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साहब, एसडीओ धक्के मारकर निकालने की धमकी देता है, कैसे हो समस्या का समाधान
Updated Fri, 13 Oct 2017 12:11 AM IST
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साहब, एसडीओ धक्के मारकर निकालने की धमकी देता है, कैसे हो समस्या का समाधान
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। गोहाना रोड स्थित बिजली निगम के पावर हाउस के रेस्ट हाउस में कंज्यूमर ग्रीवेंसेज रिडरेशल फोरम(सीजीआरएफ) की ओर से बिजली निगम में खुला दरबार लगाया गया। खुले दरबार में उपभोक्ताओं ने कर्मचारियों और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए चेयरमैन के समक्ष भड़ास निकाली। खुले दरबार में कुल 10 शिकायत रखी गई। चेयरमैन ने जब उपभोक्ता को कहा कि आप शिकायत लेकर एसडीओ से मिल लेना, तो उपभोक्ता ने कहा कि साहब, वहीं एसडीओ उसे धक्का मारकर बाहर निकालने की धमकी दी थी, अब कैसे उसी के पास जाऊं।
वीरवार को लगे खुले दरबार में चेयरमैन डीवीएस धनखड़ के साथ फोरम के सदस्य जीएल बंसल, सचिव एके पुनिया, सचिव सोहनलाल, एसई वीरेंद्र सिंह मान, सिटी एक्सईएन पंकज धवन, सब अर्बन एक्सईएन धर्म सुहाग, एसडीओ अशोक शर्मा, सिटी एसडीओ ललित अत्री, सीनियर क्लर्क नीलकमल व मुकेश कौशिक मौजूद रहे।
उपभोक्ताओं ने बताया कि खुले दरबार में भी शिकायतों का समाधान कम ही होता है। यहीं वजह है कि पिछले तीन माह से चार शिकायतकर्ता हर बार पहुंच रहे है। लेकिन इनकी शिकायतों का अभी तक कोई समाधान नहीं हो पाया है। वीरवार को एक बार फिर से कुछ ऐसा मामला देखने को मिला। खुले दरबार में शिकायतकर्ता जब अपनी शिकायत लेकर पहुंचे तो चेयरमैन ने उनकी शिकायतें सुनी। उपभोक्ता जिन अधिकारियों से बचने के लिए खुले दरबार में जाते है। खुले दरबार से उपभोक्ताओं को उन्हीं के पास भेज दिया जाता है।
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चेयरमैन शिकायत का समाधान के लिए देते है निर्देश, निचले अधिकारी नहीं करते उनका समाधान
खुले दरबार का आयोजन भी उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए किया जाता है। लेकिन दरबार भी परेशानी ही सामने लेकर आ रहा है। खुले दरबार में अधिकारी तो समस्या के निदान के लिए निर्देश दे देते है। लेकिन निचले अधिकारियों की लापरवाही के कारण यह निर्देश सिर्फ कागजों में ही सिमट कर रह जाते हैं। जिसके कारण उपभोक्ताओं को अपनी शिकायतें कई-कई बार अधिकारियों के पास ले जाने के बाद भी उन्हें फिर से दरबार में पहुंचना पड़ता है।
फोटो कोट्स
गोहाना रोड स्थित खटीक बस्ती निवासी ओम प्रकाश ने बताया कि तीन साल से मीटर लगवाने के लिए बिजली निगम के अधिकारियों के पास चक्कर काट रहा हूं। जब एसडीओ के पास जाता हूं तो वे कहते है कि दफ्तर से अपने आप निकल जाओगे या मैं धक्के मार कर बाहर निकालू। तीन साल पहले सब मीटर से दुकान के लिए पड़ोसी से बिजली ली थी। उस पर निगम जेई ने चालान काटा हुआ है कि जब तक यह नहीं भरोगे तो मीटर नहीं लगेगा। इस पर चेयरमैन ने एसडीओ को फटकार लगाते हुए मीटर लगाने के लिए कहा।
फोटो कोट्स
मॉडल टाउन मुखीजा कॉलोनी निवासी हवा सिंह भारद्वाज ने बताया कि उसने 2016 में मकान खरीदा और उस समय सारा बिजली, पानी और हाउस टैक्स जमा करा दिया। लेकिन अब 2017 में 2014 व 15 का 8397 रुपये बिजली बिल लंबित बताकर बिल भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब घर लिया तो सारे बिल क्लीयर करवा दिए गए थे और 2014 व 15 का बिल अब क्यों दिया जा रहा है।
फोटो कोट्स
सिद्धार्थ नगर निवासी बलबीर सिंह ने बताया कि जब से मीटर लगा है तब से वह समय से बिजली बिल भर रहा है। लेकिन 10 अक्तूबर को अचानक से उसके घर 11025 रुपये का बिल पहुंचा दिया गया। उसने कहा कि जब वह प्रत्येक बिल समय पर भर रहा है तो उसके घर 11025 रुपये का बिल कैसे दिया गया। उसने बिल को ठीक करने की गुहार चेयरमैन से लगाई।
फोटो कोट्स
आठ मरला निवासी नीरू ने बताया कि उसके नाम पर ही बिजली मीटर है। बिजली कर्मी कभी घर पर 45, कभी 55 तो कभी 60 हजार का बिल लेकर आते है। लेकिन उसमे घर में दो पंखे चार एलईडी बल्ब के इलावा कुछ नहीं है। फिर भी बिजली कर्मियों ने मुझसे 29 जुलाई को 22893 रुपये का बिल भरवा लिया। जिसके बाद सब क्लीयर हो गया। लेकिन उसके बाद अगला बिल 45 हजार रुपये का भेज दिया। उसने बताया कि किसी दूसरे के बिल की राशि मेरे खाते में जोड़कर बिजली कर्मी भेज रहे। जिससे वह कई महीनों से परेशान है। कृपा कर मेरी इस समस्या का समाधान करा दीजिए।
वर्जन
खुले दरबार में अबकी बार 10 शिकायतें आई है। जिसमें से चार पुरानी है। अधिकारियों को पुरानी पड़ी शिकायतों को पहले निपटाने के निर्देश दिए है और कहा कि अगली बार जब खुला दरबार लगे तो पुरानी चारों शिकायतें नहीं आनी चाहिए। वहीं दो शिकायतें बिजली बिल ठीक करने की आई थी। जिन्हें मौके पर ही कार्यालय में जाकर ठीक करवा दिया गया है।
डीवीएस धनखड़, चेयरमैन, सीजीआरएफ चंडीगढ़।
- बिजली निगम के खुले दरबार में उपभोक्ताओं ने खोली अधिकारियों, कर्मचारियों की कार्यप्रणाली की पोल
फोटो-5 से 10
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अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। गोहाना रोड स्थित बिजली निगम के पावर हाउस के रेस्ट हाउस में कंज्यूमर ग्रीवेंसेज रिडरेशल फोरम(सीजीआरएफ) की ओर से बिजली निगम में खुला दरबार लगाया गया। खुले दरबार में उपभोक्ताओं ने कर्मचारियों और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए चेयरमैन के समक्ष भड़ास निकाली। खुले दरबार में कुल 10 शिकायत रखी गई। चेयरमैन ने जब उपभोक्ता को कहा कि आप शिकायत लेकर एसडीओ से मिल लेना, तो उपभोक्ता ने कहा कि साहब, वहीं एसडीओ उसे धक्का मारकर बाहर निकालने की धमकी दी थी, अब कैसे उसी के पास जाऊं।
वीरवार को लगे खुले दरबार में चेयरमैन डीवीएस धनखड़ के साथ फोरम के सदस्य जीएल बंसल, सचिव एके पुनिया, सचिव सोहनलाल, एसई वीरेंद्र सिंह मान, सिटी एक्सईएन पंकज धवन, सब अर्बन एक्सईएन धर्म सुहाग, एसडीओ अशोक शर्मा, सिटी एसडीओ ललित अत्री, सीनियर क्लर्क नीलकमल व मुकेश कौशिक मौजूद रहे।
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उपभोक्ताओं ने बताया कि खुले दरबार में भी शिकायतों का समाधान कम ही होता है। यहीं वजह है कि पिछले तीन माह से चार शिकायतकर्ता हर बार पहुंच रहे है। लेकिन इनकी शिकायतों का अभी तक कोई समाधान नहीं हो पाया है। वीरवार को एक बार फिर से कुछ ऐसा मामला देखने को मिला। खुले दरबार में शिकायतकर्ता जब अपनी शिकायत लेकर पहुंचे तो चेयरमैन ने उनकी शिकायतें सुनी। उपभोक्ता जिन अधिकारियों से बचने के लिए खुले दरबार में जाते है। खुले दरबार से उपभोक्ताओं को उन्हीं के पास भेज दिया जाता है।
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चेयरमैन शिकायत का समाधान के लिए देते है निर्देश, निचले अधिकारी नहीं करते उनका समाधान
खुले दरबार का आयोजन भी उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए किया जाता है। लेकिन दरबार भी परेशानी ही सामने लेकर आ रहा है। खुले दरबार में अधिकारी तो समस्या के निदान के लिए निर्देश दे देते है। लेकिन निचले अधिकारियों की लापरवाही के कारण यह निर्देश सिर्फ कागजों में ही सिमट कर रह जाते हैं। जिसके कारण उपभोक्ताओं को अपनी शिकायतें कई-कई बार अधिकारियों के पास ले जाने के बाद भी उन्हें फिर से दरबार में पहुंचना पड़ता है।
फोटो कोट्स
गोहाना रोड स्थित खटीक बस्ती निवासी ओम प्रकाश ने बताया कि तीन साल से मीटर लगवाने के लिए बिजली निगम के अधिकारियों के पास चक्कर काट रहा हूं। जब एसडीओ के पास जाता हूं तो वे कहते है कि दफ्तर से अपने आप निकल जाओगे या मैं धक्के मार कर बाहर निकालू। तीन साल पहले सब मीटर से दुकान के लिए पड़ोसी से बिजली ली थी। उस पर निगम जेई ने चालान काटा हुआ है कि जब तक यह नहीं भरोगे तो मीटर नहीं लगेगा। इस पर चेयरमैन ने एसडीओ को फटकार लगाते हुए मीटर लगाने के लिए कहा।
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मॉडल टाउन मुखीजा कॉलोनी निवासी हवा सिंह भारद्वाज ने बताया कि उसने 2016 में मकान खरीदा और उस समय सारा बिजली, पानी और हाउस टैक्स जमा करा दिया। लेकिन अब 2017 में 2014 व 15 का 8397 रुपये बिजली बिल लंबित बताकर बिल भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब घर लिया तो सारे बिल क्लीयर करवा दिए गए थे और 2014 व 15 का बिल अब क्यों दिया जा रहा है।
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सिद्धार्थ नगर निवासी बलबीर सिंह ने बताया कि जब से मीटर लगा है तब से वह समय से बिजली बिल भर रहा है। लेकिन 10 अक्तूबर को अचानक से उसके घर 11025 रुपये का बिल पहुंचा दिया गया। उसने कहा कि जब वह प्रत्येक बिल समय पर भर रहा है तो उसके घर 11025 रुपये का बिल कैसे दिया गया। उसने बिल को ठीक करने की गुहार चेयरमैन से लगाई।
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आठ मरला निवासी नीरू ने बताया कि उसके नाम पर ही बिजली मीटर है। बिजली कर्मी कभी घर पर 45, कभी 55 तो कभी 60 हजार का बिल लेकर आते है। लेकिन उसमे घर में दो पंखे चार एलईडी बल्ब के इलावा कुछ नहीं है। फिर भी बिजली कर्मियों ने मुझसे 29 जुलाई को 22893 रुपये का बिल भरवा लिया। जिसके बाद सब क्लीयर हो गया। लेकिन उसके बाद अगला बिल 45 हजार रुपये का भेज दिया। उसने बताया कि किसी दूसरे के बिल की राशि मेरे खाते में जोड़कर बिजली कर्मी भेज रहे। जिससे वह कई महीनों से परेशान है। कृपा कर मेरी इस समस्या का समाधान करा दीजिए।
वर्जन
खुले दरबार में अबकी बार 10 शिकायतें आई है। जिसमें से चार पुरानी है। अधिकारियों को पुरानी पड़ी शिकायतों को पहले निपटाने के निर्देश दिए है और कहा कि अगली बार जब खुला दरबार लगे तो पुरानी चारों शिकायतें नहीं आनी चाहिए। वहीं दो शिकायतें बिजली बिल ठीक करने की आई थी। जिन्हें मौके पर ही कार्यालय में जाकर ठीक करवा दिया गया है।
डीवीएस धनखड़, चेयरमैन, सीजीआरएफ चंडीगढ़।
- बिजली निगम के खुले दरबार में उपभोक्ताओं ने खोली अधिकारियों, कर्मचारियों की कार्यप्रणाली की पोल
फोटो-5 से 10