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हाउस की मीटिंग में 121.17 करोड़ का बजट 30 मिनट में पास, पौना घंटा जेबीएम कंपनी पर कार्रवाई की मांग करते रहे मेयर व पार्षद
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शहर की नई सरकार का पहला बजट, हाउस की मीटिंग में 121.17 करोड़ का बजट 30 मिनट में पास
पानीपत। नगर निगम प्रशासन ने 2019-20 का बजट पेश किया। शहर की नई सरकार का यह पहला बजट था। 25 पार्षदों की मौजूदगी में निगम हाउस की सवा घंटे चली बैठक में 121.17 करोड़ का बजट पास किया। बजट को सर्वसहमति से मात्र 30 मिनट में पास कर दिया। पौना घंटा तक सदन में शहर में सफाई का मुद्दा छाया रहा। मेयर अवनीत कौर ने कमिश्नर वीना हुड्डा से शहर की सफाई व्यवस्था का सुधारने का आह्वान किया। उन्होंने जेबीएम कंपनी पर कड़ी कार्रवाई की मांग की और सदन में सर्वसहमति से तीन प्रस्ताव भी पास कराए। जिसमें शहर में साइन बोर्ड लगवाना, सड़क बनवाने वाले ठेकेदार से सड़क की तीन साल की गारंटी लेना, साइन बोर्ड पर विकास कार्यों का ब्यौरा, ठेकेदार का फोन नंबर साइन बोर्ड पर होना व सभी वार्डों में एक सूचना बोर्ड लगवाना, जिस पर समस्याओं से संबधित अधिकारियों का नाम होगा। इन पर सहमति बनी।
इस साल के बजट में हाउस टेक्स के लिए 33 करोड़, अग्निशमन के लिए 10 करोड़, स्टांप ड्यूटी के लिए 24 करोड़ रुपये, एक्साइज ड्यूटी के लिए 10 करोड़, डेवलेपमेंट चार्ज 15 करोड़, रेंट के लिए 1 करोड़ 50 लाख इस बार कोई वाटर चार्ज नहीं रखा गया है। इस वर्ष बजट में 10 करोड़ की कटौती की गई है। इस बार 131 करोड़ में से 74 करोड़ की ही रिकवरी हो पाई है। नगर निगम ने खर्च को लगभग गत वर्ष जितना 115 करोड़ का रखा है। इसमें 25 प्रतिशत विकास कार्यों पर खर्च किया जाएगा।
मेयर अवनीत कौर ने मीटिंग में उठाए मुद्दे:
- जेबीएम कंपनी को एग्रीमेंट के अनुसार 6 माह में 50 प्रतिशत तक डोर टू डोर, 9 माह में 75 प्रतिशत व एक साल में 100 प्रतिशत तक डोर टू डोर करना था मगर कंपनी एक साल में मात्र 25 प्रतिशत डोर टू डोर कर पाई।
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- शहर में जगह-जगह कूडे़े के ढेर लगे रहते हैं लेकिन कंपनी कार्य नहीं करती। जबकि दो दिन से अधिक समय तक कूड़ा पड़ने होने पर कंपनी पर पेनल्टी का प्रावधान है।
- अगर शहर में डोर टू डोर नहीं हो रहा तो इनको 5 रुपये प्रति घर के हिसाब से जुर्माना देना होगा।
- एक साल बाद भी कंपनी ने अपना प्लांट नहीं लगाया है।
- कंपनी निंबरी के डंपिग प्वाइंट मात्र 20 प्रतिशत ही कूड़ा डाल सकती है। इसके बाद कंपनी को वहां से कूड़ा उठाना होता है लेकिन कंपनी नहीं मान रही।
- कूड़ा उठाने वाली कंपनी की सभी गाड़ियों में जीपीएस सिस्टम होने चाहिए ताकि गाड़ियों को ट्रेसकिया जा सके लेकिन किसी भी गाड़ी में ये सिस्टम नहीं लगा है।
- डस्टबिन कूड़े के भरे रहते हैं, लेकिन कई कई दिन तक भी इनको बदला नहीं जाता।
- डेढ़ साल बाद भी कंपनी ने अपना शिकायत केंद्र नहीं खोला।
- कंपनी ने अब तक अपना हेल्प लाइन नंबर जारी नहीं किया।
- कंपनी का ऑफिस सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक खुला रहना चाहिए, तीन घंटे तक से अधिक समय पर ऑफिस बंद रहने पर कंपनी पर 2500 रुपये प्रति घंटा के हिसाब से जुर्माना लगना चाहिए।
- कंपनी को हर तीन माह में एक बार समाचार पत्रों में विज्ञापन देकर लोगों को सफाई के प्रति जागरूक करना होता है लेकिन इन्होंने कभी विज्ञापन नहीं दिया।
- लोगों की शिकायत दर्ज कर कंपनी को इसकी रसीद भी देनी होती है।
-अगर ट्राली में डाला गया कूड़ा नहीं ढका गया तो कंपनी को इस पर 250 रुपये प्रति ट्राली के हिसाब से जुर्माना लगेगा।
- प्रोजेक्ट मैनेजर को कंपनी के कार्य का निरीक्षण करना होता है।
- अगर कंपनी पर 14 लाख रुपये तक का जुर्माना हो चुका है तो कंपनी का एग्रीमेंट रद्द किया जा सकता है।
जेबीएम हमारे पानीपत को लूट रही : मेयर
मेयर अवनीत कौर ने मीटिंग में कमिश्नर वीणा हुड्डा के सामने कई बार जेबीएम कंपनी पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। मेयर कौर ने कहा कि जेबीएम कंपनी अपनी किसी भी शर्त पर खरी नहीं उतर रही है। कंपनी अब तक 25 प्रतिशत ही डोर टू डोर कर सकी है। कंपनी लोगों से पैसे वसूल रही है। हर माह कंपनी को सफाई के नाम पर 4 करोड़ रुपये दिए जाते हैं। जेबीएम कंपनी हमारे पानीपत को लूट रही है। इसलिए इन पर कार्रवाई की जाए। इस पर कमिश्नर ने मामले की जांच का आश्वासन दिया।
मीटिंग में ये उठे मुख्य मुद्दे:
पार्षद दुष्यंत भट्ट ने रजिस्ट्री कराने की प्रक्रिया को सरल करने का मुद्दा उठाया। इसके अलावा उन्होंने जेबीएम कंपनी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए।
- पार्षद संजीव दहिया ने प्रोपर्टी टैक्स ना देने वाली बड़ी फर्मों पर कार्रवाई की मांग की।
- पार्षद रवींद्र भाटिया ने नगर निगम का टोल फ्री जारी करने की मांग की।
- मीटिंग में कुत्तों की नसबंदी के टेंडर का भी मुद्दा उठा।
कमिश्नर बार बार दोहराती रही, प्लीज कोपरेट करो, मेरे पास पैसे नहीं है :
कमिश्नर वीना हुड्डा ने हाउस की मीटिंग शुरू करते ही कहा कि वो पार्षदों को विकास कार्यों के लिए फिलहाल 25-25 लाख रुपये ही दे सकती है। उनके पास पैसे नहीं है इसलिए सब उनके साथ तालमेल बनाकर रखे। बजट में वो ही वर्क ऑर्डर पास कराए जो 25 लाख में हो सके।
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पानीपत। नगर निगम प्रशासन ने 2019-20 का बजट पेश किया। शहर की नई सरकार का यह पहला बजट था। 25 पार्षदों की मौजूदगी में निगम हाउस की सवा घंटे चली बैठक में 121.17 करोड़ का बजट पास किया। बजट को सर्वसहमति से मात्र 30 मिनट में पास कर दिया। पौना घंटा तक सदन में शहर में सफाई का मुद्दा छाया रहा। मेयर अवनीत कौर ने कमिश्नर वीना हुड्डा से शहर की सफाई व्यवस्था का सुधारने का आह्वान किया। उन्होंने जेबीएम कंपनी पर कड़ी कार्रवाई की मांग की और सदन में सर्वसहमति से तीन प्रस्ताव भी पास कराए। जिसमें शहर में साइन बोर्ड लगवाना, सड़क बनवाने वाले ठेकेदार से सड़क की तीन साल की गारंटी लेना, साइन बोर्ड पर विकास कार्यों का ब्यौरा, ठेकेदार का फोन नंबर साइन बोर्ड पर होना व सभी वार्डों में एक सूचना बोर्ड लगवाना, जिस पर समस्याओं से संबधित अधिकारियों का नाम होगा। इन पर सहमति बनी।
इस साल के बजट में हाउस टेक्स के लिए 33 करोड़, अग्निशमन के लिए 10 करोड़, स्टांप ड्यूटी के लिए 24 करोड़ रुपये, एक्साइज ड्यूटी के लिए 10 करोड़, डेवलेपमेंट चार्ज 15 करोड़, रेंट के लिए 1 करोड़ 50 लाख इस बार कोई वाटर चार्ज नहीं रखा गया है। इस वर्ष बजट में 10 करोड़ की कटौती की गई है। इस बार 131 करोड़ में से 74 करोड़ की ही रिकवरी हो पाई है। नगर निगम ने खर्च को लगभग गत वर्ष जितना 115 करोड़ का रखा है। इसमें 25 प्रतिशत विकास कार्यों पर खर्च किया जाएगा।
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मेयर अवनीत कौर ने मीटिंग में उठाए मुद्दे:
- जेबीएम कंपनी को एग्रीमेंट के अनुसार 6 माह में 50 प्रतिशत तक डोर टू डोर, 9 माह में 75 प्रतिशत व एक साल में 100 प्रतिशत तक डोर टू डोर करना था मगर कंपनी एक साल में मात्र 25 प्रतिशत डोर टू डोर कर पाई।
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- शहर में जगह-जगह कूडे़े के ढेर लगे रहते हैं लेकिन कंपनी कार्य नहीं करती। जबकि दो दिन से अधिक समय तक कूड़ा पड़ने होने पर कंपनी पर पेनल्टी का प्रावधान है।
- अगर शहर में डोर टू डोर नहीं हो रहा तो इनको 5 रुपये प्रति घर के हिसाब से जुर्माना देना होगा।
- एक साल बाद भी कंपनी ने अपना प्लांट नहीं लगाया है।
- कंपनी निंबरी के डंपिग प्वाइंट मात्र 20 प्रतिशत ही कूड़ा डाल सकती है। इसके बाद कंपनी को वहां से कूड़ा उठाना होता है लेकिन कंपनी नहीं मान रही।
- कूड़ा उठाने वाली कंपनी की सभी गाड़ियों में जीपीएस सिस्टम होने चाहिए ताकि गाड़ियों को ट्रेसकिया जा सके लेकिन किसी भी गाड़ी में ये सिस्टम नहीं लगा है।
- डस्टबिन कूड़े के भरे रहते हैं, लेकिन कई कई दिन तक भी इनको बदला नहीं जाता।
- डेढ़ साल बाद भी कंपनी ने अपना शिकायत केंद्र नहीं खोला।
- कंपनी ने अब तक अपना हेल्प लाइन नंबर जारी नहीं किया।
- कंपनी का ऑफिस सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक खुला रहना चाहिए, तीन घंटे तक से अधिक समय पर ऑफिस बंद रहने पर कंपनी पर 2500 रुपये प्रति घंटा के हिसाब से जुर्माना लगना चाहिए।
- कंपनी को हर तीन माह में एक बार समाचार पत्रों में विज्ञापन देकर लोगों को सफाई के प्रति जागरूक करना होता है लेकिन इन्होंने कभी विज्ञापन नहीं दिया।
- लोगों की शिकायत दर्ज कर कंपनी को इसकी रसीद भी देनी होती है।
-अगर ट्राली में डाला गया कूड़ा नहीं ढका गया तो कंपनी को इस पर 250 रुपये प्रति ट्राली के हिसाब से जुर्माना लगेगा।
- प्रोजेक्ट मैनेजर को कंपनी के कार्य का निरीक्षण करना होता है।
- अगर कंपनी पर 14 लाख रुपये तक का जुर्माना हो चुका है तो कंपनी का एग्रीमेंट रद्द किया जा सकता है।
जेबीएम हमारे पानीपत को लूट रही : मेयर
मेयर अवनीत कौर ने मीटिंग में कमिश्नर वीणा हुड्डा के सामने कई बार जेबीएम कंपनी पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। मेयर कौर ने कहा कि जेबीएम कंपनी अपनी किसी भी शर्त पर खरी नहीं उतर रही है। कंपनी अब तक 25 प्रतिशत ही डोर टू डोर कर सकी है। कंपनी लोगों से पैसे वसूल रही है। हर माह कंपनी को सफाई के नाम पर 4 करोड़ रुपये दिए जाते हैं। जेबीएम कंपनी हमारे पानीपत को लूट रही है। इसलिए इन पर कार्रवाई की जाए। इस पर कमिश्नर ने मामले की जांच का आश्वासन दिया।
मीटिंग में ये उठे मुख्य मुद्दे:
पार्षद दुष्यंत भट्ट ने रजिस्ट्री कराने की प्रक्रिया को सरल करने का मुद्दा उठाया। इसके अलावा उन्होंने जेबीएम कंपनी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए।
- पार्षद संजीव दहिया ने प्रोपर्टी टैक्स ना देने वाली बड़ी फर्मों पर कार्रवाई की मांग की।
- पार्षद रवींद्र भाटिया ने नगर निगम का टोल फ्री जारी करने की मांग की।
- मीटिंग में कुत्तों की नसबंदी के टेंडर का भी मुद्दा उठा।
कमिश्नर बार बार दोहराती रही, प्लीज कोपरेट करो, मेरे पास पैसे नहीं है :
कमिश्नर वीना हुड्डा ने हाउस की मीटिंग शुरू करते ही कहा कि वो पार्षदों को विकास कार्यों के लिए फिलहाल 25-25 लाख रुपये ही दे सकती है। उनके पास पैसे नहीं है इसलिए सब उनके साथ तालमेल बनाकर रखे। बजट में वो ही वर्क ऑर्डर पास कराए जो 25 लाख में हो सके।