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12 वार्डों के ट्यूबवेलों से रोज नालियों में बह जाता है 2.67 करोड़ लीटर पीने का पानी
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नगर निगम के 12 वार्डों के ट्यूूबवेलों से पानीपत में 2.67 करोड़ों लीटर पीने का पानी रोज नालियों में बह जाता है। इस लापरवाही पर एक पार्षद ने सरकार से पानी का ऑडिट कराने की मांग की है। वहीं शहर में वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के लिए 1000 करोड़ रुपये का बजट मांगा है।
एक ओर जहां पानी बचाने के लिए सरकार अभियान चला रही है वहीं पानीपत में अधिकतर वार्डों के ट्यूबवेलों पर ऑपरेटर नहीं हैं, इससे ये ट्यूबवेल समय पर शुरू और बंद नहीं किए जाते हैं। नतीजतन करोड़ों लीटर पीने का पानी शहर की नालियों में बह जाता है। इस लापरवाही के लिए लोग नगर निगम और जनस्वास्थ्य विभाग को जिम्मेदार मान रहे हैं।
क्या कहते हैं आंकड़े
शहरी विधानसभा में 17 वार्ड हैं, इनमें जनस्वास्थ्य विभाग के 243 और नगर निगम के 99 ट्यूबवेल लगे हैं। नगर निगम ने 36 ट्यूबवेल की और डिमांड की है। खास बात ये है कि इन 17 में से 12 वार्ड ऐसे हैं, जहां पानी लापरवाही से बह रहा है। जनस्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट अनुसार प्रतिदिन प्रतिव्यक्ति 135 की आवश्यकता होती है। शहर के इन वार्डों में 3.27 लाख की जनसंख्या के हिसाब से 4.75 करोड़ लीटर पानीपत प्रतिदिन की जरूरत है जबकि इन ट्यूबवेल से रोज 7.29 लीटर पानी निकाला जा रहा है। इस तरह रोज करीब 2.63 करोड़ लीटर बेकार जा रहा है।
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रोज आठ घंटे ट्यूबवेल चलने से व्यर्थ होता है पानी
विभाग की रिपोर्ट के अनुसार वार्डों में अलग-अलग क्षमता के ट्यूबवेल लगे हैं। इन्हें दिन में 8 घंटे या 480 मिनट चलाया जाता है। कई जगहों पर ऑपरेटर नहीं होने से ट्यूबवेल चलने का वक्त ज्यादा हो जाता है। इनमें कोई ऑटोमैटिक स्टॉप टाइमर नहीं। नतीजा पानी बहता रहता है।
- इन वार्डों में सबसे ज्यादा हो रहा व्यर्थ:
रिपोर्ट के अनुसार शहरी विधानसभा में आने वाले वार्ड नंबर 3, 4, 7, 8, 9, 10, 11, 18, 20, 21, 23 और 26 के एरिया में लगे ट्यूबवेलों से सबसे ज्यादा पानी को व्यर्थ बहाया जा रहा है।
वर्जन-
हजार करोड़ के प्रोजेक्ट और ऑडिट की मांग: भाटिया
सरकार से रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के लिए एक हजार करोड़ रुपये की डिमांड की है। इस रेनीवेल प्रोजेक्ट से बरसात के पानी को जमीन में पहुंचाया जाना है। सरकार से ऑडिट की मांग भी की है। इससे पानी की बचत के साथ लोग जागरूक होंगे।
- रविंद्र भाटिया, पार्षद, वार्ड नंबर 10
वर्जन-
जल बचाने का निकालेंगे विकल्प- एसई
जल ही जीवन है। इसको बचाने का निगम विकल्प तलाशेगा। अब जनस्वास्थ्य विभाग निगम के अधीन आ चुका है। अधिकारियों के साथ इस विषय पर बैठक कर जल्द ही पानी बचाने के लिए प्लानिंग की जाएगी।
रमेश कुमार, एसई, नगर निगम, पानीपत।
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एक ओर जहां पानी बचाने के लिए सरकार अभियान चला रही है वहीं पानीपत में अधिकतर वार्डों के ट्यूबवेलों पर ऑपरेटर नहीं हैं, इससे ये ट्यूबवेल समय पर शुरू और बंद नहीं किए जाते हैं। नतीजतन करोड़ों लीटर पीने का पानी शहर की नालियों में बह जाता है। इस लापरवाही के लिए लोग नगर निगम और जनस्वास्थ्य विभाग को जिम्मेदार मान रहे हैं।
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क्या कहते हैं आंकड़े
शहरी विधानसभा में 17 वार्ड हैं, इनमें जनस्वास्थ्य विभाग के 243 और नगर निगम के 99 ट्यूबवेल लगे हैं। नगर निगम ने 36 ट्यूबवेल की और डिमांड की है। खास बात ये है कि इन 17 में से 12 वार्ड ऐसे हैं, जहां पानी लापरवाही से बह रहा है। जनस्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट अनुसार प्रतिदिन प्रतिव्यक्ति 135 की आवश्यकता होती है। शहर के इन वार्डों में 3.27 लाख की जनसंख्या के हिसाब से 4.75 करोड़ लीटर पानीपत प्रतिदिन की जरूरत है जबकि इन ट्यूबवेल से रोज 7.29 लीटर पानी निकाला जा रहा है। इस तरह रोज करीब 2.63 करोड़ लीटर बेकार जा रहा है।
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रोज आठ घंटे ट्यूबवेल चलने से व्यर्थ होता है पानी
विभाग की रिपोर्ट के अनुसार वार्डों में अलग-अलग क्षमता के ट्यूबवेल लगे हैं। इन्हें दिन में 8 घंटे या 480 मिनट चलाया जाता है। कई जगहों पर ऑपरेटर नहीं होने से ट्यूबवेल चलने का वक्त ज्यादा हो जाता है। इनमें कोई ऑटोमैटिक स्टॉप टाइमर नहीं। नतीजा पानी बहता रहता है।
- इन वार्डों में सबसे ज्यादा हो रहा व्यर्थ:
रिपोर्ट के अनुसार शहरी विधानसभा में आने वाले वार्ड नंबर 3, 4, 7, 8, 9, 10, 11, 18, 20, 21, 23 और 26 के एरिया में लगे ट्यूबवेलों से सबसे ज्यादा पानी को व्यर्थ बहाया जा रहा है।
वर्जन-
हजार करोड़ के प्रोजेक्ट और ऑडिट की मांग: भाटिया
सरकार से रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के लिए एक हजार करोड़ रुपये की डिमांड की है। इस रेनीवेल प्रोजेक्ट से बरसात के पानी को जमीन में पहुंचाया जाना है। सरकार से ऑडिट की मांग भी की है। इससे पानी की बचत के साथ लोग जागरूक होंगे।
- रविंद्र भाटिया, पार्षद, वार्ड नंबर 10
वर्जन-
जल बचाने का निकालेंगे विकल्प- एसई
जल ही जीवन है। इसको बचाने का निगम विकल्प तलाशेगा। अब जनस्वास्थ्य विभाग निगम के अधीन आ चुका है। अधिकारियों के साथ इस विषय पर बैठक कर जल्द ही पानी बचाने के लिए प्लानिंग की जाएगी।
रमेश कुमार, एसई, नगर निगम, पानीपत।