{"_id":"5c16b004bdec225a1d2dbb21","slug":"61544990724-panipat-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"वार्डबंदी से मतदाताओं को अपने बूथ ढूढ़ने में हुई परेशानी, अधिकांश मतदाता बिना वोट दिए लौटे घर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वार्डबंदी से मतदाताओं को अपने बूथ ढूढ़ने में हुई परेशानी, अधिकांश मतदाता बिना वोट दिए लौटे घर
Updated Mon, 17 Dec 2018 01:39 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वार्डबंदी से मतदाताओं को अपने बूथ ढूंढने में हुई परेशानी, अधिकांश मतदाता बिना वोट दिए लौटे घर
पानीपत। वार्ड 6 निवासी 112 वर्षीय बुजुर्ग महिला मतदाता शकुंतला भी अपने बेजान टांगों के बल चलते हुए मतदान केंद्र तक पहुंची। उसने अपना वोट डालते हुए खुशी जताई। साथ ही आगामी विधानसभा के चुनावों में भी अपना वोट डालने की इच्छा जताई। बुजुर्ग महिला का कहना था कि वोट तो सिर्फ एक अधिकार है। इसलिए वो अपने अधिकारी का इस्तेमाल करने मतदान केंद्र तक आई हैं। लेकिन खेद है कि नेता चुनावी दिनों के बाद कभी भी दोबारा घर के बाहर तक नहीं आते है। जिसके चलते लोगों का राजनेताओं से विश्वास उठ रहा है, और लोग नोटा का बटन दबाने की सोच रखने लगे।
जिस स्कूल के नाम दी पर्ची, उस पर जड़ा रहा ताला, मतदाता गए वापस:
वार्ड 6 स्थित जनता सीनियर सेकंडरी स्कूल में वोट डालने के लिए लोगों को पर्ची बना कर दी गई थी। लेकिन जब वहां मतदाता वोट देने के लिए पहुंचे, तो वहां स्कूल के बाहर ताला जड़ा देख बहुत से मतदाता तो वापस चले गए। कुछ मतदाता अपने वोट का इस्तेमाल करने के लिए दूसरे स्कूल स्थित मतदान केंद्र चले गए। गौरतलब है कि जनता सीनियर सेकंडरी स्कूल में कागजी तौर पर बूथ नहीं थे, बावजूद इसके यहां के मतदाताओं को उसी स्कूल के नाम की वोटर पर्ची दी गई। वहीं पार्षद पद पर आजाद उम्मीदवार नरेश पासी का कहना है कि उनको भी इस स्कूल में वोट न डलने का तब पता लगा, जब स्कूल के गेट के बाहर मतदान के दिन ताला जड़ा देखा।
वार्ड 6 के अधिकांश मतदाताओं ने वार्ड 2 में जाकर डाला अपना वोट:
वार्डबंदी का सबसे ज्यादा असर मतदान के दिन ही देखने को मिला। जब लोगों को अपना वोट देने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ा। रविवार को मतदान के दिन जब लोग अपने घरों से वोट देने के लिए निकले, तो नजदीकी बूथ पर जाकर ही उनको अपने-अपने बूथ के बारे में पता लग रहा था। वार्ड 6 के अधिकांश मतदाता वार्ड 2 स्थित स्कूल के बूथ में देने के लिए गए। इसका कारण सिर्फ ये है कि वार्डबंदी के बाद लोगों को अपने वार्ड व बूथ के बारे में नहीं पता था।
विज्ञापन
अधूरी तैयारियों को देख, मतदाताओं ने प्रशासन को ठहराया जिम्मेदार:
शहर के सभी 278 बूथों पर मतदाताओं के लिए पुख्ता इंतजाम नहीं थे। सभी बूथ पर न ही पीने के पानी के पूर्ण व्यवस्था थी। इन बूथ पर बुजुर्गों, विकलांगों सहित अन्य लाचार मतदाताओं के लिए व्हील चेयर आदि की व्यवस्था भी नहीं थी। जिस कारण ऐसे मतदाताओं के साथ आए परिजनों को उनको गोद में उठा कर पोलिंग बूथ तक ले जाना पड़ा व इसी तरह से वापस घर की ओर ले गए। इन अधूरी तैयारियों को देख कर मतदाताओं ने इसका जिम्मेदार प्रशासन को ठहराया।
विज्ञापन
पानीपत। वार्ड 6 निवासी 112 वर्षीय बुजुर्ग महिला मतदाता शकुंतला भी अपने बेजान टांगों के बल चलते हुए मतदान केंद्र तक पहुंची। उसने अपना वोट डालते हुए खुशी जताई। साथ ही आगामी विधानसभा के चुनावों में भी अपना वोट डालने की इच्छा जताई। बुजुर्ग महिला का कहना था कि वोट तो सिर्फ एक अधिकार है। इसलिए वो अपने अधिकारी का इस्तेमाल करने मतदान केंद्र तक आई हैं। लेकिन खेद है कि नेता चुनावी दिनों के बाद कभी भी दोबारा घर के बाहर तक नहीं आते है। जिसके चलते लोगों का राजनेताओं से विश्वास उठ रहा है, और लोग नोटा का बटन दबाने की सोच रखने लगे।
जिस स्कूल के नाम दी पर्ची, उस पर जड़ा रहा ताला, मतदाता गए वापस:
वार्ड 6 स्थित जनता सीनियर सेकंडरी स्कूल में वोट डालने के लिए लोगों को पर्ची बना कर दी गई थी। लेकिन जब वहां मतदाता वोट देने के लिए पहुंचे, तो वहां स्कूल के बाहर ताला जड़ा देख बहुत से मतदाता तो वापस चले गए। कुछ मतदाता अपने वोट का इस्तेमाल करने के लिए दूसरे स्कूल स्थित मतदान केंद्र चले गए। गौरतलब है कि जनता सीनियर सेकंडरी स्कूल में कागजी तौर पर बूथ नहीं थे, बावजूद इसके यहां के मतदाताओं को उसी स्कूल के नाम की वोटर पर्ची दी गई। वहीं पार्षद पद पर आजाद उम्मीदवार नरेश पासी का कहना है कि उनको भी इस स्कूल में वोट न डलने का तब पता लगा, जब स्कूल के गेट के बाहर मतदान के दिन ताला जड़ा देखा।
विज्ञापन
वार्ड 6 के अधिकांश मतदाताओं ने वार्ड 2 में जाकर डाला अपना वोट:
वार्डबंदी का सबसे ज्यादा असर मतदान के दिन ही देखने को मिला। जब लोगों को अपना वोट देने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ा। रविवार को मतदान के दिन जब लोग अपने घरों से वोट देने के लिए निकले, तो नजदीकी बूथ पर जाकर ही उनको अपने-अपने बूथ के बारे में पता लग रहा था। वार्ड 6 के अधिकांश मतदाता वार्ड 2 स्थित स्कूल के बूथ में देने के लिए गए। इसका कारण सिर्फ ये है कि वार्डबंदी के बाद लोगों को अपने वार्ड व बूथ के बारे में नहीं पता था।
विज्ञापन
अधूरी तैयारियों को देख, मतदाताओं ने प्रशासन को ठहराया जिम्मेदार:
शहर के सभी 278 बूथों पर मतदाताओं के लिए पुख्ता इंतजाम नहीं थे। सभी बूथ पर न ही पीने के पानी के पूर्ण व्यवस्था थी। इन बूथ पर बुजुर्गों, विकलांगों सहित अन्य लाचार मतदाताओं के लिए व्हील चेयर आदि की व्यवस्था भी नहीं थी। जिस कारण ऐसे मतदाताओं के साथ आए परिजनों को उनको गोद में उठा कर पोलिंग बूथ तक ले जाना पड़ा व इसी तरह से वापस घर की ओर ले गए। इन अधूरी तैयारियों को देख कर मतदाताओं ने इसका जिम्मेदार प्रशासन को ठहराया।