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100 रुपये प्रति किलोग्राम हुआ पैकेजिंग के रॉ मैटिरियल का रेट, पांच हजार करोड़ का कारोबार प्रभावित
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पानीपत। पिछले दो माह में पैकेजिंग कारोबार पर महंगाई की सबसे अधिक मार पड़ी है। पैकेजिंग का कच्चा माल 70 रुपये से बढ़कर 100 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है। इससे पॉलिस्टर के धागे और पॉलिथीन का रेट काफी बढ़ गया है। कच्चा माल महंगा हो गया है। ऐसे में पानीपत का पांच हजार करोड़ का पैकेजिंग कारोबार प्रभावित हो रहा है। तैयार माल के भाव कच्चे माल के मुकाबले बढ़ नहीं पा रहे। मांग में भी कमी चल रही है। अब उद्यमियों ने सरकार को जीएसटी की दरों में कमी करने का सुझाव दिया है।
औद्योगिक नगर पानीपत में 15 हजार करोड़ से अधिक का टेक्सटाइल निर्यात और 90 हजार करोड़ से अधिक का घरेलू उत्पादन होता है। करोड़ों के कारोबार के साथ पैकिंग उद्योग भी पनपता जा रहा है। यहां के टेक्सटाइल उद्योगों के लिए पहले दिल्ली से पैकिंग मैटीरियल मंगवाया जाता था। अब यहां का स्वयं का उद्योग पैकिंग का सामान उपलब्ध करवा रहा है। यहां पैकेजिंग के 60-70 उद्योग चल रहे हैं। यहां उद्योग लगने के बाद टेक्सटाइल उद्यमियों को पैकिंग का सामान अन्य प्रदेशों से मंगवाना नहीं पड़ता है। साथ ही यहां के लोगों को रोजगार मिला है।
18 प्रतिशत जीएसटी
पैकिंग उद्योगों में बनने वाले उत्पादन पर 18 प्रतिशत जीएसटी है। सरकार का राजस्व देने में भी यह उद्योग अग्रणी स्थान पर है। पैकिंग उद्योगों में दाना लगता है। क्रूड के दाम तेज होने से दाने के भाव भी लगातार बढ़ते जा रहे हैं। 35-40 फीसदी तक तेजी आ चुकी है। उद्यमियों का कहना है कि उद्योगों को बचाने के लिए सरकार को जीएसटी की दरें कम करनी चाहिए।
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रूस यक्रेन युद्ध से बढ़ी महंगाई
रूस यूक्रेन युद्ध के बाद क्रूड, गैस की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है। लगातार पेट्रोलियम पदार्थों के भाव बढ़ते जा रहे हैं। इस सबका असर पैकेजिंग उद्योग पर पड़ा है। पेट्रोलिंग पदार्थों के रेट बढ़ने से ट्रांसपोर्टेशन बहुत महंगा हो गया है।
कच्चे माल की कीमत बहुत अधिक बढ़ गई है
कच्चे माल के भाव लगातार बढ़ते जा रहे है। जबकि तैयार माल की मांग में कमी दर्ज की गई है। ऐसे में उद्यमियों की परेशानी बढ़ती जा रही है। उद्यमी उत्पादन कम करने पर मजबूर हैं। अब प्लास्टिक का रेट 100 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गया है। बिजली की व्यवस्था भी ठीक नहीं है। इसलिए काम करना मुश्किल हो रहा है।
- श्री भगवान अग्रवाल, प्रधान सेक्टर 29 इंडस्ट्रियल एस्टेट एसोसिएशन
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औद्योगिक नगर पानीपत में 15 हजार करोड़ से अधिक का टेक्सटाइल निर्यात और 90 हजार करोड़ से अधिक का घरेलू उत्पादन होता है। करोड़ों के कारोबार के साथ पैकिंग उद्योग भी पनपता जा रहा है। यहां के टेक्सटाइल उद्योगों के लिए पहले दिल्ली से पैकिंग मैटीरियल मंगवाया जाता था। अब यहां का स्वयं का उद्योग पैकिंग का सामान उपलब्ध करवा रहा है। यहां पैकेजिंग के 60-70 उद्योग चल रहे हैं। यहां उद्योग लगने के बाद टेक्सटाइल उद्यमियों को पैकिंग का सामान अन्य प्रदेशों से मंगवाना नहीं पड़ता है। साथ ही यहां के लोगों को रोजगार मिला है।
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18 प्रतिशत जीएसटी
पैकिंग उद्योगों में बनने वाले उत्पादन पर 18 प्रतिशत जीएसटी है। सरकार का राजस्व देने में भी यह उद्योग अग्रणी स्थान पर है। पैकिंग उद्योगों में दाना लगता है। क्रूड के दाम तेज होने से दाने के भाव भी लगातार बढ़ते जा रहे हैं। 35-40 फीसदी तक तेजी आ चुकी है। उद्यमियों का कहना है कि उद्योगों को बचाने के लिए सरकार को जीएसटी की दरें कम करनी चाहिए।
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रूस यूक्रेन युद्ध के बाद क्रूड, गैस की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है। लगातार पेट्रोलियम पदार्थों के भाव बढ़ते जा रहे हैं। इस सबका असर पैकेजिंग उद्योग पर पड़ा है। पेट्रोलिंग पदार्थों के रेट बढ़ने से ट्रांसपोर्टेशन बहुत महंगा हो गया है।
कच्चे माल की कीमत बहुत अधिक बढ़ गई है
कच्चे माल के भाव लगातार बढ़ते जा रहे है। जबकि तैयार माल की मांग में कमी दर्ज की गई है। ऐसे में उद्यमियों की परेशानी बढ़ती जा रही है। उद्यमी उत्पादन कम करने पर मजबूर हैं। अब प्लास्टिक का रेट 100 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गया है। बिजली की व्यवस्था भी ठीक नहीं है। इसलिए काम करना मुश्किल हो रहा है।
- श्री भगवान अग्रवाल, प्रधान सेक्टर 29 इंडस्ट्रियल एस्टेट एसोसिएशन