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आषाढ़ मास की पूर्णमासी को गुरुपूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है
Updated Sun, 09 Jul 2017 06:23 PM IST
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हर्षोल्लास के साथ मनाया गुरु पूजा पर्व
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। श्री प्रेम मंदिर धाम में गुरु पूजा महोत्सव के पावन पर्व पर सद्गरुदेव शांतिदेवी महाराज को कांता देवी महाराज ने नमन वंदन कर तिलक लगाकर उनका दिव्य आशीर्वाद प्राप्त किया।
इस अवसर पर कांता देवी महाराज ने कहा कि आषाढ़ मास की पूर्णमासी को गुरुपूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। यह एक पर्व है जो हम गुरुपूजा के रूप में मनाते हैं। इस पर्व पर गुरु के प्रति अपनी श्रद्धाभाव व्यक्त करने का सभी भक्तों को अवसर मिलता है। इसलिए यह पर्व ब्यास पूजा एवं गुरुपूजा के नाम से प्रसिद्ध है। रविवार प्रात:काल से ही सद्गुरुदेव की पूजा वंदना के लिए भक्तों की लंबी लाइन लग गई। प्रेम मंदिर धाम में संकीर्तन, सत्संग की महिमा का गुणगान किया गया। इस अवसर पर बच्चों ने भगवान की पावन पवित्र लीलाओं का मंचन कर सभी का मन मोह लिया। इसके बाद गुरुदेव की आरती वंदन कर विशाल भंडारे का आयोजन किया। इस मौके पर जगदीश ढींगड़ा, चंद्रभान वर्मा, प्रमोद खेड़ा, सुनील मिगलानी, हिमांशु असीजा, मदन लाल गक्खड़, बलदेव राज, यशपाल अरोड़ा, अशोक जुनेजा, परमवीर ढींगड़ा, गौतम खेड़ा, अंकुर छाबड़ा, गौतम दुआ, रमेश असीजा, राजू सेठी, पंकज गाबा, डॉ. प्रकाश, कौशल व सुरेश अरोड़ा मौजूद रहे।
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अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। श्री प्रेम मंदिर धाम में गुरु पूजा महोत्सव के पावन पर्व पर सद्गरुदेव शांतिदेवी महाराज को कांता देवी महाराज ने नमन वंदन कर तिलक लगाकर उनका दिव्य आशीर्वाद प्राप्त किया।
इस अवसर पर कांता देवी महाराज ने कहा कि आषाढ़ मास की पूर्णमासी को गुरुपूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। यह एक पर्व है जो हम गुरुपूजा के रूप में मनाते हैं। इस पर्व पर गुरु के प्रति अपनी श्रद्धाभाव व्यक्त करने का सभी भक्तों को अवसर मिलता है। इसलिए यह पर्व ब्यास पूजा एवं गुरुपूजा के नाम से प्रसिद्ध है। रविवार प्रात:काल से ही सद्गुरुदेव की पूजा वंदना के लिए भक्तों की लंबी लाइन लग गई। प्रेम मंदिर धाम में संकीर्तन, सत्संग की महिमा का गुणगान किया गया। इस अवसर पर बच्चों ने भगवान की पावन पवित्र लीलाओं का मंचन कर सभी का मन मोह लिया। इसके बाद गुरुदेव की आरती वंदन कर विशाल भंडारे का आयोजन किया। इस मौके पर जगदीश ढींगड़ा, चंद्रभान वर्मा, प्रमोद खेड़ा, सुनील मिगलानी, हिमांशु असीजा, मदन लाल गक्खड़, बलदेव राज, यशपाल अरोड़ा, अशोक जुनेजा, परमवीर ढींगड़ा, गौतम खेड़ा, अंकुर छाबड़ा, गौतम दुआ, रमेश असीजा, राजू सेठी, पंकज गाबा, डॉ. प्रकाश, कौशल व सुरेश अरोड़ा मौजूद रहे।
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