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दुकानदारों में अब से पहले मायूसी छाई
Updated Fri, 13 Oct 2017 12:20 AM IST
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पटाखों के लाइसेंस न मिलने पर व्यापारी परेशान
समालखा। पर्यावरण को दूषित होने से बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा 31 अक्तूबर तक लगाई गई दीपावली पर्व पर पटाखों की बिक्री पर रोक से इस व्यवसाय से जुड़े लोगो के चेहरे फीके पड़ गए हैं। उनका कहना है कि बिक्री पर रोक लगने से उन्हें लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ेगा। वहीं लोगों का कहना है कि बिना पटाखे के दीवाली का कोई मतलब नहीं है।
दिवाली पर्व पारंपरिक त्योहार है। इस दिन लोग दीपक व आतिशबाजी कर परंपरा का निर्वहन करते है। इस दिन लाखों रुपये की आतिशबाजी अर्धरात्रि तक चलती रहती है। लेकिन कोर्ट के निर्देश के बाद पटाखा व्यापार से जुड़े लोग चुप्पी साधे हुए है। उनका कहना है कि कोर्ट दीवाल तक बिक्री से रोक हटा ले तो वे आर्थिक नुकसान उठाने से बच जाएंगे। वहीं दूसरी तरफ आमजन की सोच है कि शराबबंदी की तरह ही पटाखाबंदी का हाल होगा। यहां पटाखे लाइसेंसी केवल उंगलियों पर गिने जा सकते है जबकि अनाधिकृत रूप से पटाखे बेचने वालों की संख्या सैकड़ों से भी अधिक है। काम धंधों में आई मंदी के घाटे पूरा करने के लिए वे कई अरमान लिए बैठे थे। मोटा मुनाफा कमाने के चक्कर में कइयों ने भारी स्टॉक किया हुआ है और भी आर्डर दे रखे है परंतु कोर्ट के आदेशानुसार वो कमाई जाने वाली राशि अब फिसलती नजर आ रही है।
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समालखा। पर्यावरण को दूषित होने से बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा 31 अक्तूबर तक लगाई गई दीपावली पर्व पर पटाखों की बिक्री पर रोक से इस व्यवसाय से जुड़े लोगो के चेहरे फीके पड़ गए हैं। उनका कहना है कि बिक्री पर रोक लगने से उन्हें लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ेगा। वहीं लोगों का कहना है कि बिना पटाखे के दीवाली का कोई मतलब नहीं है।
दिवाली पर्व पारंपरिक त्योहार है। इस दिन लोग दीपक व आतिशबाजी कर परंपरा का निर्वहन करते है। इस दिन लाखों रुपये की आतिशबाजी अर्धरात्रि तक चलती रहती है। लेकिन कोर्ट के निर्देश के बाद पटाखा व्यापार से जुड़े लोग चुप्पी साधे हुए है। उनका कहना है कि कोर्ट दीवाल तक बिक्री से रोक हटा ले तो वे आर्थिक नुकसान उठाने से बच जाएंगे। वहीं दूसरी तरफ आमजन की सोच है कि शराबबंदी की तरह ही पटाखाबंदी का हाल होगा। यहां पटाखे लाइसेंसी केवल उंगलियों पर गिने जा सकते है जबकि अनाधिकृत रूप से पटाखे बेचने वालों की संख्या सैकड़ों से भी अधिक है। काम धंधों में आई मंदी के घाटे पूरा करने के लिए वे कई अरमान लिए बैठे थे। मोटा मुनाफा कमाने के चक्कर में कइयों ने भारी स्टॉक किया हुआ है और भी आर्डर दे रखे है परंतु कोर्ट के आदेशानुसार वो कमाई जाने वाली राशि अब फिसलती नजर आ रही है।
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