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‘सरकार ने जातिगत आंकड़े पर हाईकोर्ट को किया गुमराह’
Updated Sun, 17 Dec 2017 12:09 AM IST
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‘सरकार ने जातिगत आंकड़े पर हाईकोर्ट को किया गुमराह’
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। सरकार की ओर से पिछड़ा वर्ग आयोग को दिए गए नौकरी में भागीदारी के आंकड़ों पर जाटों के तेवर तल्ख हो गए हैं। जाट आरक्षण को लेकर उन्होंने सरकार की नीयत में खोट करार दिया है और हाईकोर्ट को गुमराह करने का आरोप लगाया। कहा कि, सरकार ने प्रदेश का भाईचारा खराब करने की नीयत से आंकड़े तोड़ मरोड़ कर पेश किए हैं। इसको लेकर जबरजसत आर्थिक आधार आरक्षण संघर्ष समिति ने शनिवार को पानीपत में किसान भवन में बैठक कर सरकार के जवाब पर रोष प्रकट किया। समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष दलबीर जागलान ने कहा कि प्रदेश सरकार ने 14 दिसंबर को हाईकोर्ट में अपना जवाब पेश किया है। सरकार के आंकड़े व बयानबाजी प्रदेश का भाईचारा खराब करने वाले हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार ने होशियारी दिखाते हुए पेश आंकड़ों में अहीर व यादव को अलग-अलग दिखाया है। दोनों एक ही जाति हैं। खाती, जांगड़ा व धीमान को बीसी-ए में अलग दिखाया है, जबकि ये तीनों एक ही जाति में आते हैं। शकिया, सैनी व माली को भी अलग-अलग दिखाया है। कुम्हार, प्रजापत व कुर्मी एक हैं, लेकिन इनको भी अलग-अलग दिखाया है। छिम्पी व दर्जी एक ही जाति होने पर सरकार ने दोनों को अलग दिखाया है। सरकार द्वारा हाईकोर्ट में पेश किए आंकड़े हाईकोर्ट को ही गुमराह करने वाले हैं। सरकार को 2011 में जातिगत व आर्थिक आधारित जनगणना के आंकड़े हाईकोर्ट में देने चाहिए थे। इन आंकड़ों में प्रदेश के आरक्षण की सच्चाई सबके सामने आती। उन्होंने कहा कि सरकार ने अपनी रिपोर्ट में कुछ ही जातियों का आंकड़ा दिया है। प्रदेश में 12सौ लोग ऐसे भी हैं जिनकी कोई जाति नहीं है। सरकार इन लोगों के सरकारी नौकरी में होने के बाद भी इनकी जाति का पता नहीं लगा पाई है। जबरजसत सरकार की रिपोर्ट की निंदा करती है। इस मौके पर अमीर सिंह, अजीत सिंह देशवाल, जगदीश घनघस, ईश्वर खर्ब, दइयानंद, कर्ण सिंह, देवी सिंह, प्रताप माजरा, हवासिंह, कवल सिंह, जयसिंह व दलबीर मौजूद रहे।
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अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। सरकार की ओर से पिछड़ा वर्ग आयोग को दिए गए नौकरी में भागीदारी के आंकड़ों पर जाटों के तेवर तल्ख हो गए हैं। जाट आरक्षण को लेकर उन्होंने सरकार की नीयत में खोट करार दिया है और हाईकोर्ट को गुमराह करने का आरोप लगाया। कहा कि, सरकार ने प्रदेश का भाईचारा खराब करने की नीयत से आंकड़े तोड़ मरोड़ कर पेश किए हैं। इसको लेकर जबरजसत आर्थिक आधार आरक्षण संघर्ष समिति ने शनिवार को पानीपत में किसान भवन में बैठक कर सरकार के जवाब पर रोष प्रकट किया। समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष दलबीर जागलान ने कहा कि प्रदेश सरकार ने 14 दिसंबर को हाईकोर्ट में अपना जवाब पेश किया है। सरकार के आंकड़े व बयानबाजी प्रदेश का भाईचारा खराब करने वाले हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार ने होशियारी दिखाते हुए पेश आंकड़ों में अहीर व यादव को अलग-अलग दिखाया है। दोनों एक ही जाति हैं। खाती, जांगड़ा व धीमान को बीसी-ए में अलग दिखाया है, जबकि ये तीनों एक ही जाति में आते हैं। शकिया, सैनी व माली को भी अलग-अलग दिखाया है। कुम्हार, प्रजापत व कुर्मी एक हैं, लेकिन इनको भी अलग-अलग दिखाया है। छिम्पी व दर्जी एक ही जाति होने पर सरकार ने दोनों को अलग दिखाया है। सरकार द्वारा हाईकोर्ट में पेश किए आंकड़े हाईकोर्ट को ही गुमराह करने वाले हैं। सरकार को 2011 में जातिगत व आर्थिक आधारित जनगणना के आंकड़े हाईकोर्ट में देने चाहिए थे। इन आंकड़ों में प्रदेश के आरक्षण की सच्चाई सबके सामने आती। उन्होंने कहा कि सरकार ने अपनी रिपोर्ट में कुछ ही जातियों का आंकड़ा दिया है। प्रदेश में 12सौ लोग ऐसे भी हैं जिनकी कोई जाति नहीं है। सरकार इन लोगों के सरकारी नौकरी में होने के बाद भी इनकी जाति का पता नहीं लगा पाई है। जबरजसत सरकार की रिपोर्ट की निंदा करती है। इस मौके पर अमीर सिंह, अजीत सिंह देशवाल, जगदीश घनघस, ईश्वर खर्ब, दइयानंद, कर्ण सिंह, देवी सिंह, प्रताप माजरा, हवासिंह, कवल सिंह, जयसिंह व दलबीर मौजूद रहे।
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