फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Panipat News ›   -पिछले छह माह में 69 लोग मौत को लगा चुके गले

-पिछले छह माह में 69 लोग मौत को लगा चुके गले

Mon, 10 Jul 2017 12:56 AM IST
Updated Mon, 10 Jul 2017 12:56 AM IST
विज्ञापन
-पिछले छह माह में 69 लोग मौत को लगा चुके गले
जिंदगी पर भारी तनाव, छह माह में 69 ने की खुदकुशी
विज्ञापन

-हर तीसरे दिन एक व्यक्ति लगा रहा मौत को गले, मानसिक तनाव और पारिवारिक कलह बन रही कारण

अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। भागदौड़ भरी जिंदगी, हर कदम पर मुसीबत, आत्मविश्वास खोते युवा और तनाव में मनुष्य की जिंदगी आज आखिरी रास्ता मौत को चुन रही है। जिंदगी पर भारी पड़ रहा यही तनाव हर तीसरे दिन एक व्यक्ति की जान ले रहा है। आंकड़ों पर नजर डालें तो हर तीसरे दिन एक व्यक्ति मौत को गले लगा रहा है। पिछले छह माह में 69 लोग मौत को गले लगा चुके हैं। आत्महत्या करने वालों में बड़ी संख्या युवाओं की है। एक नजर से देखे तो 75 प्रतिशत युवा, 15 प्रतिशत बुजुर्ग व 10 प्रतिशत नाबालिग शामिल हैं। इनमें सबसे ज्यादा मामले पारिवारिक कलह के सामने आ रहे हैं। मनोचिकित्सक की मानें तो आज के युवाओं में दृढ़ इच्छा शक्ति का अभाव है। युवा विपरीत परिस्थितियों में हौसला बनाए रखने की ताकत खो चुका है। इसलिए वे परेशानियों का सामना करने की बजाए मौत के रास्ते को ही आखिरी मंजिल मान रहे हैं। जरूरत है युवाओं को सही मार्गदर्शन देने की।
केस-1
27 फरवरी 2017 को गांव कवि निवासी मोनिका ने पति राजेंद्र द्वारा अपने मायके में बहन की शादी में दो दिन पहले चलने की बात कही। पति ने खेत का काम होने के कारण जाने से इनकार करते हुए शादी वाले दिन ही जाने की बात कही। पति द्वारा इनकार करने पर मोनिका ने अपने पांच साल के लड़के का गला घोंट दिया और लकड़ी की थपकी से सात साल की बेटी के सिर पर कई वार करते हुए खुद भी फांसी लगा ली। मां-बेटे की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि सात साल की लड़की ने निजी अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया था।
विज्ञापन

केस-2
28 अप्रैल को जींद के गांव बरौदा निवासी एक महिला ससुराल में कलह होने के बाद पानीपत बतरा कॉलोनी स्थित मायके के लिए रवाना हुई, लेकिन पानीपत असंध नहर नाका चौकी के पास पहुंचने पर दोनों बच्चों समेत नहर में छलांग लगा दी। लोगों ने मां व दो साल की बेटी को बचा लिया, लेकिन पांच साल के बेटे की मौत हो गई। जिसका शव तीन दिन बाद दिल्ली पैरलल नहर से बरामद हुआ।
विज्ञापन
विज्ञापन

केस-3
21 जून को पारिवारिक कलह के चलते चांदनी बाग निवासी अध्यापिका ने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। इस मामले में ससुराल पक्ष के जेठ-जेठानी व अन्य पर आत्महत्या के लिए मजबूर करने का आरोप लगा था। पुलिस ने शिकायत के आधार पर केस दर्ज करते हुए जांच शुरू कर दी थी।
इस वर्ष कब कितने लोगों ने की आत्महत्याएं
माह आत्महत्या
जनवरी 10
फरवरी 11
मार्च 10
अप्रैल 11
मई 18
जून 09

केमिकल लोचा भी है कारण
मनोचिकित्सक डॉ. मोना नागपाल का कहना है कि गर्मी के दिनों में दिमाग में नैरो केमिकल की अदल-बदल होती है। जिस कारण दिमाग का संतुलन बिगड़ जाता है और व्यक्ति अपनी जिंदगी खत्म करने की सोचता है। ऐसी दशा में तनावग्रस्त व्यक्ति को अकेला नहीं छोड़ना चाहिए।


अवसाद में धकेल रहा मानसिक तनाव
मनोचिकित्सक रजत सेतिया का कहना है कि भागदौड़ भरी जिंदगी व मानसिक तनाव लोगों को अवसाद में धकेल रहा है। जिस कारण मनुष्य आत्महत्या जैसे कदम उठा रहा है। आत्महत्या एक तात्कालिक घटना है। जिसका निर्णय व्यक्ति कुछ मिनट में ही ले लेता है। व्यक्ति को चाहिए कि वह क्षमता, आय के हिसाब से ही अपनी सीमाएं तय करे। परिवार में तालमेल रखे और कोई समस्या है तो उसका मिल-जुलकर हल खोजे। अवसाद व निराशा से बचे और खुद पर अकेलापन हावी न होने दें। सकारात्मक सोच व हर समय व्यस्त रहना भी व्यक्ति को आत्महत्या जैसे मार्ग पर चलने से बचा सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed