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सिविल अस्पताल की नई बिल्डिंग दमा के मरीजों के लिए घातक, 33 करोड़ की बिल्डिंग में क्रॉस वैलीनेशन नहीं, डॉक्टरों के लिए शौचालय बना
Updated Fri, 27 Apr 2018 12:45 AM IST
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संदीप भौरिया
पानीपत।
33 करोड़ में बनकर तैयार हुई सिविल अस्पताल की बिल्डिंग के निर्माण कार्य में बीएंडआर व स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही सामने आई है। इतने बड़े प्रोजेक्ट में बीएंडआर की आरके टैक विंग ने स्वास्थ्य अधिकारियों व डॉक्टरों के लिए शौचालय कहीं मेंशन ही नहीं किए। छह मंजिला बिल्डिंग के हर फ्लोर पर मरीजों के लिए दो शौचालय बनाए गए लेकिन स्वास्थ्य अधिकारियों व डॉक्टरों के लिए शौचालय नहीं बने। अब बिल्डिंग का निर्माण कार्य 98 प्रतिशत पूरा होने के बाद स्वास्थ्य अधिकारियों व डॉक्टरों में इसको लेकर नाराजगी है। इसके अलावा इस प्रोजेक्ट में मरीजों के स्वास्थ्य से भी पूरी तरह से खिलवाड़ हुआ। बिल्डिंग में क्रॉस वेंटिलेशन यानि हवा के आने जाने को भी पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है। जिसके चलते बिल्डिंग के अंदर का तापमान 35 डिग्री से अधिक रहता है जो कि दमा के मरीजों के लिए घातक साबित हो सकता है। सिविल अस्पताल में हर रोज 40-45 दमा के मरीजों की ओपीडी होती है। जिनके स्वास्थ्य को लेकर डॉक्टरों ने चिंता जाहिर की है।
बिल्डिंग में नहीं लगाए एसी:
6 मंजिला बिल्डिंग को चारों तरह से पूरी तरह से शीशों से कवर कर दिया गया। पूरी बिल्डिंग में एक भी खिड़की नहीं छोड़ी गई। इतना ही नही बिल्डिंग में एसी ने होने से मरीजो के स्वास्थ्य पर भी संकट मंडरा रहा है। मरीजों के लिए रूम में दो दो पंखे लगाए गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार सिविल अस्पताल की बिल्डिंग एयर कंडीशन्ड होनी चाहिए, ताकि अंदर की हवा बाहर जाती रहे व मरीजों के स्वास्थ्य पर इसका कोई असर ना पड़े।
ब्लड टेस्ट की लैब प्रथम तल पर होने से गर्भवती महिलाएं परेशान:
स्वास्थ्य अधिकारियों ने लैब के सेटअप में भी पूरी तरह लापरवाही बरती है। खून की जांच के लिए लैब प्रथम तल पर बनाई गई है, जबकि आमतौर पर लैब भू तल पर होनी चाहिए। अब प्रथम तल पर लैब होने के कारण तीमारदारों को गंभीर मरीजों को कंधे पर उठाकर लैब तक ले जाना पड़ता है, जहां उनका ब्लड टेस्ट होता है। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं को प्रथम तल तक जाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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डॉक्टरों को घर से व मरीजों को कैंटीन से लाना पड़ता है पीने का पानी: तीमारदार
अब तक स्वास्थ्य विभाग द्वारा अस्पताल में पीने के पानी की कोई व्यवस्था नही की गई है। जबकि ओपीडी शुरू हुए साढ़े 4 माह हो चुके हैं। हालत यह है कि मरीजों को पीने का पानी कैंटीन से खरीदना पड़ रहा है तथा डॉक्टर अपने लिए घर से पानी लेकर आते हैं। मरीजों का कहना है कि इतनी बड़ी बिल्डिंग में पीने के पानी की व्यवस्था न होने से उन्हें पुरानी बिल्डिंग में जाकर नही तो खरीदकर पानी पीना पड़ता है।
एसीएस के आने की सूचना पर दो वाटर कूलर मंगवाए थे:
पिछले दिनों स्वास्थ्य विभाग के एसीएस अमित झा के आने की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग ने आनन फानन में दो वाटर कूलर मंगवाए थे। मगर जैसे ही उनके ट्रांसफर के बारे में पता चला तो कूलरों को स्टोर में बंद कर दिया गया। अब मरीजों को पीने के पानी के लिए तरसना पड़ रहा है।
ओपीडी बिल्डिंग में डॉक्टरों के विरोध के बाद बने थे शौचालय:
बीएंडआर की आरके टैक विंग ने ओपीडी बिल्डिंग में भी डॉक्टरों के लिए शौचालयों का निर्माण नहीं किया था। सिविल सर्जन डॉ. संतलाल वर्मा ने डीसी की मीटिंग में सबसे पहले ये ही मुद्दा उठाया था। इसी मुद्दे पर तत्कालीन डीसी डॉ. चंद्रशेखर ने बीएंडआर को तत्काल डॉक्टरों के लिए शौचालय बनाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद डॉक्टरों के कैबिन में ही शौचालय बनाए गए।
800 मरीजों की भीड़ में घुट रहें मरीज: डॉक्टर
सिविल अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि बिल्डिंग में उनके लिए काम करना भी मुश्किल हो रहा है। बिल्डिंग का तापमान सामान्य से अधिक है। बिल्डिंग में पीने के पानी तक की सुविधा नहीं है। बिल्डिंग में एयर पासिंग ना होने से दमा के मरीजों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है। ऐसे में सिविल अस्पताल में उनकी हालत ठीक होने की बजाय बिगड़ती जा रही है।
शौचालय व वेंटिलेशन के लिए पत्र लिखा गया है: डॉ. मैहला
स्वास्थ्य अधिकारियों व डॉक्टरों के लिए नई बिल्डिंग में शौचालय को लेकर उनके पास कई शिकायतेें आई थी। उन्होंने इसके निरीक्षण के लिए डीसी को पत्र लिखा है। स्वास्थ्य अधिकारियों व डॉक्टरों के लिए अलग से शौचालय होने जरूरी है। डॉक्टरों के लिए पब्लिक टॉयलेट में जाना संभव नहीं है। बिल्डिंग में वेंटिलेशन के लिए भी लिखकर दिया गया है।
डॉ. सुखबीर मैहला, सिविल सर्जन पानीपत।
एयर पासिंग का समाधान करेंगे, अधिकारियों के लिए टॉयलेट भी बनवाएंगे: अत्री
उनको जैसा प्रपोजल मिला था। उन्होंने बिल्डिंग का निर्माण करवा दिया। अब एयर पासिंग की बात सामने आई है। इसका भी समाधान करवा रहे हैं। साथ ही अधिकारियों व डॉक्टरों के लिए टायलेट बनवा रहे हैं।
प्रदीप अत्री, एक्सईएन बीएंडआर
सुविधाओं के अभाव में दम तोड़ रही सिविल अस्पताल की नई इमारत
-स्वास्थ्य अधिकारियों व डॉक्टरों के लिए मेंशन नहीं किए शौचालय, अब डॉक्टर नाराज
-डॉक्टर बोले- क्रॉस वेंटिलेशन नहीं होने से बिगड़ रही मरीजों की हालत
- बिल्डिंग के अंदर का तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से भी अधिक
फोटो 1 से 5
पानीपत।
33 करोड़ में बनकर तैयार हुई सिविल अस्पताल की बिल्डिंग के निर्माण कार्य में बीएंडआर व स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही सामने आई है। इतने बड़े प्रोजेक्ट में बीएंडआर की आरके टैक विंग ने स्वास्थ्य अधिकारियों व डॉक्टरों के लिए शौचालय कहीं मेंशन ही नहीं किए। छह मंजिला बिल्डिंग के हर फ्लोर पर मरीजों के लिए दो शौचालय बनाए गए लेकिन स्वास्थ्य अधिकारियों व डॉक्टरों के लिए शौचालय नहीं बने। अब बिल्डिंग का निर्माण कार्य 98 प्रतिशत पूरा होने के बाद स्वास्थ्य अधिकारियों व डॉक्टरों में इसको लेकर नाराजगी है। इसके अलावा इस प्रोजेक्ट में मरीजों के स्वास्थ्य से भी पूरी तरह से खिलवाड़ हुआ। बिल्डिंग में क्रॉस वेंटिलेशन यानि हवा के आने जाने को भी पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है। जिसके चलते बिल्डिंग के अंदर का तापमान 35 डिग्री से अधिक रहता है जो कि दमा के मरीजों के लिए घातक साबित हो सकता है। सिविल अस्पताल में हर रोज 40-45 दमा के मरीजों की ओपीडी होती है। जिनके स्वास्थ्य को लेकर डॉक्टरों ने चिंता जाहिर की है।
बिल्डिंग में नहीं लगाए एसी:
6 मंजिला बिल्डिंग को चारों तरह से पूरी तरह से शीशों से कवर कर दिया गया। पूरी बिल्डिंग में एक भी खिड़की नहीं छोड़ी गई। इतना ही नही बिल्डिंग में एसी ने होने से मरीजो के स्वास्थ्य पर भी संकट मंडरा रहा है। मरीजों के लिए रूम में दो दो पंखे लगाए गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार सिविल अस्पताल की बिल्डिंग एयर कंडीशन्ड होनी चाहिए, ताकि अंदर की हवा बाहर जाती रहे व मरीजों के स्वास्थ्य पर इसका कोई असर ना पड़े।
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ब्लड टेस्ट की लैब प्रथम तल पर होने से गर्भवती महिलाएं परेशान:
स्वास्थ्य अधिकारियों ने लैब के सेटअप में भी पूरी तरह लापरवाही बरती है। खून की जांच के लिए लैब प्रथम तल पर बनाई गई है, जबकि आमतौर पर लैब भू तल पर होनी चाहिए। अब प्रथम तल पर लैब होने के कारण तीमारदारों को गंभीर मरीजों को कंधे पर उठाकर लैब तक ले जाना पड़ता है, जहां उनका ब्लड टेस्ट होता है। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं को प्रथम तल तक जाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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डॉक्टरों को घर से व मरीजों को कैंटीन से लाना पड़ता है पीने का पानी: तीमारदार
अब तक स्वास्थ्य विभाग द्वारा अस्पताल में पीने के पानी की कोई व्यवस्था नही की गई है। जबकि ओपीडी शुरू हुए साढ़े 4 माह हो चुके हैं। हालत यह है कि मरीजों को पीने का पानी कैंटीन से खरीदना पड़ रहा है तथा डॉक्टर अपने लिए घर से पानी लेकर आते हैं। मरीजों का कहना है कि इतनी बड़ी बिल्डिंग में पीने के पानी की व्यवस्था न होने से उन्हें पुरानी बिल्डिंग में जाकर नही तो खरीदकर पानी पीना पड़ता है।
एसीएस के आने की सूचना पर दो वाटर कूलर मंगवाए थे:
पिछले दिनों स्वास्थ्य विभाग के एसीएस अमित झा के आने की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग ने आनन फानन में दो वाटर कूलर मंगवाए थे। मगर जैसे ही उनके ट्रांसफर के बारे में पता चला तो कूलरों को स्टोर में बंद कर दिया गया। अब मरीजों को पीने के पानी के लिए तरसना पड़ रहा है।
ओपीडी बिल्डिंग में डॉक्टरों के विरोध के बाद बने थे शौचालय:
बीएंडआर की आरके टैक विंग ने ओपीडी बिल्डिंग में भी डॉक्टरों के लिए शौचालयों का निर्माण नहीं किया था। सिविल सर्जन डॉ. संतलाल वर्मा ने डीसी की मीटिंग में सबसे पहले ये ही मुद्दा उठाया था। इसी मुद्दे पर तत्कालीन डीसी डॉ. चंद्रशेखर ने बीएंडआर को तत्काल डॉक्टरों के लिए शौचालय बनाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद डॉक्टरों के कैबिन में ही शौचालय बनाए गए।
800 मरीजों की भीड़ में घुट रहें मरीज: डॉक्टर
सिविल अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि बिल्डिंग में उनके लिए काम करना भी मुश्किल हो रहा है। बिल्डिंग का तापमान सामान्य से अधिक है। बिल्डिंग में पीने के पानी तक की सुविधा नहीं है। बिल्डिंग में एयर पासिंग ना होने से दमा के मरीजों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है। ऐसे में सिविल अस्पताल में उनकी हालत ठीक होने की बजाय बिगड़ती जा रही है।
शौचालय व वेंटिलेशन के लिए पत्र लिखा गया है: डॉ. मैहला
स्वास्थ्य अधिकारियों व डॉक्टरों के लिए नई बिल्डिंग में शौचालय को लेकर उनके पास कई शिकायतेें आई थी। उन्होंने इसके निरीक्षण के लिए डीसी को पत्र लिखा है। स्वास्थ्य अधिकारियों व डॉक्टरों के लिए अलग से शौचालय होने जरूरी है। डॉक्टरों के लिए पब्लिक टॉयलेट में जाना संभव नहीं है। बिल्डिंग में वेंटिलेशन के लिए भी लिखकर दिया गया है।
डॉ. सुखबीर मैहला, सिविल सर्जन पानीपत।
एयर पासिंग का समाधान करेंगे, अधिकारियों के लिए टॉयलेट भी बनवाएंगे: अत्री
उनको जैसा प्रपोजल मिला था। उन्होंने बिल्डिंग का निर्माण करवा दिया। अब एयर पासिंग की बात सामने आई है। इसका भी समाधान करवा रहे हैं। साथ ही अधिकारियों व डॉक्टरों के लिए टायलेट बनवा रहे हैं।
प्रदीप अत्री, एक्सईएन बीएंडआर
सुविधाओं के अभाव में दम तोड़ रही सिविल अस्पताल की नई इमारत
-स्वास्थ्य अधिकारियों व डॉक्टरों के लिए मेंशन नहीं किए शौचालय, अब डॉक्टर नाराज
-डॉक्टर बोले- क्रॉस वेंटिलेशन नहीं होने से बिगड़ रही मरीजों की हालत
- बिल्डिंग के अंदर का तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से भी अधिक
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