{"_id":"5a3c0c574f1c1bcf6d8b5769","slug":"131513884759-panipat-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"-जिले में आर्मी व प्रशासन की देखरेख में आपदा प्रबंधन पर मॉक ड्रील की गई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
-जिले में आर्मी व प्रशासन की देखरेख में आपदा प्रबंधन पर मॉक ड्रील की गई
Updated Fri, 22 Dec 2017 01:02 AM IST
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6.8 रिएक्टर पैमाने पर आया भूकंप, लघु सचिवालय समेत छह जगह फंसे लोग, डीसी ने मेज के नीचे घुसकर बचाई जान, एनएफएल व रिफाइनरी में गैस लीक
--मॉक ड्रील--
-जिले में मॉक ड्रील में 11 लोगों की मौत व 36 लोग घायल हुए
-2018 में भूकंप की आशंकाओं को देखते हुए की मॉक ड्रील
-लघु सचिवालय पानीपत व समालखा सहित सिविल अस्पताल, मित्तल मेगा मॉल, डीएवी पुलिस स्कूल, एनएफएल व रिफाइनरी में मॉक ड्रील
-मेगा मॉक ड्रील में कैप्टन रॉकी के नेतृत्व में तीन सैन्य अधिकारियों ने किया सहयोग
-मेगा मॉक ड्रील चल रहे स्थानों पर लगाए गए चिकित्सा कैंप
-स्वास्थ्य विभाग की तरफ से पांच एंबुलेंस मेगा मॉक ड्रील में हुई शामिल
--संभावित लीड--
फोटो-
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। जिले में 6.8 रिएक्टर पैमाने के भूकंप के दो झटकों से लघु सचिवालय पानीपत व समालखा, सिविल अस्पताल, मित्तल मेगा मॉल व डीएवी पुलिस पब्लिक स्कूल में दर्जनों लोग मलबे के नीचे दब गए और रिफाइनरी व एनएफएल में गैस का रिसाव हो गया। सिविल अस्पताल का पुराना भवन तक गिर गया। लघु सचिवालय में डीसी ने खुद अपनी कुर्सी छोड़कर टेबल के नीचे छिपकर अपनी जान बचाई। हादसों में 11 लोगों की मौत हो गई, जबकि 37 लोग घायल हो गए। अकेले एनएफएल में अमोनिया गैस रिसाव होने के चलते नौ लोगों की मौत हो गई। प्रशासन, पुलिस व सेना के दल ने सभी छह स्थानों पर सर्च अभियान चलाकर मलबे के नीचे दबे लोगों को बाहर निकाला।
यह वास्तव का भूकंप नहीं, बल्कि 2018 में भूकंप की बढ़ती आशंकाओं को देखते हुए मॉक ड्रील का हिस्सा रहा। मॉक ड्रील में जिले में छह स्थानों को चिंहित किया गया। सुबह दस बजे लघु सचिवालय पानीपत में हूटर बचते ही मॉक ड्रील शुरू हो गई। डीसी डॉ. चंद्रशेखर खरे व एसपी राहुल शर्मा अपनी मेज के नीचे छुप गए और कुछ समय के बाद बाहर निकले। सभी अधिकारी व कर्मचारी लघु सचिवालय से निकलकर अधिकारियों के आवास के नजदीक पार्क में बनाए गए स्टेजिंग एरिया में पहुंचे। लघु सचिवालय में आपात स्थिति में दो से तीन मिनट में सबको बाहर आने का समय था, लेकिन अधिकारियों व कर्मचारियों के अलावा फरियादियों को बाहर निकलने में सात से आठ मिनट लग गए। डीसी डॉ. चंद्रशेखर खरे व एसपी राहुल शर्मा ने स्टेजिंग एरिया में अधिकारियों से रिपोर्ट लेकर सभी छह स्थानों पर टीम को रवाना किया। इनमें से रिफाइनरी अधिकारियों ने गैस लीक को अपने स्तर पर कंट्रोल करने का भरोसा दिया। भूकंप के झटकों के बाद बिजली, मोबाइल व फोन बंद हो गए।
मॉक ड्रील में यहां की यह रही रिपोर्ट
लघु सचिवालय की बेसमेंट स्थित बैंक में रस्से से उतरा बचाव दल
भूकंप के झटकों से जिला मुख्यालय स्थित लघु सचिवालय हिल गया। अधिकारी व कर्मचारी सीढ़ियों से नीचे उतरे और फरियादियों को भी बाहर निकाला। सीटीएम संदीप अग्रवाल व डीएसपी सिटी राजेश लोहान बचाव दल के साथ मौके पर पहुंचे। सीटीएम संदीप अग्रवाल ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि लघु सचिवालय स्थित कार्यालयों व बेसमेंट स्थित एक बैंक में कुछ लोगों के फंसे होने की सूचना मिली। बचाव दल ने सबसे पहले विभिन्न कार्यालयोंमें सर्च अभियान चलाया। इसके बाद बेसमेंट स्थित बैंक में जाने का प्रयास किया, लेकिन रास्ता बंद होने के चलते अंदर नहीं जा सके। बचाव दल रस्से की मदद से अंदर दाखिल हुआ। लघु सचिवालय में 18 घायल मिले। इनमें से 12 को प्राथमिक उपचार देकर छुट्टी दे दी। जबकि छह लोगों को सिविल अस्पताल में इलाज के लिए भेजा गया। डीएसपी राजेश लोहान ने बताया कि बचाव कार्य व उसके बाद राहत कार्यों में सामाजिक व धार्मिक संगठनों का विशेष सहयोग रहा।
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सिविल अस्पताल का पुराना भवन गिरा, दो की मौत, पांच घायल
मॉक ड्रील के दौरान सिविल अस्पताल का पुराना भवन गिरने की सूचना मिली। एसडीएम पानीपत विवेक चौधरी व डीएसपी ट्रैफिक संदीप कुमार सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे। एसडीएम विवेक चौधरी अपनी रिपोर्ट में बताया कि सिविल अस्पताल में दो लोगों की मौत हो गई। जबकि पांच घायल हो गए। अस्पताल में बीम गिरने के चलते बचाव कार्य तीन दौर में चलाया गया। डीएसपी ट्रैफिक संदीप कुमार ने बताया कि अस्पताल में दो मृतकों में से एक की शिनाख्त कर ली गई, जबकि दूसरे की शिनाख्त के प्रयास किए जा रहे हैं।
समालखा लघु सचिवालय में 30 लोग फंसे
समालखा लघु सचिवालय में भूकंप आने पर लोगों के फंसने की सूचना मिली। एसडीएम समालखा गौरव कुमार व डीएसपी समालखा नरेश अहलावत बचाव दल के साथ मौके पर करीब 10:50 बजे पर पहुंचे। एसडीएम समालखा गौरव कुमार ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि समालखा लघु सचिवालय में 30 लोगों के अंदर फंसने की सूचना मिली थी। सबको बाहर निकाला। इनमें नौ लोग घायल मिले। तीन को सीएचसी में प्राथमिक उपचार के बाद सिविल अस्पताल पानीपत रेफर कर दिया। छह को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी। पांच का सीएचसी में ही इलाज किया गया। डीएसपी नरेश अहलावत ने बताया कि बचाव कार्य के दौरान अफवाहों के चलते कुछ दिक्कत आई। लोग बार-बार अफवाहों के चलते बीच में आ रहे थे।
मित्तल मेगा मॉल में 40 लोग फंसे
मॉक ड्रील के दौरान मित्तल मेगा मॉल को भी केंद्र बनाया गया। प्रशासन को यहां पर 40 लोगों के फंसे होने की सूचना मिली। एमडी शुगर मिल बीर सिंह व डीएसपी मुख्यालय जगदीप दून बचाव दल के साथ मौके पर पहुंचे। एमडी शुगर मिल ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि सुबह के वक्त मॉल की दुकान खुल रही थी, जबकि बेसमेंट स्थित एक जिम व फूड कोर्ट में 40 लोगों के फंसे होने की जानकारी मिली थी। इनमें से पांच घायलों में से चार को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया, जबकि एक को सिविल अस्पताल रेफर कर दिया। एमडी शुगर मिल ने बताया कि यहां पर साउंड सिस्टम व सायरन न होने की कमी पाई गई। डीएसपी जगदीप दून ने बताया कि इमरजेंसी के दौरान मॉल में पानी के पर्याप्त संसाधन नहीं मिले।
एनएफएल में अमोनिया गैस लीक होने से नौ की मौत
भूकंप के दौरान एनएफएल में अमोनिया गैस लीक होने की सूचना मिली। यहां पर नगर निगम आयुक्त शिव प्रसाद शर्मा और सीआईएसएफ के मेजर लुम्मी एस तुरंत मौके पर पहुंचे। निगम आयुक्त शिव प्रसाद शर्मा ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि उनको एनएफएल में 19 लोगों के फंसे होने की सूचना मिली थी। उन्होंने सबसे पहले बिजली सप्लाई को काटा और फिर बचाव कार्य शुरू किया। यहां पर पहले इन साइड व फिर आउट साइड इमरजेंसी घोषित की। तकनीकी टीम की मदद से तुरंत गैस रिसाव को बंद किया। एनएफएल में नौ लोगों की मौत हो गई और दो गंभीर है। यहां पर करीब 25 मिनट तक बचाव कार्य चला। उन्होंने बताया कि एनएफएल के दोनों तरफ रेलवे फाटक होने के चलते मौके पर पहुंचने में कुछ समय लगा। कई बार रेलवे फाटक बंद होने से लंबे समय तक फाटक बंद रह सकती है। ऐसे में किसी तरह की इमरजेंसी में रेलवे अधिकारियों से संपर्क कर ट्रेनों का जहां के तहां ठहराव कर एनएफएल में बचाव कार्य के लिए समय पर पहुंचा जा सकता है। मेजर लुम्मी एस ने मॉक ड्रील को आपातकाल के लिए जरूरी बताया।
डीएवी पुलिस पब्लिक स्कूल में फंसे 50 बच्चे
पुलिस लाइन स्थित डीएवी पुलिस पब्लिक स्कूल में भूकंप के चलते 50 बच्चे फंस गए। नगर निगम की संयुक्त आयुक्त सुमन भांखड़ व डीएसपी विद्यावती तुरंत मौके पर पहुंची। उन्होंने स्कूल प्रिंसिपल से पूरी स्थिति की जानकारी ली। उनको बताया कि स्कूल में 12सौ बच्चे हैं। इनमें से 50 बच्चे अंदर फंसे हुए हैं। संयुक्त आयुक्त सुमन भांखड़ ने बताया कि सभी बच्चों को बाहर निकाला। इनमें से छह बच्चों को गंभीर होने के चलते सिविल अस्पताल में इलाज के लिए भेज दिया।
आईओसीएल के नेफ्था क्रेकर में गैस लीक हुई
इंडियन ऑयल की पानीपत रिफाइनरी के नेफ्था क्रैकर प्लांट में एक गैस लीक होने की सूचना मिली। डीआरओ राजकुमार भौरिया ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि रिफाइनरी के ईडी ने उनको पूरी जानकारी दी और उन्होंने अपने स्तर पर गैस की लीकेज बंद करने और बचाव कार्य करने का भरोसा दिया। अधिकारियों ने प्लांट के अंदर फैली गैस को अपने स्तर पर कंट्रोल किया। रिफाइनरी में किसी तरह के नुकसान की सूचना नहीं मिली।
वर्जन
जिले में मॉक ड्रील में प्रशासनिक व पुलिस के अधिकारियों के साथ कर्मचारियों का विशेष योगदान रहा। इसके साथ ही धार्मिक व सामाजिक संगठनों ने भी आगे आकर अपना सहयोग दिया है। किसी तरह की इमरजेंसी आते ही नजदीकी पीसीआर, राइडर, थाना व पुलिस चौकी में इसकी सूचना दें। जिसके चलते बचाव कार्य समय पर शुरू हो सकें।
राहुल शर्मा, एसपी पानीपत।
वर्जन
आपातकाल के चलते मॉक ड्रील की गई थी। मॉक ड्रील के अनुसार शहर समेत जिले में छह स्थानों पर नुकसान होने की सूचना मिली थी। जिले में मॉक ड्रील पूरी तरह से सफल रहा। लघु सचिवालय से निकलने में कुछ ज्यादा समय लगा है। यह पहली मॉक ड्रील है। इसकी कमियों को अगली बार सुधार किया जाएगा।
डॉ. चंद्रशेखर खरे, डीसी, पानीपत।
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--मॉक ड्रील--
-जिले में मॉक ड्रील में 11 लोगों की मौत व 36 लोग घायल हुए
-2018 में भूकंप की आशंकाओं को देखते हुए की मॉक ड्रील
-लघु सचिवालय पानीपत व समालखा सहित सिविल अस्पताल, मित्तल मेगा मॉल, डीएवी पुलिस स्कूल, एनएफएल व रिफाइनरी में मॉक ड्रील
-मेगा मॉक ड्रील में कैप्टन रॉकी के नेतृत्व में तीन सैन्य अधिकारियों ने किया सहयोग
-मेगा मॉक ड्रील चल रहे स्थानों पर लगाए गए चिकित्सा कैंप
-स्वास्थ्य विभाग की तरफ से पांच एंबुलेंस मेगा मॉक ड्रील में हुई शामिल
--संभावित लीड--
फोटो-
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। जिले में 6.8 रिएक्टर पैमाने के भूकंप के दो झटकों से लघु सचिवालय पानीपत व समालखा, सिविल अस्पताल, मित्तल मेगा मॉल व डीएवी पुलिस पब्लिक स्कूल में दर्जनों लोग मलबे के नीचे दब गए और रिफाइनरी व एनएफएल में गैस का रिसाव हो गया। सिविल अस्पताल का पुराना भवन तक गिर गया। लघु सचिवालय में डीसी ने खुद अपनी कुर्सी छोड़कर टेबल के नीचे छिपकर अपनी जान बचाई। हादसों में 11 लोगों की मौत हो गई, जबकि 37 लोग घायल हो गए। अकेले एनएफएल में अमोनिया गैस रिसाव होने के चलते नौ लोगों की मौत हो गई। प्रशासन, पुलिस व सेना के दल ने सभी छह स्थानों पर सर्च अभियान चलाकर मलबे के नीचे दबे लोगों को बाहर निकाला।
यह वास्तव का भूकंप नहीं, बल्कि 2018 में भूकंप की बढ़ती आशंकाओं को देखते हुए मॉक ड्रील का हिस्सा रहा। मॉक ड्रील में जिले में छह स्थानों को चिंहित किया गया। सुबह दस बजे लघु सचिवालय पानीपत में हूटर बचते ही मॉक ड्रील शुरू हो गई। डीसी डॉ. चंद्रशेखर खरे व एसपी राहुल शर्मा अपनी मेज के नीचे छुप गए और कुछ समय के बाद बाहर निकले। सभी अधिकारी व कर्मचारी लघु सचिवालय से निकलकर अधिकारियों के आवास के नजदीक पार्क में बनाए गए स्टेजिंग एरिया में पहुंचे। लघु सचिवालय में आपात स्थिति में दो से तीन मिनट में सबको बाहर आने का समय था, लेकिन अधिकारियों व कर्मचारियों के अलावा फरियादियों को बाहर निकलने में सात से आठ मिनट लग गए। डीसी डॉ. चंद्रशेखर खरे व एसपी राहुल शर्मा ने स्टेजिंग एरिया में अधिकारियों से रिपोर्ट लेकर सभी छह स्थानों पर टीम को रवाना किया। इनमें से रिफाइनरी अधिकारियों ने गैस लीक को अपने स्तर पर कंट्रोल करने का भरोसा दिया। भूकंप के झटकों के बाद बिजली, मोबाइल व फोन बंद हो गए।
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मॉक ड्रील में यहां की यह रही रिपोर्ट
लघु सचिवालय की बेसमेंट स्थित बैंक में रस्से से उतरा बचाव दल
भूकंप के झटकों से जिला मुख्यालय स्थित लघु सचिवालय हिल गया। अधिकारी व कर्मचारी सीढ़ियों से नीचे उतरे और फरियादियों को भी बाहर निकाला। सीटीएम संदीप अग्रवाल व डीएसपी सिटी राजेश लोहान बचाव दल के साथ मौके पर पहुंचे। सीटीएम संदीप अग्रवाल ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि लघु सचिवालय स्थित कार्यालयों व बेसमेंट स्थित एक बैंक में कुछ लोगों के फंसे होने की सूचना मिली। बचाव दल ने सबसे पहले विभिन्न कार्यालयोंमें सर्च अभियान चलाया। इसके बाद बेसमेंट स्थित बैंक में जाने का प्रयास किया, लेकिन रास्ता बंद होने के चलते अंदर नहीं जा सके। बचाव दल रस्से की मदद से अंदर दाखिल हुआ। लघु सचिवालय में 18 घायल मिले। इनमें से 12 को प्राथमिक उपचार देकर छुट्टी दे दी। जबकि छह लोगों को सिविल अस्पताल में इलाज के लिए भेजा गया। डीएसपी राजेश लोहान ने बताया कि बचाव कार्य व उसके बाद राहत कार्यों में सामाजिक व धार्मिक संगठनों का विशेष सहयोग रहा।
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सिविल अस्पताल का पुराना भवन गिरा, दो की मौत, पांच घायल
मॉक ड्रील के दौरान सिविल अस्पताल का पुराना भवन गिरने की सूचना मिली। एसडीएम पानीपत विवेक चौधरी व डीएसपी ट्रैफिक संदीप कुमार सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे। एसडीएम विवेक चौधरी अपनी रिपोर्ट में बताया कि सिविल अस्पताल में दो लोगों की मौत हो गई। जबकि पांच घायल हो गए। अस्पताल में बीम गिरने के चलते बचाव कार्य तीन दौर में चलाया गया। डीएसपी ट्रैफिक संदीप कुमार ने बताया कि अस्पताल में दो मृतकों में से एक की शिनाख्त कर ली गई, जबकि दूसरे की शिनाख्त के प्रयास किए जा रहे हैं।
समालखा लघु सचिवालय में 30 लोग फंसे
समालखा लघु सचिवालय में भूकंप आने पर लोगों के फंसने की सूचना मिली। एसडीएम समालखा गौरव कुमार व डीएसपी समालखा नरेश अहलावत बचाव दल के साथ मौके पर करीब 10:50 बजे पर पहुंचे। एसडीएम समालखा गौरव कुमार ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि समालखा लघु सचिवालय में 30 लोगों के अंदर फंसने की सूचना मिली थी। सबको बाहर निकाला। इनमें नौ लोग घायल मिले। तीन को सीएचसी में प्राथमिक उपचार के बाद सिविल अस्पताल पानीपत रेफर कर दिया। छह को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी। पांच का सीएचसी में ही इलाज किया गया। डीएसपी नरेश अहलावत ने बताया कि बचाव कार्य के दौरान अफवाहों के चलते कुछ दिक्कत आई। लोग बार-बार अफवाहों के चलते बीच में आ रहे थे।
मित्तल मेगा मॉल में 40 लोग फंसे
मॉक ड्रील के दौरान मित्तल मेगा मॉल को भी केंद्र बनाया गया। प्रशासन को यहां पर 40 लोगों के फंसे होने की सूचना मिली। एमडी शुगर मिल बीर सिंह व डीएसपी मुख्यालय जगदीप दून बचाव दल के साथ मौके पर पहुंचे। एमडी शुगर मिल ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि सुबह के वक्त मॉल की दुकान खुल रही थी, जबकि बेसमेंट स्थित एक जिम व फूड कोर्ट में 40 लोगों के फंसे होने की जानकारी मिली थी। इनमें से पांच घायलों में से चार को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया, जबकि एक को सिविल अस्पताल रेफर कर दिया। एमडी शुगर मिल ने बताया कि यहां पर साउंड सिस्टम व सायरन न होने की कमी पाई गई। डीएसपी जगदीप दून ने बताया कि इमरजेंसी के दौरान मॉल में पानी के पर्याप्त संसाधन नहीं मिले।
एनएफएल में अमोनिया गैस लीक होने से नौ की मौत
भूकंप के दौरान एनएफएल में अमोनिया गैस लीक होने की सूचना मिली। यहां पर नगर निगम आयुक्त शिव प्रसाद शर्मा और सीआईएसएफ के मेजर लुम्मी एस तुरंत मौके पर पहुंचे। निगम आयुक्त शिव प्रसाद शर्मा ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि उनको एनएफएल में 19 लोगों के फंसे होने की सूचना मिली थी। उन्होंने सबसे पहले बिजली सप्लाई को काटा और फिर बचाव कार्य शुरू किया। यहां पर पहले इन साइड व फिर आउट साइड इमरजेंसी घोषित की। तकनीकी टीम की मदद से तुरंत गैस रिसाव को बंद किया। एनएफएल में नौ लोगों की मौत हो गई और दो गंभीर है। यहां पर करीब 25 मिनट तक बचाव कार्य चला। उन्होंने बताया कि एनएफएल के दोनों तरफ रेलवे फाटक होने के चलते मौके पर पहुंचने में कुछ समय लगा। कई बार रेलवे फाटक बंद होने से लंबे समय तक फाटक बंद रह सकती है। ऐसे में किसी तरह की इमरजेंसी में रेलवे अधिकारियों से संपर्क कर ट्रेनों का जहां के तहां ठहराव कर एनएफएल में बचाव कार्य के लिए समय पर पहुंचा जा सकता है। मेजर लुम्मी एस ने मॉक ड्रील को आपातकाल के लिए जरूरी बताया।
डीएवी पुलिस पब्लिक स्कूल में फंसे 50 बच्चे
पुलिस लाइन स्थित डीएवी पुलिस पब्लिक स्कूल में भूकंप के चलते 50 बच्चे फंस गए। नगर निगम की संयुक्त आयुक्त सुमन भांखड़ व डीएसपी विद्यावती तुरंत मौके पर पहुंची। उन्होंने स्कूल प्रिंसिपल से पूरी स्थिति की जानकारी ली। उनको बताया कि स्कूल में 12सौ बच्चे हैं। इनमें से 50 बच्चे अंदर फंसे हुए हैं। संयुक्त आयुक्त सुमन भांखड़ ने बताया कि सभी बच्चों को बाहर निकाला। इनमें से छह बच्चों को गंभीर होने के चलते सिविल अस्पताल में इलाज के लिए भेज दिया।
आईओसीएल के नेफ्था क्रेकर में गैस लीक हुई
इंडियन ऑयल की पानीपत रिफाइनरी के नेफ्था क्रैकर प्लांट में एक गैस लीक होने की सूचना मिली। डीआरओ राजकुमार भौरिया ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि रिफाइनरी के ईडी ने उनको पूरी जानकारी दी और उन्होंने अपने स्तर पर गैस की लीकेज बंद करने और बचाव कार्य करने का भरोसा दिया। अधिकारियों ने प्लांट के अंदर फैली गैस को अपने स्तर पर कंट्रोल किया। रिफाइनरी में किसी तरह के नुकसान की सूचना नहीं मिली।
वर्जन
जिले में मॉक ड्रील में प्रशासनिक व पुलिस के अधिकारियों के साथ कर्मचारियों का विशेष योगदान रहा। इसके साथ ही धार्मिक व सामाजिक संगठनों ने भी आगे आकर अपना सहयोग दिया है। किसी तरह की इमरजेंसी आते ही नजदीकी पीसीआर, राइडर, थाना व पुलिस चौकी में इसकी सूचना दें। जिसके चलते बचाव कार्य समय पर शुरू हो सकें।
राहुल शर्मा, एसपी पानीपत।
वर्जन
आपातकाल के चलते मॉक ड्रील की गई थी। मॉक ड्रील के अनुसार शहर समेत जिले में छह स्थानों पर नुकसान होने की सूचना मिली थी। जिले में मॉक ड्रील पूरी तरह से सफल रहा। लघु सचिवालय से निकलने में कुछ ज्यादा समय लगा है। यह पहली मॉक ड्रील है। इसकी कमियों को अगली बार सुधार किया जाएगा।
डॉ. चंद्रशेखर खरे, डीसी, पानीपत।