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24 जून योग तपस्या का दिन : बीके सरला
Updated Sat, 24 Jun 2017 09:27 PM IST
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स्मृति दिवस को समृद्धि दिवस के रूप में मनाया
फोटो -10 व 11
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की प्रथम प्रशासिका मातेश्वरी जगदंबा सरस्वती का 52वां स्मृति दिवस शनिवार को जिले के सभी केंद्रों और उप केंद्रों पर मनाया गया। इस दिन पूरे विश्व में ब्रह्माकुमारीज संस्था से जुड़े सभी ब्रह्मा वत्स अपने स्थानीय सेवा केंद्रों पर जाकर योग एवं तपस्या करते हैं।
पानीपत सर्किल इंचार्ज बीके सरला बहन ने बताया कि शनिवार को पानीपत के सभी सेवा केंद्रों और उप सेवा केंद्रों पर 24 जून का दिन मातेश्वरी के स्मृति दिवस के साथ ही समृद्धि दिवस के रूप में भी मनाया गया। ज्ञान मानसरोवर निदेशक बीके भारत भूषण भाई ने कहा कि सब बीके भाई-बहनों ने योग साधना से स्वयं को असीम रुहानी शक्ति से भरपूर किया। दोपहर तक सभी मौन साधना में रहे। सेक्टर-12 स्थित हुडा के ओम शांति भवन की संचालिका बीके सुनीता बहन ने बताया कि 24 जून 1965 को मातेश्वरी ने अपनी स्थूल देह का त्याग किया था। उन्होंने कहा कि मातेश्वरी जगदंबा सरस्वती कहती थीं कि हर घड़ी को अंतिम घड़ी समझ कर जीना चाहिए। इससे हम पाप से बचे रह सकते हैं। सुखदेव नगर शाखा संचालिका बीके कविता बहन ने कहा कि हमें कभी भी अपने किसी श्रेष्ठ कर्म का अभिमान नहीं करना चाहिए। साथ ही तहसील कैंप शाखा संचालिका बीके बिंदू ने भी मातेश्वरी के जीवन चरित्रों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मातेश्वरी अपकारी पर भी सदा उपकार कि भावना रखती थीं।
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अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की प्रथम प्रशासिका मातेश्वरी जगदंबा सरस्वती का 52वां स्मृति दिवस शनिवार को जिले के सभी केंद्रों और उप केंद्रों पर मनाया गया। इस दिन पूरे विश्व में ब्रह्माकुमारीज संस्था से जुड़े सभी ब्रह्मा वत्स अपने स्थानीय सेवा केंद्रों पर जाकर योग एवं तपस्या करते हैं।
पानीपत सर्किल इंचार्ज बीके सरला बहन ने बताया कि शनिवार को पानीपत के सभी सेवा केंद्रों और उप सेवा केंद्रों पर 24 जून का दिन मातेश्वरी के स्मृति दिवस के साथ ही समृद्धि दिवस के रूप में भी मनाया गया। ज्ञान मानसरोवर निदेशक बीके भारत भूषण भाई ने कहा कि सब बीके भाई-बहनों ने योग साधना से स्वयं को असीम रुहानी शक्ति से भरपूर किया। दोपहर तक सभी मौन साधना में रहे। सेक्टर-12 स्थित हुडा के ओम शांति भवन की संचालिका बीके सुनीता बहन ने बताया कि 24 जून 1965 को मातेश्वरी ने अपनी स्थूल देह का त्याग किया था। उन्होंने कहा कि मातेश्वरी जगदंबा सरस्वती कहती थीं कि हर घड़ी को अंतिम घड़ी समझ कर जीना चाहिए। इससे हम पाप से बचे रह सकते हैं। सुखदेव नगर शाखा संचालिका बीके कविता बहन ने कहा कि हमें कभी भी अपने किसी श्रेष्ठ कर्म का अभिमान नहीं करना चाहिए। साथ ही तहसील कैंप शाखा संचालिका बीके बिंदू ने भी मातेश्वरी के जीवन चरित्रों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मातेश्वरी अपकारी पर भी सदा उपकार कि भावना रखती थीं।
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