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पीएचडीयू व आईसीयू के लिए 20.53 लाख जारी, तीन माह में तैयार करने होंगे दोनों वार्ड
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पानीपत। सिविल अस्पताल में बनने वाली पीडियाट्रिक हाई डिपेंडेसी यूनिट और आईसीयू के लिए सरकार की ओर से 20.53 लाख का बजट पास हो गया है। इसके लिए पीडब्ल्यूडी ने टेंडर भी लगा दिए हैं। इसके लिए आवेदन करने वाली एजेंसी को तीन माह में इसका काम पूरा करना होगा।
दोनों वार्ड सिविल अस्पताल की तीसरी मंजिल पर स्थापित किए जाएंगे। नवंबर तक पीएचडीयू और आईसीयू का काम पूरा होगा। पीएचडीयू में 14 साल से कम आयु के बच्चों को रखा जाएगा। 12 बेड का आईसीयू बनाया जाएगा। आईसीयू बनने से बच्चों को काफी राहत मिलेगी। डॉक्टरों को इन्हें खानपुर या रोहतक पीजीआई रेफर नहीं करना पड़ेगा।
जनवरी 2021 में तैयार होनी थी पीएचडीयू
कोरोना का खतरा बच्चों पर मंडरा रहा था। जिले में पहली और दूसरी लहर में चार हजार से अधिक बच्चे कोरोना संक्रमित हुए। हालांकि 18 साल से कम आयु के किशोरों और बच्चों का रिकवरी रेट 100 प्रतिशत रहा। संक्रमण से गंभीर हालत में पहुंचे बच्चों का इलाज सिविल अस्पताल की पीएचडीयू में ही हो सके। इसके लिए जनवरी 2021 में ही इसे तैयार किया जाना था लेकिन बजट के अभाव में ये काम अधर में लटका हुआ था।
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एक दिन में खर्च करने पड़ते हैं आठ- दस हजार रुपये
निजी अस्पतालों में बनी पीडियाट्रिक हाई डिपेंडेसी यूनिट और आईसीयू की सेवाओं के लिए लोगों को एक दिन के आठ से 10 हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं। गरीब लोगों के लिए निजी अस्पतालों में बच्चों का इलाज कराना मुश्किल हो जाता है। सरकारी डॉक्टर बच्चों को रोहतक पीजीआई या खानपुर मेडिकल कॉलेज रेफर करते हैं। यहां पर प्रदेश भर से रोगी आते हैं। इसलिए समय पर वार्ड में वेंटिलेटर की सुविधा नहीं मिल पाती। इस लिहाज से ये जिले के लिए बड़ी सौगात है।
कोट-
फिलहाल पीएचडीयू और आईसीयू के लिए बजट जारी हो गया है। पीडब्ल्यूडी ने टेंडर लगा दिए हैं। तीन माह में पीएचडीयू और आईसीयू का काम पूरा करना है। सरकार का प्रयास है कि जल्द से जल्द ये सेवाएं शुरू की जाए। - डॉ. संजीव ग्रोवर, पीएमओ सिविल अस्पताल
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दोनों वार्ड सिविल अस्पताल की तीसरी मंजिल पर स्थापित किए जाएंगे। नवंबर तक पीएचडीयू और आईसीयू का काम पूरा होगा। पीएचडीयू में 14 साल से कम आयु के बच्चों को रखा जाएगा। 12 बेड का आईसीयू बनाया जाएगा। आईसीयू बनने से बच्चों को काफी राहत मिलेगी। डॉक्टरों को इन्हें खानपुर या रोहतक पीजीआई रेफर नहीं करना पड़ेगा।
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जनवरी 2021 में तैयार होनी थी पीएचडीयू
कोरोना का खतरा बच्चों पर मंडरा रहा था। जिले में पहली और दूसरी लहर में चार हजार से अधिक बच्चे कोरोना संक्रमित हुए। हालांकि 18 साल से कम आयु के किशोरों और बच्चों का रिकवरी रेट 100 प्रतिशत रहा। संक्रमण से गंभीर हालत में पहुंचे बच्चों का इलाज सिविल अस्पताल की पीएचडीयू में ही हो सके। इसके लिए जनवरी 2021 में ही इसे तैयार किया जाना था लेकिन बजट के अभाव में ये काम अधर में लटका हुआ था।
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एक दिन में खर्च करने पड़ते हैं आठ- दस हजार रुपये
निजी अस्पतालों में बनी पीडियाट्रिक हाई डिपेंडेसी यूनिट और आईसीयू की सेवाओं के लिए लोगों को एक दिन के आठ से 10 हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं। गरीब लोगों के लिए निजी अस्पतालों में बच्चों का इलाज कराना मुश्किल हो जाता है। सरकारी डॉक्टर बच्चों को रोहतक पीजीआई या खानपुर मेडिकल कॉलेज रेफर करते हैं। यहां पर प्रदेश भर से रोगी आते हैं। इसलिए समय पर वार्ड में वेंटिलेटर की सुविधा नहीं मिल पाती। इस लिहाज से ये जिले के लिए बड़ी सौगात है।
कोट-
फिलहाल पीएचडीयू और आईसीयू के लिए बजट जारी हो गया है। पीडब्ल्यूडी ने टेंडर लगा दिए हैं। तीन माह में पीएचडीयू और आईसीयू का काम पूरा करना है। सरकार का प्रयास है कि जल्द से जल्द ये सेवाएं शुरू की जाए। - डॉ. संजीव ग्रोवर, पीएमओ सिविल अस्पताल