फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Panipat News ›   जिले की 70 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं में खून की कमी, इसलिए सर्जरी से बढ़ रही डिलीवरी

जिले की 70 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं में खून की कमी, इसलिए सर्जरी से बढ़ रही डिलीवरी

Sat, 13 Apr 2019 11:35 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 13 Apr 2019 11:35 PM IST
विज्ञापन
जिले की 70 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं में खून की कमी, इसलिए सर्जरी से बढ़ रही डिलीवरी
पानीपत। जिले के सरकारी निजी स्वास्थ्य केंद्रों में हर माह औसतन 2 हजार महिलाओं की डिलिवरी होती है। इनमें से 70 प्रतिशत डिलीवरी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में होती है। हर रोज सरकारी निजी स्वास्थ्य केंद्रों में लगभग 800 महिलाएं जांच के लिए जाती हैं। डॉक्टरों के अनुसार जिले की 70 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं में खून की कमी है इसलिए सर्जरी से डिलीवरी बढ़ रही है। सिविल अस्पताल में हर रोज औसतन 30-35 डिलिवरी होती है। इनमें से औसतन 4-6 डिलीवरी सर्जरी से होती है। ये रिपोर्ट हर माह सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में लगने वाले मातृत्व सुरक्षा अभियान के तहत होने वाले चैकअप से विभाग के पास आई है। डॉक्टरों के अनुसार इसका सबसे बड़ा कारण गर्भावस्था के दौरान फल सब्जी खाने की बजाय मुल्तानी मिट्टी, मिट्टी, कोयला राख का सेवन है। डॉक्टरों के अनुसार इन महिलाओं में आयरन कैल्शियम की कमी होती है। जिस कारण उनका यह अजीबो गरीब चीजें खाने का मन करता है। इसी के कारण गर्भवती के पेट में कीड़े होना आम बात हो जाती है। शरीर में पूर्ण मात्रा में खून नहीं बन पाता। इस सबसे दुष्प्रभाव बच्चे की ग्रोथ पर पड़ता है। खून की कमी के कारण डिलीवरी के दौरान 1 हजार में से 11 महिलाओं की मौत हो जाती है।
विज्ञापन

महिलाओं में औसतन मिलता है 6 से 8 ग्राम ही खून, 12 ग्राम होना चाहिए
जिले की लगभग 70 प्रतिशत महिलाओं में खून की मात्रा काफी कम मिलती है। गर्भवती महिलाओं में औसतन 12 ग्राम खून होना चाहिए। मगर जांच के दौरान महिलाओं में 6 से 8 ग्राम खून ही मिल रहा है। यही सर्जरी से डिलीवरी होने का भी सबसे बड़ा कारण बन रहा है। खून की कमी के कारण गर्भ में बच्चे का सही प्रकार से विकास नहीं हो पाता।
विज्ञापन

गर्भ में पल से बच्चे के स्वास्थ्य के लिए सबसे अहम जच्चा का स्वस्थ रहना है: कौर
गर्भ में पल से बच्चे के स्वास्थ्य के लिए सबसे अहम जच्चा का स्वस्थ रहना है। महिलाओं गर्भावस्था में खाने पीने में काफी लापरवाही बरतती हैं। खाने में फल सब्जियां लेने की बजाय मुल्तानी मिट्टी, चूल्हे की मिट्टी कोयले जैसी चीजें खाकर खुद को नुकसान पहुंचा रही हैं। शरीर में खून कम होने के कारण बच्चे कमजोर पैदा होते हैं। यह गैर खाद्य वस्तुएं हैं इसलिए यह विटामिन मिनरल को बनने से रोकती हैं। स्वास्थ्य विभाग किलकारी ऐप से भी महिलाओं को उनके स्वास्थ्य के प्रति जागरूक कर रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

-डॉ.सुखदीप कौर, महिला रोग विशेषज्ञ सिविल अस्पताल
स्वास्थ्य विभाग देता है गर्भवती महिलाओं को 360 गोलियां : डिप्टी सिविल सर्जन
स्वास्थ्य विभाग गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की तरफ काफी ध्यान देता है। गर्भवती महिलाओं के लिए सरकार सीएचसी पीएचसी स्तर पर कैंप लगाती है। बच्चे के शरीर के पूरे अंग बनने के लिए फोलिक एसिड दवा दी जाती है। तीन माह के बाद इन्हें कैल्शियम आयरन की गोलियां दी जाती हैं। डिलीवरी होने तक प्रत्येक महिला के लिए स्वास्थ्य केंद्र पर 360 गोलियां पहुंचती हैं। इतनी ही गोलियां उनकी डिलीवरी के बाद उन्हें दी जाती हैं। मगर जागरूकता की कमी लापरवाही के कारण अब भी 70 प्रतिशत महिलाओं में खून की कमी है। विभाग अपनी तरफ से हर संभव प्रयास कर रहा है।
-डॉ.निशि जिंदल, डिप्टी सिविल सर्जन पानीपत
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed