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बच्चे के इलाज में लापरवाही बरतने के मामले में डॉ. संजय सैन बरी
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पानीपत। सोनीपत के गांव थरया निवासी 6 वर्षीय फरहान के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने के आरोपों में घिरे सुनील मेमोरियल अस्पताल के डॉ. संजय सैन को जांच टीम ने क्लीन चिट दे दी है। इस मामले में डॉ. संजय की कोई गलती नहीं मिली। मामले की जांच डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. निशि जिंदल, एमएस डॉ. आलोक जैन, डॉ. दिनेश, डॉ. विश्वजीत व डॉ. दिनेश वशिष्ठ ने की थी। एक माह चली मामले की जांच के बाद डॉक्टरों ने बच्चे के इलाज की रिपोर्ट, बच्चे की स्थिति, आरोपी डॉक्टर व पीड़ित पक्ष के बयान के आधार पर डॉ. संजय को आरोप मुक्त किया है।
गांव थरया निवासी शमशीदा पत्नी तामिल ने असंध रोड स्थित सुनील ममोरियल अस्पताल के डॉ. संजय पर आरोप लगाते हुए सिविल सर्जन को शिकायत दी थी कि उसके बेटे फरहान के इलाज में डॉक्टर ने लापरवाही बरती है। पिछले साल अक्तूबर में बच्चे को तेज बुखार व चेहरे पर सूजन के बाद अस्पताल में दाखिल कराया था। 30 अक्तूबर तक बच्चा अस्पताल में भर्ती रहा। परिजनों का आरोप था कि इलाज के दौरान बच्चे के हाथ पैर काम करना बंद कर दिए। उनके चार लाख रुपये ले लिए गए। इसके बाद डॉक्टर बोले कि बच्चे को कहीं और ले जाओ। इसके बाद बच्चा अपनी याददाश्त भूल गया और पेशाब में भी बच्चे को दिक्कत हो गई। वहीं डॉ. संजय जांच में शामिल हुए और उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि जिस वक्त बच्चा अस्पताल में आया था उसकी प्लेटलेट्स मात्र 27 हजार थी। बच्चे की हालत बहुत गंभीर थी। परिजनों को ये भी बता दिया था कि बच्चे के बचने की संभावना भी कम है। धीरे-धीरे बच्चे की हालत में सुधार हो गया और उसके 30 अक्तूबर को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। पांच डॉक्टरों की टीम ने लगभग एक माह तक मामले की जांच की।
हमने मामले की गहन जांच की है। बच्चे के स्वास्थ्य की सभी रिकार्ड की जांच की है। बच्चा गंभीर रूप से बीमार था। दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए गए थे। पांच डॉक्टरों की टीम इस नतीजे पर पहुंची कि बच्चे के इलाज में डॉक्टर द्वारा कोई लापरवाही नहीं बरती गई।
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डॉ. निशि जिंदल, डिप्टी सिविल सर्जन, पानीपत।
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गांव थरया निवासी शमशीदा पत्नी तामिल ने असंध रोड स्थित सुनील ममोरियल अस्पताल के डॉ. संजय पर आरोप लगाते हुए सिविल सर्जन को शिकायत दी थी कि उसके बेटे फरहान के इलाज में डॉक्टर ने लापरवाही बरती है। पिछले साल अक्तूबर में बच्चे को तेज बुखार व चेहरे पर सूजन के बाद अस्पताल में दाखिल कराया था। 30 अक्तूबर तक बच्चा अस्पताल में भर्ती रहा। परिजनों का आरोप था कि इलाज के दौरान बच्चे के हाथ पैर काम करना बंद कर दिए। उनके चार लाख रुपये ले लिए गए। इसके बाद डॉक्टर बोले कि बच्चे को कहीं और ले जाओ। इसके बाद बच्चा अपनी याददाश्त भूल गया और पेशाब में भी बच्चे को दिक्कत हो गई। वहीं डॉ. संजय जांच में शामिल हुए और उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि जिस वक्त बच्चा अस्पताल में आया था उसकी प्लेटलेट्स मात्र 27 हजार थी। बच्चे की हालत बहुत गंभीर थी। परिजनों को ये भी बता दिया था कि बच्चे के बचने की संभावना भी कम है। धीरे-धीरे बच्चे की हालत में सुधार हो गया और उसके 30 अक्तूबर को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। पांच डॉक्टरों की टीम ने लगभग एक माह तक मामले की जांच की।
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हमने मामले की गहन जांच की है। बच्चे के स्वास्थ्य की सभी रिकार्ड की जांच की है। बच्चा गंभीर रूप से बीमार था। दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए गए थे। पांच डॉक्टरों की टीम इस नतीजे पर पहुंची कि बच्चे के इलाज में डॉक्टर द्वारा कोई लापरवाही नहीं बरती गई।
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डॉ. निशि जिंदल, डिप्टी सिविल सर्जन, पानीपत।