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हाली पार्क जीर्णोद्धार के नाम पर चढ़ा दी 20 पेड़ों की बलि
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हाली पार्क में चबूतरे से काटे गए पेड़।
- फोटो : Panipat
पानीपत। हाली पार्क के जीर्णोद्धार के नाम पर निगम ने 20 से भी ज्यादा हरे पेड़ों की बलि दे दी। निगम और हाली पार्क के ठेकेदारों ने इन पेड़ों को जड़ से कटवा दिया। पहले इन पेड़ों के चारों ओर चबूतरे बनाए गए लेकिन बाद में पेड़ों को ही हटा दिया गया। कुछ पेड़ पार्क की दीवार के साथ थे, जो निर्माण में बाधा नहीं थे लेकिन उन्हें भी कटवा दिया गया।
हैरानी की बात यह है कि अब निगम 30 लाख रुपये खर्च कर पेड़-पौधे लगाएगा। उधर, पेड़ों को काटने की जानकारी वन विभाग को नहीं है। दूसरी ओर निगम का कहना है कि पेड़ उनकी संपत्ति थे। जन आवाज सोसायटी के प्रधान जोगिंद्र स्वामी और भारतीय क्रांतिकारी सेना के अध्यक्ष दिलबाग सिंह देशवाल ने कहा कि पेड़ों को वेवजह कटवाना जीव हत्या सरीखा है। वे अपना विरोध दर्ज कराएंगे। उनका आरोप है कि निगम अधिकारियों ने कमीशन के चक्कर में पेड़ों का कटवाया है।
क्या कहता है नियम
जानकार बताते हैं कि नियमानुसार अगर पेड़ वन विभाग के संरक्षित एरिया में नहीं हैं तो भी इनको यूं ही नहीं कटवा सकते हैं। निगम को वन विभाग के पास पेड़ों की वैल्यू लगाने के लिए पत्राचार करना होता है। इसके बाद वन विभाग के अधिकारी इन पेड़ों की लंबाई-चौड़ाई माप कर इनकी वैल्यू निर्धारित करते हैं। इसके बाद इन पेड़ों की नीलामी की जाती है। ज्यादा बोली लगाकर जो इन पेड़ों को खरीदता है, वह ही इन्हेें काटकर ले जा सकता है। बताया जा रहा है कि इन पेड़ों की वैल्यू दस लाख रुपये से भी ज्यादा की थी।
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जानकारी नहीं, होगी जांच
इस प्रकरण की जानकारी नहीं है। इस बारे में रिकॉर्ड देखा जाएगा। इसके बाद पता चलेगा कि ये पेड़ वन विभाग के अधिकार क्षेत्र के थे या नहीं। बाकी दूसरी जानकारी भी रिकॉर्ड देखने के बाद ही पता चलेगी। - विजय लक्ष्मी, उप वन संरक्षक, पानीपत
निगम की संपत्ति, काट सकते हैं पेड़
हाली पार्क के पेड़ निगम की संपत्ति है इसलिए निगम इनको काट सकता है। इसके लिए वन विभाग की परमिशन की आवश्यकता नहीं है। - नवीन सहरावत, एक्सईएन, नगर निगम, पानीपत
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हैरानी की बात यह है कि अब निगम 30 लाख रुपये खर्च कर पेड़-पौधे लगाएगा। उधर, पेड़ों को काटने की जानकारी वन विभाग को नहीं है। दूसरी ओर निगम का कहना है कि पेड़ उनकी संपत्ति थे। जन आवाज सोसायटी के प्रधान जोगिंद्र स्वामी और भारतीय क्रांतिकारी सेना के अध्यक्ष दिलबाग सिंह देशवाल ने कहा कि पेड़ों को वेवजह कटवाना जीव हत्या सरीखा है। वे अपना विरोध दर्ज कराएंगे। उनका आरोप है कि निगम अधिकारियों ने कमीशन के चक्कर में पेड़ों का कटवाया है।
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क्या कहता है नियम
जानकार बताते हैं कि नियमानुसार अगर पेड़ वन विभाग के संरक्षित एरिया में नहीं हैं तो भी इनको यूं ही नहीं कटवा सकते हैं। निगम को वन विभाग के पास पेड़ों की वैल्यू लगाने के लिए पत्राचार करना होता है। इसके बाद वन विभाग के अधिकारी इन पेड़ों की लंबाई-चौड़ाई माप कर इनकी वैल्यू निर्धारित करते हैं। इसके बाद इन पेड़ों की नीलामी की जाती है। ज्यादा बोली लगाकर जो इन पेड़ों को खरीदता है, वह ही इन्हेें काटकर ले जा सकता है। बताया जा रहा है कि इन पेड़ों की वैल्यू दस लाख रुपये से भी ज्यादा की थी।
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जानकारी नहीं, होगी जांच
इस प्रकरण की जानकारी नहीं है। इस बारे में रिकॉर्ड देखा जाएगा। इसके बाद पता चलेगा कि ये पेड़ वन विभाग के अधिकार क्षेत्र के थे या नहीं। बाकी दूसरी जानकारी भी रिकॉर्ड देखने के बाद ही पता चलेगी। - विजय लक्ष्मी, उप वन संरक्षक, पानीपत
निगम की संपत्ति, काट सकते हैं पेड़
हाली पार्क के पेड़ निगम की संपत्ति है इसलिए निगम इनको काट सकता है। इसके लिए वन विभाग की परमिशन की आवश्यकता नहीं है। - नवीन सहरावत, एक्सईएन, नगर निगम, पानीपत

कुछ इस तरह से भी काटे गए हैं दो भागों वाले पेड़।- फोटो : Panipat