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वह जिद्दी हमें ले आया युद्ध के मुहाने पर...
Updated Sun, 30 Jul 2017 11:56 PM IST
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वह जिद्दी हमें ले आया युद्ध के मुहाने पर, उसका महाशक्ति की गलतफहमी में डराने का अंदाज देखा
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। आर्य पीजी कॉलेज में रविवार को अंकन साहित्यिक मंच की काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता डॉ. कुंजल प्रतिष्ठा ने की। रमेश चंद्र पुहाल ने मुख्यातिथि और डॉ. दर्शन लाल आजाद ने विशिष्ट अतिथि के रूप में शिरकत की। मंच संचालन निर्मल आर्या ने किया।
मुख्यातिथि रमेश चंद्र पुहाल ने कहा कि उसकी आंखों को सितारों की जगह पर रख दो और फिर चांद कहीं और उठाकर रख दो, आज फिर होगा तेरे शहर से पुहाल का गुजर, आज फिर शहर के हर मोड़ पे पत्थर रख दो। विशिष्ट अतिथि डॉ. दर्शनलाल आजाद ने कहा कि मजहब सिखाते हैं आपस में वैर रखना, मजहब की दलदल में समझकर पैर रखना, मजहबी जाल से आदमी जब आजाद होगा, तभी सारा जहां खुश व शाद होगा। डॉ. एपी जैन ने कहा कि हमने चूंधे चीन का चरित्र चालबाज देखा, उसे महा झूठा, अकडू़, हड़पू व दगाबाज देखा। वह जिद्दी हमें ले आया है युद्ध के मुहाने पर, उसका महाशक्ति की गलतफहमी में डराने, धमकाने का अंदाज देखा। केसर कमल शर्मा ने कहा कि उस दिन से रह रहा हूं सड़कों पर दोस्तों, जब से मकान बच्चों के नाम कर दिया। कप्तान सिंह ने फरमाया कि जाकर उसे मेरा प्रणाम कह दे कोई, तड़पता हूं कैसे ये उसे बता दे कोई। मेरा दिल उड़ाकर जो रफूचक्कर हुई, लाकर उस माशूका का पता दे कोई। ओमदत्त आर्य ने कहा कि दुनिया में यदि बेइमान नहीं होते, तो दीवारों के भी कान नहीं होते। धर्मेंद्र अरोड़ा ने कहा कि मुसाफिर कहते हैं कि लहू में आदमी के जब बस ईमान होता है, वहीं पर राम है बसता, वहीं रहमान होता है। कार्तिक पूनिया ने कहा कि हर ख्वाब सच हो सकता है, कुछ कर गुजरने की सोच लो। हर कोई तुम्हारा सहारा बन जाएगा, बड़ा कदम जरा उठाकर देखा। मकर सिंह मकरोलिया ने कहा कि मेरे आंसुओं से लिखी किताब कौन पढ़ता है, मैं गरीब हूं, मेरे दर की सीढ़ियां कौन चढ़ता है। सुभाष मलिक ने कहा कि शरीफ की शराफत देखिए, परिवार को ले डूबा है। पाक के सर्वोच्च न्यायालय की इंसाफ भी एक अजूबा है।
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अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। आर्य पीजी कॉलेज में रविवार को अंकन साहित्यिक मंच की काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता डॉ. कुंजल प्रतिष्ठा ने की। रमेश चंद्र पुहाल ने मुख्यातिथि और डॉ. दर्शन लाल आजाद ने विशिष्ट अतिथि के रूप में शिरकत की। मंच संचालन निर्मल आर्या ने किया।
मुख्यातिथि रमेश चंद्र पुहाल ने कहा कि उसकी आंखों को सितारों की जगह पर रख दो और फिर चांद कहीं और उठाकर रख दो, आज फिर होगा तेरे शहर से पुहाल का गुजर, आज फिर शहर के हर मोड़ पे पत्थर रख दो। विशिष्ट अतिथि डॉ. दर्शनलाल आजाद ने कहा कि मजहब सिखाते हैं आपस में वैर रखना, मजहब की दलदल में समझकर पैर रखना, मजहबी जाल से आदमी जब आजाद होगा, तभी सारा जहां खुश व शाद होगा। डॉ. एपी जैन ने कहा कि हमने चूंधे चीन का चरित्र चालबाज देखा, उसे महा झूठा, अकडू़, हड़पू व दगाबाज देखा। वह जिद्दी हमें ले आया है युद्ध के मुहाने पर, उसका महाशक्ति की गलतफहमी में डराने, धमकाने का अंदाज देखा। केसर कमल शर्मा ने कहा कि उस दिन से रह रहा हूं सड़कों पर दोस्तों, जब से मकान बच्चों के नाम कर दिया। कप्तान सिंह ने फरमाया कि जाकर उसे मेरा प्रणाम कह दे कोई, तड़पता हूं कैसे ये उसे बता दे कोई। मेरा दिल उड़ाकर जो रफूचक्कर हुई, लाकर उस माशूका का पता दे कोई। ओमदत्त आर्य ने कहा कि दुनिया में यदि बेइमान नहीं होते, तो दीवारों के भी कान नहीं होते। धर्मेंद्र अरोड़ा ने कहा कि मुसाफिर कहते हैं कि लहू में आदमी के जब बस ईमान होता है, वहीं पर राम है बसता, वहीं रहमान होता है। कार्तिक पूनिया ने कहा कि हर ख्वाब सच हो सकता है, कुछ कर गुजरने की सोच लो। हर कोई तुम्हारा सहारा बन जाएगा, बड़ा कदम जरा उठाकर देखा। मकर सिंह मकरोलिया ने कहा कि मेरे आंसुओं से लिखी किताब कौन पढ़ता है, मैं गरीब हूं, मेरे दर की सीढ़ियां कौन चढ़ता है। सुभाष मलिक ने कहा कि शरीफ की शराफत देखिए, परिवार को ले डूबा है। पाक के सर्वोच्च न्यायालय की इंसाफ भी एक अजूबा है।
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