{"_id":"5c816360bdec2214130e52b0","slug":"131551983456-panipat-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सिविल अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग में तीन साल खुलेगा एनआरसी, कुपोषित बच्चों को मिलेगा इलाज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सिविल अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग में तीन साल खुलेगा एनआरसी, कुपोषित बच्चों को मिलेगा इलाज
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सिविल अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग में तीन साल खुलेगा एनआरसी, कुपोषित बच्चों को मिलेगा इलाज
पानीपत। कुपोषण के शिकार बच्चों के लिए सिविल अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग में एनआरसी (पोषण पुनर्वास केंद्र) डेवलप किया जा रहा है। इसमें एक डाइटीशियन, 3 स्टाफ नर्स, 1 रसोईया व 1 स्वीपर सहित 10 लोगों की टीम की नियुक्ति की जाएगी। कुपोषित बच्चों को सेंटर में 8-15 दिन तक इलाज व पौष्टिक भोजन मुहैया कराया जाएगा। इसमें 0-6 साल के बच्चे रखे जाएंगे। ये 10 बेड का होगा। इसके लिए डाइटीशियन डॉ. रिंपी की नियुक्ति भी एक माह पहले ही हुई है। मंगलवार को 10 बेड की डिमांड भेजी गई है। वहीं 8 व 9 फरवरी को स्टाफ की ट्रेनिंग भी दी जाएगी।
वर्ष 2015 में बंद हो गया था केंद्र
पानीपत में 2015 में पोषण पुनर्वास केंद्र खोला गया था। डॉक्टर और अन्य स्टाफ की कमी के चलते यह बंद हो गया था। अब सिविल अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग मदर एंड चाइल्ड केयर यूनिट के रूप में डेवलप होनी है। इसमें उन्नत एसएनसीयू, लेबर रूम, आपरेशन थियेटर, कंगारू मदर यूनिट के साथ एनआरसी भी खोला जाएगा।
प्ले रूम और दीवारों पर होगी पेंटिंग
टीम के सदस्य धर्मबीर ने बताया कि इसमें कुपोषित बच्चों के मनोरंजन के लिए प्ले रूम बनाया जा रहा है। इसमें करीब 10 तरह के खेल होंगे। बच्चों को आकर्षित करने के लिए दीवारों पर पेंटिग भी की जाएगी।
विज्ञापन
65 प्रतिशत महिलाओं में है खून की कमी :
पानीपत में स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 65 प्रतिशत महिलाओं में खून की कमी है। इनके हर माह 9 तारीख को सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में कैंप लगाए जाते हैं। महिलाओं को आयरन व फोलिक एसिड दी गोलियां दी जाती हैं। महिलाओं में खून की कमी के कारण भी बच्चे कुपोषण का शिकार हो रहे हैं।
माता-पिता को मिलेंगे 100 रुपए रोजाना
डॉ. रिंपी ने बताया कि एनआरसी में बच्चे के साथ जो भी व्यक्ति रहेगा, उसे खर्च के रूप में रोजाना 100 रुपए भी दिए जाएंगे। सरकार ने इसे वेज कंपनसेशन स्कीम का नाम दिया है। बता दें कि एक साल से 14 साल के करीब 10 प्रतिशत बच्चे कुपोषण की श्रेणी में आते हैं। इलाज के साथ पौष्टिक खुराक मिलने से ये बच्चे शारीरिक व मानसिक रूप से मजबूत बन सकेंगे।
ऐसे होगी देखभाल
डॉ. रिंपी ने बताया कि कुपोषित बच्चों के साथ देखभाल के लिए उनके माता-पिता में से कोई एक साथ रह सकेगा। डाइटीशियन बच्चों को पौष्टिक खुराक बताएंगे। कुक उस डाइट को तैयार करेंगे। तीमारदार अपने बच्चे को भोजन कराने समेत उसकी साफ-सफाई का ध्यान रखेगा। शिशु रोग विशेषज्ञ बच्चों की नियमित जांच करेंगे। कुपोषण श्रेणी से बाहर होने पर बच्चा घर भेजा जाएगा।
विज्ञापन
पानीपत। कुपोषण के शिकार बच्चों के लिए सिविल अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग में एनआरसी (पोषण पुनर्वास केंद्र) डेवलप किया जा रहा है। इसमें एक डाइटीशियन, 3 स्टाफ नर्स, 1 रसोईया व 1 स्वीपर सहित 10 लोगों की टीम की नियुक्ति की जाएगी। कुपोषित बच्चों को सेंटर में 8-15 दिन तक इलाज व पौष्टिक भोजन मुहैया कराया जाएगा। इसमें 0-6 साल के बच्चे रखे जाएंगे। ये 10 बेड का होगा। इसके लिए डाइटीशियन डॉ. रिंपी की नियुक्ति भी एक माह पहले ही हुई है। मंगलवार को 10 बेड की डिमांड भेजी गई है। वहीं 8 व 9 फरवरी को स्टाफ की ट्रेनिंग भी दी जाएगी।
वर्ष 2015 में बंद हो गया था केंद्र
पानीपत में 2015 में पोषण पुनर्वास केंद्र खोला गया था। डॉक्टर और अन्य स्टाफ की कमी के चलते यह बंद हो गया था। अब सिविल अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग मदर एंड चाइल्ड केयर यूनिट के रूप में डेवलप होनी है। इसमें उन्नत एसएनसीयू, लेबर रूम, आपरेशन थियेटर, कंगारू मदर यूनिट के साथ एनआरसी भी खोला जाएगा।
विज्ञापन
प्ले रूम और दीवारों पर होगी पेंटिंग
टीम के सदस्य धर्मबीर ने बताया कि इसमें कुपोषित बच्चों के मनोरंजन के लिए प्ले रूम बनाया जा रहा है। इसमें करीब 10 तरह के खेल होंगे। बच्चों को आकर्षित करने के लिए दीवारों पर पेंटिग भी की जाएगी।
विज्ञापन
65 प्रतिशत महिलाओं में है खून की कमी :
पानीपत में स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 65 प्रतिशत महिलाओं में खून की कमी है। इनके हर माह 9 तारीख को सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में कैंप लगाए जाते हैं। महिलाओं को आयरन व फोलिक एसिड दी गोलियां दी जाती हैं। महिलाओं में खून की कमी के कारण भी बच्चे कुपोषण का शिकार हो रहे हैं।
माता-पिता को मिलेंगे 100 रुपए रोजाना
डॉ. रिंपी ने बताया कि एनआरसी में बच्चे के साथ जो भी व्यक्ति रहेगा, उसे खर्च के रूप में रोजाना 100 रुपए भी दिए जाएंगे। सरकार ने इसे वेज कंपनसेशन स्कीम का नाम दिया है। बता दें कि एक साल से 14 साल के करीब 10 प्रतिशत बच्चे कुपोषण की श्रेणी में आते हैं। इलाज के साथ पौष्टिक खुराक मिलने से ये बच्चे शारीरिक व मानसिक रूप से मजबूत बन सकेंगे।
ऐसे होगी देखभाल
डॉ. रिंपी ने बताया कि कुपोषित बच्चों के साथ देखभाल के लिए उनके माता-पिता में से कोई एक साथ रह सकेगा। डाइटीशियन बच्चों को पौष्टिक खुराक बताएंगे। कुक उस डाइट को तैयार करेंगे। तीमारदार अपने बच्चे को भोजन कराने समेत उसकी साफ-सफाई का ध्यान रखेगा। शिशु रोग विशेषज्ञ बच्चों की नियमित जांच करेंगे। कुपोषण श्रेणी से बाहर होने पर बच्चा घर भेजा जाएगा।