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पार्कों की मरम्मत के लिए साढ़े 23 करोड़ के टेंडर निकालने वाले कमिश्नर प्रदीप डागर का तबादला, एक्सईएन रिलीव, टेंडर रद्द, सीएम फ्ल

Mon, 22 Oct 2018 11:29 PM IST
Updated Mon, 22 Oct 2018 11:29 PM IST
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पार्कों की मरम्मत के लिए साढ़े 23 करोड़ के टेंडर निकालने वाले कमिश्नर प्रदीप डागर का तबादला, एक्सईएन रिलीव, टेंडर रद्द, सीएम फ्ल
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पार्कों
पार्कों की मरम्मत में भ्रष्टाचार : निगमायुक्त का तबादला, एक्सईएन रिलीव, टेंडर रद्द
-पार्कों की मरम्मत के नाम पर भ्रष्टाचार उजागर होने पर सीएम मनोहर लाल ने गठित की जांच टीम
-करनाल के एक्सईएन, सोनीपत के एसई व पंचकूला के एमई के रूप में तीन सदस्यीय टीम का किया गया गठन
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। पार्कों की मरम्मत के नाम पर बड़ा भ्रष्टाचार करने की तैयारी कर रहे नगर निगम अधिकारी व जन प्रतिनिधियों के इरादे धरे के धरे रह गए। निगमायुक्त प्रदीप डागर और एक्सईएन ने ठेकेदारों के साथ मिलकर पार्कों की मरम्मत के लिए साढ़े 23 करोड़ के टेंडर निकाले थे। ये टेंडर शुरू से ही कठघरे में थे। निवर्तमान पार्षद इसका विरोध कर रहे थे। जिन पार्कों के टेंडर निकाले गए थे वे एकदम साफ सुथरे थे। इनमें 5 से 10 लाख रुपये से अधिक के विकास कार्य होने की गुंजाइश नहीं थी। जब ये मामला सीएम मनोहर लाल के पास पहुंचा तो उन्होंने इसकी जांच के लिए रोहतक के एक्सईएन मंजीत दहिया, सोनीपत के एसई व हेडऑफिस से गौरव आनंद के रूप में तीन सदस्यीय टीम का गठन कर दिया। कमिश्नर प्रदीप डागर का तबादला कर दिया गया। उन्हें किसी भी जिले का पदभार नहीं दिया गया है। मामले के एक और किरदार एक्सईएन प्रदीप लोहान को सोमवार को पानीपत से रिलीव कर दिया गया। सोमवार को सीएम की टीम ने शहर के पार्कों का जायजा लिया और वहां के लोगों से बातचीत की। साफ सुथरे पार्कों को देखकर व उनके करोड़ों के टेंडर देखकर सीएम टीम भी हैरान थी। सरकार ने ये टेंडर रद्द कर दिए हैं। ऐसे में नगर निगम अधिकारियों द्वारा इस साल लगाए गए 55 लाख के टेंडर रद्द हो चुके हैं।
एस्टीमेट की रिपोर्ट नहीं जमा कराई
नगर निगम अधिकारियों ने एक साल के विकास कार्यों के एस्टीमेट की रिपोर्ट सोमवार को भी तकनीकी सलाहकार विशाल सेठ को जमा नहीं करवाई है। जबकि नगर निगम को रिपोर्ट जमा कराने के लिए सोमवार तक का समय दिया गया था। लेकिन मामला काफी गंभीर होने के कारण कोई भी नगर निगम अधिकारी रिपोर्ट लेकर उनके पास नहीं गया। नगर निगम कमिश्नर प्रदीप डागर रविवार से ही चंडीगढ़ में है। एसई रमेश बागड़ी इस मामले में खुद को फंसाना नहीं चाहते। दो एक्सईएन का ट्रांसफर हो चुका है। उनकी जगह जो एक्सईएन आया है। उन्होंने अब तक ज्वाइन नहीं किया है। ऐसे में विकास कार्यों के इस्टीमेट को जमा ना कराने पर नगर निगम के अधिकारियों पर और भी गाज गिर सकती है। सोमवार को जांच करने पहुंची टीम को नगर निगम अधिकारी पार्कों का दौरा करवा रहे हैं।
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दुष्यंत भट्ट व लोकेश नागरू सीएम को बोले: आप पैसे दे रहो हो, वहां पता नहीं क्या हो रहा
शहर के पार्कों की मरम्मत के नाम पर निकाले गए साढ़े 23 करोड़ के टेंडरों से भाजपा नेता दुष्यंत भट्ट व लोकेश नागरू शुरू से ही खफा थे। इन दोनों नेताओं के क्षेत्र में पार्कों का टेंडर जरूरत से अधिक हुआ था। दुष्यंत भट्ट व लोकेश नागरू ने लिखित में इसकी शिकायत की थी। इन पर 15 दिन पहले चंडीगढ़ से तकनीकी सलाहकार विशाल सेठ पानीपत आए थे। उन्होंने सभी पार्कों की जांच की थी। प्राथमिक जांच में उनको भी पूरे मामले में गड़बड़ मिली थी। पार्कों में पुरानी ग्रिल व कच्ची ईंट लगाई जा रही थी। उन्होंने नगर निगम कमिश्नर से एक साल के इस्टीमेट की रिपोर्ट मांगी थी।
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पूरे गड़बड़झाले को ऐसे समझे
नगर निगम ने पिछले माह शहर के 19 पार्कों के साढ़े 23 करोड़ के टेंडर निकाले थे। इनमें अधिकतर वे पार्क थे, जिनमें पहले से ही विकास कार्य चल रहा था और वह पूरी तरह से दुरुस्त थे। जिन पार्कों में 5 से 10 लाख रुपये में विकास कार्य होने की गुुंजाइश थी। उनके 1-1 करोड़ के टेंडर निकाल दिए गए थे। सीएम मनोहर लाल ने 2015 में ये पैसे कूड़ा निस्तारण के लिए स्थान खरीदने के लिए दिए थे। तीन साल में ब्याज लगकर ये पैसे साढ़े 23 करोड़ हो गया था। अब कुछ जनप्रतिनिधियों, ठेकेदार व नगर निगम अधिकारियों ने मिलकर इन पार्कों की मरम्मत के लिए साढ़े 23 करोड़ के टेंडर निकाल दिए। निवर्तमान पार्षद दुष्यंत भट्ट, लोकेश नागरू ने इसकी विरोध किया और इसकी शिकायत सीएम को की थी।

तबादला नहीं बर्खास्त होना चाहिए
इस टेंडर मामले का गड़बड़झाला उठाने के लिए जन आवाज सोसाइटी के अध्यक्ष जोगिंद्र स्वामी ने भी अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने कई बार धरने प्रदर्शन किए और इसकी शिकायत डीसी को की थी। डीसी के माध्यम से सीएम को ज्ञापन सौंपा गया। जोगेंद्र स्वामी ने कहा कि नगर निगम अधिकारी जनता का पैसा लूट रहे हैं। उनका तबादला नहीं बल्कि उसको सीधे बर्खास्त कर देना चाहिए।

भ्रष्टाचार सहन नहीं होगा
कुछ लोग नगर निगम अधिकारियों से मिलकर बड़ा गड़बड़झाला करने की फिराक में थे। उनके क्षेत्र में हीरो पार्क आता है। उन्होंने इसमें विकास कार्य के लिए 20 लाख रुपये मांगे थे। उनके पार्क का एक करोड़ 18 लाख रुपये का टेंडर कर दिया गया। इतना पैसे पता नहीं कहां लगाने वाले थे ये लोग। ये अविश्वसनीय है। वो भ्रष्टाचार बिल्कुल सहन नहीं करेंगे। उन्होंने सीएम से मिलकर इसकी शिकायत की है। अब आरोपी नहीं बचेंगे।
-लोकेश नागरू, निवर्तमान पार्षद व भाजपा नेता

मुझे आज भी रिपोर्ट नहीं दी है, मुश्किलें और बढ़ेंगी : सेठ
नगर निगम अधिकारियों को विकास कार्यों के एस्टीमेट की रिपोर्ट सौंपने के लिए सोमवार तक का वक्त दिया था, लेकिन इन्होंने रिपोर्ट नहीं दी है। ऐसे में इन्हीं की मुश्किलें बढ़ेंगी। एस्टीमेट की रिपोर्ट को इन्हें सौंपनी पड़ेगी।

-विशाल सेठ, तकनीकी सलाहकार हरियाणा सरकार

लोगों से की गई है पूछताछ, चल रही जांच
सोमवार को शहर के पार्कों की जांच की गई है। लोगों से पूछताछ की गई है। पूरे मामले की गहन जांच की जा रही है। हर पहलू पर उनकी नजर है। जल्द इसकी रिपोर्ट सीएम को सौंप दी जाएगी।
-महिपाल, एसई, नगर निगम सोनीपत एवं जांच टीम प्रमुख
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