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Panipat News: 10 साल में 132 अवैध ब्लीच हाउस सील, जुर्माना केवल तीन पर

Sun, 21 Jun 2026 03:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत Updated Sun, 21 Jun 2026 03:27 AM IST
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132 illegal bleach houses sealed in 10 years, only three fined
पानीपत। औद्योगिक नगरी में पर्यावरण नियमों की अनदेखी से चल रहे अवैध ब्लीच हाउसों के खिलाफ प्रशासनिक दावों और कार्रवाई की जमीनी हकीकत सामने आ गई है। पर्यावरण कार्यकर्ता वरुण गुलाटी के सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगी गई जानकारी में ये खुलासा हुआ है। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार बीते 10 वर्षों (2016 से 2026) के दौरान जिले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और स्थानीय प्रशासन ने 132 अवैध ब्लीच हाउस को सील किया। इतने कड़े पर्यावरण कानूनों के बावजूद इनमें से केवल तीन इकाइयों पर ही पर्यावरणीय जुर्माना लगाया जा सका। बाकी 129 पर किसी भी प्रकार की दंडात्मक या आर्थिक कार्रवाई नहीं की। लापरवाही या अनदेखी यहीं नहीं थमी। जिन तीन फैक्ट्रियों पर जुर्माना लगाया गया था, उनसे इस राशि की वसूली का कोई स्पष्ट ब्योरा अधिकारियों के पास नहीं है।
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पिछले वर्ष 29 अगस्त 2025 को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की प्रिंसिपल बेंच ने पानीपत के 32 अवैध ब्लीच हाउसों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के आदेश जारी किए थे। एनजीटी ने हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) को साफ निर्देश दिया था कि तीन महीने के भीतर सभी 32 प्रदूषणकारी इकाइयों द्वारा पूर्व में किए गए पर्यावरणीय नुकसान का आकलन कर हर्जाना (ईसी) निर्धारित कर उसकी वसूली की जाए। एचएसपीबी की आरटीआई में मिली सूचना में एनजीटी की तीन महीने की तय समय-सीमा बीतने के बाद भी अधिकारियों के स्तर पर प्रगति शून्य रही है। इन 32 औद्योगिक इकाइयों पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाने या वसूली शुरू करने की कोई प्रभावी कार्रवाई रिकॉर्ड में नहीं दिखाई है। इसी तरह 10 साल में कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी थी। इसमें 132 अवैध ब्लीच हाउस सील करने की बात कही थी। इनमें से तीन पर जुर्माना लगाया गया है। आरटीआई की रिपोर्ट में बताया अधिकारियों ने वर्ष 2018 में केवल एक अवैध ब्लीच हाउस और वर्ष 2023 में दो अन्य इकाइयों पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाई थी। इसके अलावा नियमों का उल्लंघन करने वाले लोगों को बिना किसी वित्तीय हर्जाने या कानूनी कार्रवाई के छोड़ दिया गया।
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उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच और अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की
पर्यावरण कार्यकर्ता वरुण गुलाटी ने बताया कि अवैध ब्लीचिंग और डाइंग इकाइयों से निकलने वाले जहरीले रसायनों ने वर्षों तक पानीपत की कृषि भूमि और भूजल को बुरी तरह प्रदूषित किया है। अधिकारियों द्वारा प्रभावी दंडात्मक कार्रवाई न किए जाने से कानून के पालन पर बड़ा प्रश्नचिह्न लग गया है। उन्होंने मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच कराई जाए और कोर्ट के आदेशों को ठंडे बस्ते में डालने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
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ग्रामीण अंचल में चल रहे ब्लीच हाउस
कई गांवों में बड़े पैमाने पर अवैध ब्लीचिंग इकाई बिना किसी अनुमति के चल रहे हैं। नौल्था, डाहर, बिंझौल, बलाना, पालड़ी, कुराड़, डिडवाड़ी, मांडी, इसराना और नारा बड़े स्तर पर काम किया जा रहा है। यहां बिना किसी अपशिष्ट उपचार संयंत्र के चलाया जा रहा है। हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी भूपेंद्र सिंह चहल और बोर्ड के वकीलों ने ट्रिब्यूनल को अपनी स्टेटस रिपोर्ट सौंपी थी। रिपोर्ट में बताया था कि सभी 32 अवैध इकाइयों के खिलाफ क्लोजर ऑर्डर जारी करने के साथ सील कर दिया गया है। इसके अलावा, हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण की अनुमति के बिना अवैध रूप से भूजल निकालने के लिए उपयोग किए जा रहे इन इकाइयों के ट्यूबवेल और बोरवेल को भी पूरी तरह सील कर दिया है। ट्रिब्यूनल ने पर्यावरण को किए नुकसान की भरपाई कराने की बात कही थी बोर्ड ने अदालत को भरोसा दिलाया कि अगले तीन महीने के भीतर सभी 32 दोषी इकाइयों पर पर्यावरण मुआवजा (एनवायरनमेंट कंपनसेशन) निर्धारित कर वसूली की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। संवाद
वर्जन :
ब्लीच हाउस को सील कर दिया था। तीन पर जुर्माना लगाया है। बाकी पर जुर्माना लगाने के लिए प्रक्रिया चल रही है। इन पर जल्द ही जुर्माना लगाया जाएगा।
कुलदीप, एसडीओ, एचएसपीसीबी।
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