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पीएनजी की अनिवार्यता पर 550 उद्यमी कर रहे पलायन की तैयारी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 06 Feb 2022 01:33 AM IST
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550 entrepreneurs are preparing for migration on the necessity of PNG
पानीपत। पाइप नेचुरल गैस ( पीएनजी) की अनिवार्यता से परेशान जिले के 550 उद्यमी पलायन की तैयारी कर रहे हैं। उनकी कहना है कि पानीपत को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से बाहर करने पर ही यह समस्या सुलझ सकती है। इसके लिए मुख्यमंत्री एवं उपमुख्यमंत्री से मांग उठाई जा चुकी है। उद्यमियों ने पानीपत से पंजाब एवं उत्तराखंड पलायन की चेतावनी दे दी है। वहां भी भूमि खरीदने की ओर कदम बढ़ा दिए गए हैं। राजस्थान और दिल्ली से पानीपत आने वाले करीब 30 प्रोजेक्ट भी इसी वजह से कैंसल हो चुके हैं।
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एयर क्वालिटी मैनेजमेंट कमीशन ने 30 सितंबर तक सभी उद्योगों में ईंधन के तौर पर पीएनसी और बायोमास के इस्तेमाल का आदेश दिया है। साफ कर दिया है कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में कोयला आधारित उद्योगों का संचालन नहीं होगा। नए उद्योगों को अनापत्ति पत्र भी पीएनजी होने पर ही मिलेगा।
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27 नवंबर के बाद से कैंसल हो रहे बड़े प्रोजेक्ट
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पानीपत समेत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पिछले वर्ष 27 नवंबर से क्लीनर फ्यूल अनिवार्य किया था। बॉयलर में कोयले या लकड़ी के प्रयोग पर रोक लगा दी गई थी। इसके बाद उद्यमी विरोध में भी उतर आए थे। चंडीगढ़ दौड़ लगाई थी। तब से अब तक पानीपत में लगाए जाने वाले कंबल निर्माण के 27 प्रोजेक्ट बड़े प्रोजेक्ट कैंसल हो चुके हैं।
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200 उद्योग एलपीजी और 50 पीएनजी पर हो चुके हैं शिफ्ट
अब तक पानीपत में 200 उद्योग लिक्विड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) और 50 पीएनजी में शिफ्ट हो चुके हैं। सेक्टर-29 और सेक्टर-25 में पीएनजी की पाइप लाइन बिछाई जा चुकी है। करीब एक हजार उद्योगों को पीएनजी पर आना है लेकिन खर्च 30 से 45 लाख रुपये होने से उद्यमी इसे लागू नहीं कर पा रहे।
सरकार सब्सिडी दें, वरना उद्यमी पलायन के लिए तैयार
जिले में रोज 10 टन तक एलपीजी लगती है। उद्योगों को एलपीजी 47.5 किलोग्राम और 422 किलोग्राम के सिलिंडरों में सप्लाई की जाती है। एलपीजी कीमत लगातार बढ़ रही है, जिसकी वजह से उद्योगों पर रोजाना करीब डेढ़ लाख रुपये का खर्च बढ़ गया है। ऐसे में सरकार सब्सिडी दे या उद्यमी पलायन करने को तैयार हैं।

- भीम राणा , प्रधान, डायर्स एसोसिएशन
पानीपत को निकाले एनसीआर से बाहर
पानीपत से खराब प्रदूषण स्तर उतर हरियाणा के कई शहरों का रहता है, लेकिन राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में होने का पानीपत को नुकसान हो रहा है। कई बड़े प्रोजेक्ट रद्द हो गए हैं। उद्यमी पलायन करने को मजबूर है। उद्योगों को बचाने के लिए पानीपत को एनसीआर से बाहर निकालना बेहद जरूरी है। - प्रीतम सचदेवा, प्रधान, पानीपत इंडस्ट्रियल एसोसिएशन
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