{"_id":"595552a34f1c1be4488b473e","slug":"111498763939-panipat-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"रेलवे स्टेशन की लाइन नंबर तीन 200 मीटर तक धंसी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रेलवे स्टेशन की लाइन नंबर तीन 200 मीटर तक धंसी
Updated Fri, 30 Jun 2017 01:00 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। पानीपत रेलवे स्टेशन की लाइन नंबर तीन का करीब 200 मीटर लंबा टुकड़ा धंसने से अधिकारियों में हड़कंप मचा गया। रेलवे की इंजीनियर विंग की टीम ने मौका मुआयना कर ट्रैक की मरम्मत की। इस दौरान तीन नंबर प्लेटफार्म पर आने वाली ट्रेनों को दूसरी लाइनों से गुजारा गया। सुबह दस बजे से लेकर करीब एक बजे तक ट्रैक की मरम्मत की गई। कुछ लोग ट्रैक धंसने का कारण बारिश बता रहे हैं, लेकिन तकनीकी अधिकारियों ने इसे सामान्य मरम्मत बताया है।
ट्रैक इंजीनियर को वीरवार सुबह नौ बजे सूचना मिली की लाइन नंबर तीन में कुछ दिक्कत आ रही है। पैमाने से जांच की तो 200 मीटर तक लाइन करीब साढ़े छह इंच तक धंसा मिला। इंजीनियर ने मौका मुआयना किया और तकनीकी टीम के साथ ट्रैकमैन ने मरम्मत कार्य शुरू किया। इस दौरान तीन नंबर प्लेटफार्म पर एक भी ट्रेन नहीं आने दी गई। इस प्लेटफार्म की ट्रेनों को दूसरे प्टेलफार्मों से गुजारा गया। तकनीकी टीम ने दोपहर बाद एक बजे ट्रैक की मरम्मत पूरी की। इसके बाद ट्रैक के तकनीकी अधिकारियों ने ट्रैक की जांच की। रेलवे स्टेशन पर ट्रैक के ट्रायल के बाद सामान्य ट्रेनों के लिए उसे खोल दिया गया।
अधिक पानी जाने से धंसी लाइन
रेलवे अधिकारियों ने बताया कि जांच के दौरान पता लगा कि लाइन नंबर तीन में अधिक पानी जाने के कारण उसका 200 मीटर का भाग करीब साढ़े छह इंच धंस गया था। कर्मचारियों ने दो जैक लगाकर लाइनों को उठाया। हालांकि, कुछ अधिकारी इसे रूटीन कार्य बताकर पल्ला झाड़ते रहे।
विज्ञापन
लाइन धंसी थी। यह कार्य तो हर रोज किसी न किसी लाइन पर चलता ही रहता है। बारिश या किसी अन्य कारण से ट्रैक नहीं धंसा है।
राजाराम मीणा, ट्रैक इंजीनियर, रेलवे पानीपत।
विज्ञापन
पानीपत। पानीपत रेलवे स्टेशन की लाइन नंबर तीन का करीब 200 मीटर लंबा टुकड़ा धंसने से अधिकारियों में हड़कंप मचा गया। रेलवे की इंजीनियर विंग की टीम ने मौका मुआयना कर ट्रैक की मरम्मत की। इस दौरान तीन नंबर प्लेटफार्म पर आने वाली ट्रेनों को दूसरी लाइनों से गुजारा गया। सुबह दस बजे से लेकर करीब एक बजे तक ट्रैक की मरम्मत की गई। कुछ लोग ट्रैक धंसने का कारण बारिश बता रहे हैं, लेकिन तकनीकी अधिकारियों ने इसे सामान्य मरम्मत बताया है।
ट्रैक इंजीनियर को वीरवार सुबह नौ बजे सूचना मिली की लाइन नंबर तीन में कुछ दिक्कत आ रही है। पैमाने से जांच की तो 200 मीटर तक लाइन करीब साढ़े छह इंच तक धंसा मिला। इंजीनियर ने मौका मुआयना किया और तकनीकी टीम के साथ ट्रैकमैन ने मरम्मत कार्य शुरू किया। इस दौरान तीन नंबर प्लेटफार्म पर एक भी ट्रेन नहीं आने दी गई। इस प्लेटफार्म की ट्रेनों को दूसरे प्टेलफार्मों से गुजारा गया। तकनीकी टीम ने दोपहर बाद एक बजे ट्रैक की मरम्मत पूरी की। इसके बाद ट्रैक के तकनीकी अधिकारियों ने ट्रैक की जांच की। रेलवे स्टेशन पर ट्रैक के ट्रायल के बाद सामान्य ट्रेनों के लिए उसे खोल दिया गया।
विज्ञापन
अधिक पानी जाने से धंसी लाइन
रेलवे अधिकारियों ने बताया कि जांच के दौरान पता लगा कि लाइन नंबर तीन में अधिक पानी जाने के कारण उसका 200 मीटर का भाग करीब साढ़े छह इंच धंस गया था। कर्मचारियों ने दो जैक लगाकर लाइनों को उठाया। हालांकि, कुछ अधिकारी इसे रूटीन कार्य बताकर पल्ला झाड़ते रहे।
विज्ञापन
लाइन धंसी थी। यह कार्य तो हर रोज किसी न किसी लाइन पर चलता ही रहता है। बारिश या किसी अन्य कारण से ट्रैक नहीं धंसा है।
राजाराम मीणा, ट्रैक इंजीनियर, रेलवे पानीपत।