{"_id":"6ac65d9a88f269c7ca0a4793","slug":"131-lakh-withdrawn-from-pension-account-via-cheque-consumer-commission-dismisses-complaint-finding-no-deficiency-in-banking-service-panipat-news-c-244-1-pnp1001-165553-2026-10-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Panipat News: पेंशन खाते से चेक के जरिये 1.31 लाख रुपये निकले, बैंक सेवा में कमी न मानते हुए उपभोक्ता आयोग ने खारिज की शिकायत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Panipat News: पेंशन खाते से चेक के जरिये 1.31 लाख रुपये निकले, बैंक सेवा में कमी न मानते हुए उपभोक्ता आयोग ने खारिज की शिकायत
विज्ञापन
माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की पानीपत शाखा के पेंशन खाते से चेकों के माध्यम से हुई 1.31 लाख रुपये की निकासी के मामले में बैंक सेवा में कोई कमी न मानते हुए शिकायत खारिज कर दी है। आयोग ने पाया कि महिला यह साबित करने में पूरी तरह विफल रही कि चेक किसी अन्य व्यक्ति को नहीं दिए गए थे। इसके अलावा मामले में देरी से शिकायत करना और संबंधित शाखाओं को पक्षकार न बनाना भी भारी पड़ा।
यह फैसला आयोग के अध्यक्ष डॉ. आरके डोगरा, सदस्य डॉ. रेखा चौधरी और विनीत कौशिक की पीठ ने सुनाया है। बिंझौल गांव की भतेरी देवी ने अपनी शिकायत में बताया कि उनका एसबीआई की पानीपत शाखा में बचत व पेंशन खाता है। वह पांच मार्च 2024 को 12 हजार रुपये निकालने बैंक गई थी। उन्होंने चेक दिया तो अधिकारियों ने बताया कि यह चेक पहले ही इस्तेमाल हो चुका है। रिकॉर्ड खंगालने पर पता चला कि 21 जनवरी 2023 को इसी चेक संख्या से 66 हजार रुपये और एक अन्य चेक से 65 हजार रुपये ट्रांसफर हुए थे। महिला ने दावा किया कि दोनों चेक उनके पास ही सुरक्षित थे और उसने किसी को जारी नहीं किए थे।
दिल्ली की शाखाओं से भुनाए गए थे चेक
पीड़ित महिला ने बैंक प्रबंधक और दिल्ली स्थित एसबीआई कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई। बाद में उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाते हुए 1.31 लाख रुपये की वापसी, 18 प्रतिशत ब्याज, 50 हजार रुपये मुआवजा और 22 हजार रुपये मुकदमा खर्च दिलाने की मांग की। उधर बैंक ने आयोग में दलील दी कि 21 जनवरी 2023 को रकम निकलते ही खाताधारक के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर मैसेज भेजे गए थे, लेकिन शिकायत करीब एक साल दो महीने बाद दर्ज कराई। बैंक ने जवाब दिया कि दोनों चेक एसबीआई की दिल्ली स्थित डिफेंस कॉलोनी और ग्रीन पार्क एक्सटेंशन शाखाओं में भुनाए गए थे।
विज्ञापन
आयोग ने इन आधारों पर सुनाया निर्णय
दस्तावेजों और दलीलों का अवलोकन करने के बाद आयोग ने स्पष्ट किया कि बैंक के नियमानुसार धोखाधड़ी की शिकायत एक महीने के भीतर की जानी चाहिए थी। साथ ही महिला ने जिन दिल्ली की शाखाओं में चेक कैश हुए और जिस व्यक्ति के खाते में रकम गई उन्हें केस में शामिल नहीं किया। इन सभी खामियों और विलंब को देखते हुए आयोग ने बैंक के पक्ष में फैसला सुनाते हुए परिवाद को निरस्त कर दिया।
विज्ञापन
पानीपत। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की पानीपत शाखा के पेंशन खाते से चेकों के माध्यम से हुई 1.31 लाख रुपये की निकासी के मामले में बैंक सेवा में कोई कमी न मानते हुए शिकायत खारिज कर दी है। आयोग ने पाया कि महिला यह साबित करने में पूरी तरह विफल रही कि चेक किसी अन्य व्यक्ति को नहीं दिए गए थे। इसके अलावा मामले में देरी से शिकायत करना और संबंधित शाखाओं को पक्षकार न बनाना भी भारी पड़ा।
यह फैसला आयोग के अध्यक्ष डॉ. आरके डोगरा, सदस्य डॉ. रेखा चौधरी और विनीत कौशिक की पीठ ने सुनाया है। बिंझौल गांव की भतेरी देवी ने अपनी शिकायत में बताया कि उनका एसबीआई की पानीपत शाखा में बचत व पेंशन खाता है। वह पांच मार्च 2024 को 12 हजार रुपये निकालने बैंक गई थी। उन्होंने चेक दिया तो अधिकारियों ने बताया कि यह चेक पहले ही इस्तेमाल हो चुका है। रिकॉर्ड खंगालने पर पता चला कि 21 जनवरी 2023 को इसी चेक संख्या से 66 हजार रुपये और एक अन्य चेक से 65 हजार रुपये ट्रांसफर हुए थे। महिला ने दावा किया कि दोनों चेक उनके पास ही सुरक्षित थे और उसने किसी को जारी नहीं किए थे।
विज्ञापन
दिल्ली की शाखाओं से भुनाए गए थे चेक
पीड़ित महिला ने बैंक प्रबंधक और दिल्ली स्थित एसबीआई कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई। बाद में उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाते हुए 1.31 लाख रुपये की वापसी, 18 प्रतिशत ब्याज, 50 हजार रुपये मुआवजा और 22 हजार रुपये मुकदमा खर्च दिलाने की मांग की। उधर बैंक ने आयोग में दलील दी कि 21 जनवरी 2023 को रकम निकलते ही खाताधारक के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर मैसेज भेजे गए थे, लेकिन शिकायत करीब एक साल दो महीने बाद दर्ज कराई। बैंक ने जवाब दिया कि दोनों चेक एसबीआई की दिल्ली स्थित डिफेंस कॉलोनी और ग्रीन पार्क एक्सटेंशन शाखाओं में भुनाए गए थे।
विज्ञापन
आयोग ने इन आधारों पर सुनाया निर्णय
दस्तावेजों और दलीलों का अवलोकन करने के बाद आयोग ने स्पष्ट किया कि बैंक के नियमानुसार धोखाधड़ी की शिकायत एक महीने के भीतर की जानी चाहिए थी। साथ ही महिला ने जिन दिल्ली की शाखाओं में चेक कैश हुए और जिस व्यक्ति के खाते में रकम गई उन्हें केस में शामिल नहीं किया। इन सभी खामियों और विलंब को देखते हुए आयोग ने बैंक के पक्ष में फैसला सुनाते हुए परिवाद को निरस्त कर दिया।