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40 डिग्री तापमान में 14 बच्चों को वैन में ठूस-ठूस कर भरा, सीडब्ल्यूसी लेगी एक्शन, जिला शिक्षा अधिकारी को लिखेंगे पत्र
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पानीपत। तपती धूप में वैन में बैठे बच्चों को पानी पिलाते हुए स्थानीय लोग।
- फोटो : Panipat
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पानीपत। 40 डिग्री तापमान के बीच 14 स्कूली बच्चों को सात सीटर स्कूल वैन में ठूंस-ठूंसकर बैठाया गया था। नियम को धता बताते हुए वैन पीली थी न उस पर नीले रंग की पट्टी थी। स्कूल का नाम, पता और फोन नंबर तक नहीं लिखा था। न ही प्राथमिक चिकित्सा का बॉक्स था और न ही बच्चों को संभालने के लिए अटेंडेंट। धूप में डेढ़ घंटे तक बच्चे भूखे-प्यासे खड़े रहे। उन्हें देख आसपास के लोगों का दिल पसीज गया। लोगों ने उन्हें पानी पिलाया। बच्चों के माता-पिता को सूचना दी, जिसके बाद परिजन बच्चों को घर ले गए।
मामले में प्रदेश सरकार की ओर से लागू स्कूल वाहन पॉलिसी की धज्जियां उड़ती दिखीं। इस तरफ न तो आरटीए विभाग ध्यान दे रहा है और न ही ट्रैफिक पुलिस। बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के सदस्य मुकेश आर्य और चाइल्ड हेल्पलाइन को-ऑर्डिनेटर पूजा मलिक सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचकर ड्राइवर और अभिभावकों के बयान दर्ज किए। उन्होंने बताया कि स्कूल की प्रधानाचार्य ने उन्हें स्कूल में चलकर बातचीत करने के लिए बुलाया। जब स्कूल पहुंचे तो अंदर आने की अनुमति मांगी गई। उन्होंने कहा कि स्कूल उनकी प्रॉपर्टी है।
जिला शिक्षा अधिकारी को लिखेंगे पत्र
कहा कि जाटल रोड स्थित स्कूल के बाहर कोई बोर्ड नहीं लगा मिला। स्कूल मान्यता प्राप्त है या नहीं, किस कक्षा तक की अनुमति है आदि बिंदुओं पर जांच के लिए बाल कल्याण समिति की तरफ से जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र लिखा जाएगा। बच्चों की सुरक्षा का मामला है, कोई लापरवाही नहीं चलेगी।
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- मुकेश आर्य, सीडब्ल्यूसी सदस्य।
स्कूल प्रबंधक पर होनी चाहिए कार्रवाई
स्कूल प्रबंधक और ड्राइवर दोनों पर कार्रवाई होनी चाहिए। स्कूल ट्रांसपोर्ट मजूबत न होने की वजह से काफी हादसे हो चुके है। इसमें परिवहन और शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी भी लापरवाही करते हैं।
- सुधा झा, मुख्य सलाहकार, बाल अधिकार सुरक्षा समिति
राष्ट्रीय बाल आयोग ने हर राज्य को भेजा है पत्र
राष्ट्रीय बाल आयोग की तरफ से दो मई को हर राज्य को पत्र भेजकर हर स्कूल में ऑडिट और वाहनों की गहनता से जांच करने के आदेश दिए गए हैं। हर जिले को 31 मई तक रिपोर्ट तैयार कर मुख्यालय भेजनी होगी। आयोग का मानना है कि वर्तमान समय में ट्रांसपोर्ट की वजह से काफी बच्चे हादसों का शिकार हो चुके है। इनमें स्कूल प्रबंधक की लापरवाही मिलती है।
स्कूल टांसपोर्ट पॉलिसी
1. स्कूल वाहन पर पीला रंग होना चाहिए।
2. स्कूल वाहन पर स्कूल वैन, बस, ऑटो लिखा होना चाहिए।
3. वाहन पर ऑन स्कूल ड्यूटी लिखा होना चाहिए।
4. आरटीओ से वाहन पासिंग का परमिट और अनुमति होनी चाहिए।
5. वाहन में ड्राइवर के अलावा अटेंटेंट होना चाहिए।
6. वाहन को 50 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक नहीं चला सकते।
7. वाहन के अंदर फर्स्ट ऐड बॉक्स होना चाहिए।
8. वाहन पर स्कूल का आपातकालीन नंबर, पुलिस टोल फ्री नंबर होना चाहिए।
9. वाहन चालक और कंडक्टर दोनों यूनिफार्म में होने चाहिए।
10. वाहन के अंदर सीसीटीवी कैमरे होने चाहिए।
राष्ट्रीय बाल आयोग की ओर से पत्र प्राप्त हुआ है। सभी स्कूलों को वाहन के मानक पूरे करने के लिए निर्देश दिए गए हैं। तीन दिन से अवकाश होने की वजह से जांच नहीं की जा सकी। मंगलवार से वाहनों की जांच के लिए प्रक्रिया शुरू की जाएगी। पॉलीवाल बचपन प्राइड स्कूल का मामला संज्ञान में आया है। मामले की जांच कर कार्रवाई होगी।
- बृजमोहन गोयल, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी
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मामले में प्रदेश सरकार की ओर से लागू स्कूल वाहन पॉलिसी की धज्जियां उड़ती दिखीं। इस तरफ न तो आरटीए विभाग ध्यान दे रहा है और न ही ट्रैफिक पुलिस। बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के सदस्य मुकेश आर्य और चाइल्ड हेल्पलाइन को-ऑर्डिनेटर पूजा मलिक सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचकर ड्राइवर और अभिभावकों के बयान दर्ज किए। उन्होंने बताया कि स्कूल की प्रधानाचार्य ने उन्हें स्कूल में चलकर बातचीत करने के लिए बुलाया। जब स्कूल पहुंचे तो अंदर आने की अनुमति मांगी गई। उन्होंने कहा कि स्कूल उनकी प्रॉपर्टी है।
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जिला शिक्षा अधिकारी को लिखेंगे पत्र
कहा कि जाटल रोड स्थित स्कूल के बाहर कोई बोर्ड नहीं लगा मिला। स्कूल मान्यता प्राप्त है या नहीं, किस कक्षा तक की अनुमति है आदि बिंदुओं पर जांच के लिए बाल कल्याण समिति की तरफ से जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र लिखा जाएगा। बच्चों की सुरक्षा का मामला है, कोई लापरवाही नहीं चलेगी।
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- मुकेश आर्य, सीडब्ल्यूसी सदस्य।
स्कूल प्रबंधक पर होनी चाहिए कार्रवाई
स्कूल प्रबंधक और ड्राइवर दोनों पर कार्रवाई होनी चाहिए। स्कूल ट्रांसपोर्ट मजूबत न होने की वजह से काफी हादसे हो चुके है। इसमें परिवहन और शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी भी लापरवाही करते हैं।
- सुधा झा, मुख्य सलाहकार, बाल अधिकार सुरक्षा समिति
राष्ट्रीय बाल आयोग ने हर राज्य को भेजा है पत्र
राष्ट्रीय बाल आयोग की तरफ से दो मई को हर राज्य को पत्र भेजकर हर स्कूल में ऑडिट और वाहनों की गहनता से जांच करने के आदेश दिए गए हैं। हर जिले को 31 मई तक रिपोर्ट तैयार कर मुख्यालय भेजनी होगी। आयोग का मानना है कि वर्तमान समय में ट्रांसपोर्ट की वजह से काफी बच्चे हादसों का शिकार हो चुके है। इनमें स्कूल प्रबंधक की लापरवाही मिलती है।
स्कूल टांसपोर्ट पॉलिसी
1. स्कूल वाहन पर पीला रंग होना चाहिए।
2. स्कूल वाहन पर स्कूल वैन, बस, ऑटो लिखा होना चाहिए।
3. वाहन पर ऑन स्कूल ड्यूटी लिखा होना चाहिए।
4. आरटीओ से वाहन पासिंग का परमिट और अनुमति होनी चाहिए।
5. वाहन में ड्राइवर के अलावा अटेंटेंट होना चाहिए।
6. वाहन को 50 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक नहीं चला सकते।
7. वाहन के अंदर फर्स्ट ऐड बॉक्स होना चाहिए।
8. वाहन पर स्कूल का आपातकालीन नंबर, पुलिस टोल फ्री नंबर होना चाहिए।
9. वाहन चालक और कंडक्टर दोनों यूनिफार्म में होने चाहिए।
10. वाहन के अंदर सीसीटीवी कैमरे होने चाहिए।
राष्ट्रीय बाल आयोग की ओर से पत्र प्राप्त हुआ है। सभी स्कूलों को वाहन के मानक पूरे करने के लिए निर्देश दिए गए हैं। तीन दिन से अवकाश होने की वजह से जांच नहीं की जा सकी। मंगलवार से वाहनों की जांच के लिए प्रक्रिया शुरू की जाएगी। पॉलीवाल बचपन प्राइड स्कूल का मामला संज्ञान में आया है। मामले की जांच कर कार्रवाई होगी।
- बृजमोहन गोयल, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी