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-रेनू को केंद्रीय मंत्री के आश्वासन के बाद भी नहीं हो पाई आश्वस्त
Updated Fri, 09 Jun 2017 09:23 PM IST
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फोटो-16 व 17
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। माटा चौक कबीर बस्ती में रहने वाली रेनू केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मुख्तार अब्बास नकवी के आश्वासन के बाद भी आश्वस्त नहीं है। उन्हें आज भी अपने मकान की छत और तीन बच्चों का पेट भरने की चिंता सता रही है। रेनू ने साफ कहा कि सरकार को कुछ करना होता तो उसी समय कोई घोषणा कर देते। मंत्री केवल उनका दुख सुनते रहे। जब कुछ करने का वक्त आया तो वे तैयार चाय तक छोड़कर चले गए।
मोदी सरकार के तीन साल बेमिसाल कार्यक्रम के दौरान वीरवार को केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य राज्यमंत्री मुख्तार अब्बास नकवी पानीपत पहुंचे थे। केंद्रीय मंत्री एसडी विद्या मंदिर में अल्पसंख्यक समाज के सम्मेलन को संबोधित करने के बाद माटा चौक के पास कबीर बस्ती में रहने वाली रेनू के घर पहुंचे। शुक्रवार को अमर उजाला टीम रेनू के घर पहुंची और मंत्री के आश्वासन के बारे में पूछा। रेनू ने बताया कि सरकार को कुछ करना होता तो मंत्री के साथ आला अधिकारी भी मौजूद थे। वे उसी वक्त अधिकारियों को आदेश देकर योजनाओं का लाभ दिलवाते। ऐसी बातों से दर्द गहरा होता है। मुझे मंत्री के दौरे और आश्वासन के बाद कोई उम्मीद नहीं है।
मंत्री ने इस तरह ली थी जानकारी
रेनू के मकान के नजदीक जैसे ही मंत्री की गाड़ियों का काफिला रुका तो हर कोई बाहर आकर देखने लगा। मंत्री घर की हालत देख बोले की यह घर आपका ही है। रेनू ने इसके बाद आपबीती बताई तो उसे सुनकर मंत्री हैरान रह गए। रेनू बताया कि उसके नाना कभी 360 गांवों के धानक समाज के प्रधान थे। दिल्ली में उनकी शहनाई गूंजती थी। हालात के थपेड़े ऐसे लगे कि घर खंडहर हो गया। अकेली वह अपने बच्चों के साथ रह रही है। बताया कि दो बच्चों के साथ नाना रामस्वरूप के घर में रह रही है। रेनू की मां भी मायके में ही पति के साथ रहती थीं। दोनों की बीमारी के चलते मौत हो गई। कुछ लोगों ने बताया कि रामस्वरूप की 40 साल पहले दिल्ली करोल बाग में बैंड और शहनाई पार्टी थी। उनकी वहां खुद की दुकान थी। उनके घर में सबसे पहले बिजली आई थी, लेकिन आज हालत बदल गए हैं। मोहल्ले में उनके ही घर में बिजली नहीं है। वे 30 साल पहले एंबेसडर कार तक लेकर आए थे। उनके तीन बेटे और एक बेटी शकुंतला थी। बेटे नशे के आदी हुए और बाप की पूरी कमाई को लूटा दिया। बाद में एक-एक कर उनकी मौत हो गई। घर में शकुंतला अपने पति के साथ रहने लगी। मंत्री ने उनको भरोसा दिया और चाय की प्याली पीये बिना ही उठकर चले गए।
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रेनू ने रखी थी मकान और रोजगार की मांग
रेनू ने बताया कि उन्होंने मंत्री के सामने अपने मकान की मांग रखी थी। घर में बिजली का मीटर और छत तक नहीं है। वह मजदूरी कर अपने तीन बच्चों का पेट पालती है। आठ साल का एक बेटा नवजीत और छह साल की बेटी प्रिया उसके पास रहते हैं, जबकि नौ साल की बेटी अपने दादा के पास गांव में रहती है। उसे महीने में 12 से 15 दिन ही काम मिल पाता है। अन्य दिनों में काम की तलाश करती हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को मदद करनी है तो उन्हें रोजगार भी दें, ताकि वह बच्चों को पढ़ा लिखा सके।
मंत्री के लिए दूध और मिठाई लाई, पर सब छोड़कर गए
रेनू ने बताया कि उसको ठेकेदार मजदूरी के 150 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से देता है। वह केंद्रीय मंत्री के आने की सूचना पर उनके लिए चाय बनाने के लिए दूध, चायपत्ती और खाने को मिठाई लेकर आई। उसने मंत्री के लिए चाय भी तैयार की, लेकिन मंत्री ने चाय नहीं पी और उसकी बातों को सुन भरोसा दे उठकर चले गए।
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अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। माटा चौक कबीर बस्ती में रहने वाली रेनू केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मुख्तार अब्बास नकवी के आश्वासन के बाद भी आश्वस्त नहीं है। उन्हें आज भी अपने मकान की छत और तीन बच्चों का पेट भरने की चिंता सता रही है। रेनू ने साफ कहा कि सरकार को कुछ करना होता तो उसी समय कोई घोषणा कर देते। मंत्री केवल उनका दुख सुनते रहे। जब कुछ करने का वक्त आया तो वे तैयार चाय तक छोड़कर चले गए।
मोदी सरकार के तीन साल बेमिसाल कार्यक्रम के दौरान वीरवार को केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य राज्यमंत्री मुख्तार अब्बास नकवी पानीपत पहुंचे थे। केंद्रीय मंत्री एसडी विद्या मंदिर में अल्पसंख्यक समाज के सम्मेलन को संबोधित करने के बाद माटा चौक के पास कबीर बस्ती में रहने वाली रेनू के घर पहुंचे। शुक्रवार को अमर उजाला टीम रेनू के घर पहुंची और मंत्री के आश्वासन के बारे में पूछा। रेनू ने बताया कि सरकार को कुछ करना होता तो मंत्री के साथ आला अधिकारी भी मौजूद थे। वे उसी वक्त अधिकारियों को आदेश देकर योजनाओं का लाभ दिलवाते। ऐसी बातों से दर्द गहरा होता है। मुझे मंत्री के दौरे और आश्वासन के बाद कोई उम्मीद नहीं है।
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मंत्री ने इस तरह ली थी जानकारी
रेनू के मकान के नजदीक जैसे ही मंत्री की गाड़ियों का काफिला रुका तो हर कोई बाहर आकर देखने लगा। मंत्री घर की हालत देख बोले की यह घर आपका ही है। रेनू ने इसके बाद आपबीती बताई तो उसे सुनकर मंत्री हैरान रह गए। रेनू बताया कि उसके नाना कभी 360 गांवों के धानक समाज के प्रधान थे। दिल्ली में उनकी शहनाई गूंजती थी। हालात के थपेड़े ऐसे लगे कि घर खंडहर हो गया। अकेली वह अपने बच्चों के साथ रह रही है। बताया कि दो बच्चों के साथ नाना रामस्वरूप के घर में रह रही है। रेनू की मां भी मायके में ही पति के साथ रहती थीं। दोनों की बीमारी के चलते मौत हो गई। कुछ लोगों ने बताया कि रामस्वरूप की 40 साल पहले दिल्ली करोल बाग में बैंड और शहनाई पार्टी थी। उनकी वहां खुद की दुकान थी। उनके घर में सबसे पहले बिजली आई थी, लेकिन आज हालत बदल गए हैं। मोहल्ले में उनके ही घर में बिजली नहीं है। वे 30 साल पहले एंबेसडर कार तक लेकर आए थे। उनके तीन बेटे और एक बेटी शकुंतला थी। बेटे नशे के आदी हुए और बाप की पूरी कमाई को लूटा दिया। बाद में एक-एक कर उनकी मौत हो गई। घर में शकुंतला अपने पति के साथ रहने लगी। मंत्री ने उनको भरोसा दिया और चाय की प्याली पीये बिना ही उठकर चले गए।
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रेनू ने रखी थी मकान और रोजगार की मांग
रेनू ने बताया कि उन्होंने मंत्री के सामने अपने मकान की मांग रखी थी। घर में बिजली का मीटर और छत तक नहीं है। वह मजदूरी कर अपने तीन बच्चों का पेट पालती है। आठ साल का एक बेटा नवजीत और छह साल की बेटी प्रिया उसके पास रहते हैं, जबकि नौ साल की बेटी अपने दादा के पास गांव में रहती है। उसे महीने में 12 से 15 दिन ही काम मिल पाता है। अन्य दिनों में काम की तलाश करती हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को मदद करनी है तो उन्हें रोजगार भी दें, ताकि वह बच्चों को पढ़ा लिखा सके।
मंत्री के लिए दूध और मिठाई लाई, पर सब छोड़कर गए
रेनू ने बताया कि उसको ठेकेदार मजदूरी के 150 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से देता है। वह केंद्रीय मंत्री के आने की सूचना पर उनके लिए चाय बनाने के लिए दूध, चायपत्ती और खाने को मिठाई लेकर आई। उसने मंत्री के लिए चाय भी तैयार की, लेकिन मंत्री ने चाय नहीं पी और उसकी बातों को सुन भरोसा दे उठकर चले गए।