 18 अक्तूबर 2015 को मुख्यमंत्री ने मिल का शिलान्यास किया था और दावा किया था कि दो साल के अंदर अंदर मिल बनकर तैयार हो जाएगी, लेकिन इस बात को पूरे तीन साल ढाई माह हो चुके हैं। परंतु आज तक किसी मिल के लिए एक ईंट तक नहीं रखी गई है।
किसानों को मुख्यमंत्री के साथ साथ स्थानिय नेताओं से भी शिकायत है। किसानों ने कहा कि शिलान्यास के समय स्टेज पर महिपाल ढांड़ा, परिवहन मंत्री कृष्णलाल पंवार व अन्य बीजेपी के नेता मौजूद थे, लेकिन किसी ने मिल बनवाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया है। मुख्यमंत्री ने उस समय मिल का श्रेय ग्रामीण विधायक महिपाल ढांड़ा को दिया था, लेकिन उन्होंन आज तक इसके बारे में कोई कदम नहीं उठाया है।
किसानों ने कहा कि शुगर मिल द्वारा गन्ने को सुखा बता कर प्रति ट्राली चार पांच क्विंटल गन्ने के पैसे काटे जाते हैं। किसान सुरेंद्र नांदल ने बताया कि गन्ना किसान शुगर मिल में मिल द्वारा भेजी गई डाक के हिसाब से ही गन्ना लेकर आते हैं, लेकिन मिल में बार बार पिराई रूकने पर किसानों की गन्ने से भरी ट्रोली मिल में ही खड़ी रहती है, जिस कारण गन्ना थोड़ा सुख जाता है। जिस कारण मिल इसकी भरपाई भी किसानों से ही करता है। इसमें किसानों को दोहरा नुकसान होता है एक तो गन्ना सुखने का दूसरा गन्ने मिल द्वारा काटे गए वजन का।
किसाना आनंद जागलान ने कहा कि किसानों का काम फसल का उत्पादन करना है व सरकार का काम पूरी फस की खरीद करना है। किसान तो अपना काम बखुबी कर रहे हैं, लेकिन सरकार अपने काम को नहीं कर रही है। जिस कारण किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
बिहौली से किसान भीम सिंह ने कहा कि नया शुगर मिल जल्द से जल्द लगना चाहिए। किसानों को राजनीति की भेंट नहीं चढ़ाना चाहिए। जब शुगर मिल की घोषणा हुई थी तो किसान बेहद खुश थे, लेकिन सरकार शिलान्यास करके भूल गई है। जिस कारण किसानों को यूपी में भी गन्ना डालना पड़ता है। पानीपत के किसानों के यूपी की शुगर मिलों में दो करोड़ रज्ञ्ुपये बकाया है।
मालपुर निवासी किसान कर्मबीर ने कहा कि उनके पास 15 एकड़ ईंख है। जनवरी तक इसमें दस एकड़ की छिलाई होनी थी, लेकिन अब तक केवल दो एकड़ की ही छिलाई हुई है। जिस कारण उनको प्रति एकड़ पचास हजार तक का नुकसान झेलना पड़ेगा।
किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष रत्नमान ने कहा कि इस पंचायत में फैसला लिया गया है कि एक फरवरी से शुगर मिल गेट पर प्रतिदिन पांच किसान सांकेतिक धरने पर बैठेंगे। यह धरना दस फरवरी तक चलेगा। फिर भी सरकार नई शुगर मिल का काम शुरू नहीं करवाती है तो 12 फरवरी को किसानों द्वारा गोहाना रोड को पूरी तरह से जाम किया जाएगा। जिसके लिए सरकार खुद जिम्मेदार होगी। इससे पहले किसानों की अन्य शुगर मिलों में जल्द से जल्द बाँडिंग कराने के लिए एमडी शुगर मिल को ज्ञापन दे दिया गया है।
शुगर मिल एमडी संदीप अग्रवाल ने कहा कि गन्ने के बाँड बनाकर उच्च अधिकारियों को भेज दिए गए है। मिल आने वाली समस्याओं को हम जल्द ही ठी करवा देते हैं। मिल पुरानी होने के कारण ही दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
पानीपत। गोहाना रोड स्थित शुगर मिल गेट पर गन्ना किसानों ने वीरवार दोपहर एक माहपंचायत का आयोजन किया। पंचायत में भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष रत्नमान, जिला प्रधान सतनारायण बांगड़ सहित जिले के गन्ना किसान मौजूद रहे। साथ ही स्थानिय नागरिकों ने भी पंचायत में भाग लिया। जिसमें मुख्य रूप से किसानों की दो मांगों पर चर्चा हुई, पहली मिल शिफ्टिंग व दूसरी किसानों के अतिरिक्त गन्ने की अन्य जिले की मिलों में बाँडिंग करवाने की। किसानों ने इस मौके पर बीजेपी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। साथ ही किसानों ने कहा कि नई मिल ना बनने के कारण किसानों को दूसरे प्रदेशों में गन्ना डालना पड़ता है, जिस कारण किसानों का आने जाने का खर्चा होता है, जो बहुत महंगा पड़ता है। पिछले साल किसानों ने यूपी की मिलों में गन्ना डाला था, जिसका यूपी की शुगर मिलों ने अब तक किसानों के गन्ने का भुगतान नहीं किया है। किसानों ने बताया कि यूपी के मिलों में पानीपत के किसानों का दो करोड़ से भी अधिक रुपया बकाया है। किसानों ने मुख्यमंत्री द्वारा किए गए शिलान्यास पर कहा कि जब मुख्यमंत्री के द्वारा शिलान्यास किए गए किसी काम को ही प्रगती नहीं मिलती है तो सरकार में किसी और से क्या उम्मीद रखी जा सकती है। साथ ही कहा कि मुख्यमंत्री ने स्टेज से कहा था कि शुगर मिल की मांग किसानों की 25 साल पुरानी है जो अब पूरी हो रही है, लेकिन अब मांग को 28 साल हो चुके हैं और मांग अब तक भी पूरी नहीं हुई है। अब तो मिल की क्षमता भी घट कर 13 हजार क्विंटल रह गई है। जिस कारण इस साल की गति को देखते हुए टारगेट भी पूरा होता नहीं दिखाई दे रहा है। इस मौके पर स्थानीय दुुकानदारों ने भी स्टर बंद करके किसानों को समर्थन दिया। किसानों ने पंचायत में आगामी रणनीति तैयार करने के बाद एमडी शुगर मिल संदीप अग्रवाल को ज्ञापन सौंपा व अपनी समस्याओं के बारे में उनको अवगत करवाया।
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किसानों ने कहा कि शुगर मिल आम तौर पर मार्च अप्रैल तक चलता है, लेकिन पुरानी मिल होने के कारण पिछले वर्ष अप्रैल तक मिल चली, जिस कारण सरकार व किसान दोनों को नुकसान झेलना पड़ा। सरकार व किसान पिछले तीन साल में इतना नुकसान झेल चुके हैं, जिसमें नई मिल तैयार हो जाती। किसान सुरेंद्र नांदल ने कहा कि मिल में रेलवे के इंजन लगे हुए है, जो रेलवे ने भी कब के प्रयोग करने छोड़ दिये है।
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किसानों ने डेढ वर्ष पहले चार दिन का आंदोलन किया था, जिसके बाद प्रशासन ने आश्वासन दिया था कि एक माह के अंदर मिल का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा, लेकिन आज तक मिल का निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है।
किसानों ने याद रखी हुई थी शिलान्यास की तारीख :
गन्ना किसानों ने कहा कि 18 अक्तूबर 2015 को मुख्यमंत्री ने मिल का शिलान्यास किया था और दावा किया था कि दो साल के अंदर अंदर मिल बनकर तैयार हो जाएगी, लेकिन इस बात को पूरे तीन साल ढाई माह हो चुके हैं। परंतु आज तक किसी मिल के लिए एक ईंट तक नहीं रखी गई है।
किसानों को मुख्यमंत्री के साथ साथ स्थानिय नेताओं से भी शिकायत है। किसानों ने कहा कि शिलान्यास के समय स्टेज पर महिपाल ढांड़ा, परिवहन मंत्री कृष्णलाल पंवार व अन्य बीजेपी के नेता मौजूद थे, लेकिन किसी ने मिल बनवाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया है। मुख्यमंत्री ने उस समय मिल का श्रेय ग्रामीण विधायक महिपाल ढांड़ा को दिया था, लेकिन उन्होंन आज तक इसके बारे में कोई कदम नहीं उठाया है।
किसानों ने कहा कि शुगर मिल द्वारा गन्ने को सुखा बता कर प्रति ट्राली चार पांच क्विंटल गन्ने के पैसे काटे जाते हैं। किसान सुरेंद्र नांदल ने बताया कि गन्ना किसान शुगर मिल में मिल द्वारा भेजी गई डाक के हिसाब से ही गन्ना लेकर आते हैं, लेकिन मिल में बार बार पिराई रूकने पर किसानों की गन्ने से भरी ट्रोली मिल में ही खड़ी रहती है, जिस कारण गन्ना थोड़ा सुख जाता है। जिस कारण मिल इसकी भरपाई भी किसानों से ही करता है। इसमें किसानों को दोहरा नुकसान होता है एक तो गन्ना सुखने का दूसरा गन्ने मिल द्वारा काटे गए वजन का।
किसाना आनंद जागलान ने कहा कि किसानों का काम फसल का उत्पादन करना है व सरकार का काम पूरी फस की खरीद करना है। किसान तो अपना काम बखुबी कर रहे हैं, लेकिन सरकार अपने काम को नहीं कर रही है। जिस कारण किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
बिहौली से किसान भीम सिंह ने कहा कि नया शुगर मिल जल्द से जल्द लगना चाहिए। किसानों को राजनीति की भेंट नहीं चढ़ाना चाहिए। जब शुगर मिल की घोषणा हुई थी तो किसान बेहद खुश थे, लेकिन सरकार शिलान्यास करके भूल गई है। जिस कारण किसानों को यूपी में भी गन्ना डालना पड़ता है। पानीपत के किसानों के यूपी की शुगर मिलों में दो करोड़ रज्ञ्ुपये बकाया है।
मालपुर निवासी किसान कर्मबीर ने कहा कि उनके पास 15 एकड़ ईंख है। जनवरी तक इसमें दस एकड़ की छिलाई होनी थी, लेकिन अब तक केवल दो एकड़ की ही छिलाई हुई है। जिस कारण उनको प्रति एकड़ पचास हजार तक का नुकसान झेलना पड़ेगा।
किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष रत्नमान ने कहा कि इस पंचायत में फैसला लिया गया है कि एक फरवरी से शुगर मिल गेट पर प्रतिदिन पांच किसान सांकेतिक धरने पर बैठेंगे। यह धरना दस फरवरी तक चलेगा। फिर भी सरकार नई शुगर मिल का काम शुरू नहीं करवाती है तो 12 फरवरी को किसानों द्वारा गोहाना रोड को पूरी तरह से जाम किया जाएगा। जिसके लिए सरकार खुद जिम्मेदार होगी। इससे पहले किसानों की अन्य शुगर मिलों में जल्द से जल्द बाँडिंग कराने के लिए एमडी शुगर मिल को ज्ञापन दे दिया गया है।
शुगर मिल एमडी संदीप अग्रवाल ने कहा कि गन्ने के बाँड बनाकर उच्च अधिकारियों को भेज दिए गए है। मिल आने वाली समस्याओं को हम जल्द ही ठी करवा देते हैं। मिल पुरानी होने के कारण ही दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।