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यमुना की तलहटी में की जाने वाली सब्जी की खेती भी हुई नष्ट
Updated Tue, 25 Sep 2018 11:25 PM IST
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4 दिन की बारिश से किसानों की मेहनत पर फिरा पानी, जिले में तीस प्रतिशत फसल हुई खराब
- सर्वाधिक 40 प्रतिशत नुकसान धान की किस्म 1509 में बासमती में 10 से 15 प्रतिशत तो वहीं 1121 में 20 से 25 प्रतिशत नुकसान
- बारिश के साथ तेज हो होने के कारण गन्ने की फसल गिरने से भी प्रति एकड़ 30 क्विंटल हुआ नुकसान
- मंगलवार तक फसलों के नुकसान की भरपाई के लिए 710 किसानों ने किया बीमा कराने के लिए आवेदन
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। 3 दिन तक लगातार चली बारिश ने किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया है। जहां पिछले तीन-चार दिनों तक किसानों की फसल बहुत अच्छी खड़ी थी, वहीं बारिश के कारण किसानों की 30% फसल खराब हो गई है। जिले में सर्वाधिक नुकसान सब्जी की खेती करने वाले व धान की किस्म 1509 की बुआई करने वाले किसान को हुआ है। जमुना की तलहटी में बीस प्रतिशत भूमिहीन किसान ऐसे हैं जो जमीन ठेके पर लेकर या किसी बड़े किसान के साथ साझेदारी में सब्जी की फसल उगाते हैं। तेज बारिश होने के कारण बेल वाली फसलों में पानी खड़ा होने से सब्जी की बेल सड़ गई है। जिस कारण करेला, लौकी, तोरी, जैसी फसलें 80% नष्ट हो गई है। वहीं जान की कसम 1509 लगभग पक चुकी थी। कुछ किसानों ने तो फसल काटकर खेत में ही छोड़ रखी थी जो तेज बारिश के कारण जलमग्न हो गई। जिस से फसल में 40% नुकसान हो गया है। बारिश के कारण धान का दाना भी रंग बदल गया है। जिस कारण मंडियों में भी अचानक से धान के भाव गिर गए हैं। मंडियों में भाव गिरने से भी किसान पर दोहरी मार पड़ी है। जिले में धान की 74000 एकड़ फसल खड़ी है। जिसमें तीस प्रतिशत के के लगभग 1509 की बुवाई की गई है। 1509 के अलावा 1121 किस्म की बुवाई 45 प्रतिशत के लगभग है, जिसमें 20% के लगभग नुकसान हुआ है। 1121 में कम नुकसान होने का कारण यह है कि 1121 अभी पकनी ही शुरू हुई थी। फसल में अब तक पूरी तरह से फूल भी नहीं आया है।जिस कारण दाने पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। जबकि फसल गिर जाने के कारण 4 से 5 क्विंटल प्रति एकड़ धान कम निकलेंगे। बासमती राइस नुकसान फिलहाल सबसे कम माना जा रहा है क्योंकि बासमती धान अभी 2 माह बाद पकेगा। जिस वजह से वर्तमान समय में हुई बारिश के कारण बासमती की फसल पर ज्यादा असर नहीं है। परंतु बहुत से इलाकों में तेज हवा के कारण बासमती धान भी बिछ गए हैं। जिस कारण 10% नुकसान तो किसान को उठाना ही पड़ेगा। धान के अलावा जिले में 18702 एकड़ गन्ने की फसल की बुवाई की गई है। गन्ना किसानों ने बताया कि बारिश के साथ तेज हवा होने के कारण ईंख गिर गया है। जिससे किसानों को दो नुकसान हुए हैं। पहला तो गन्ना गिरने के कारण टूट गया है जिस कारण प्रति एकड़ 30 क्विंटल गन्ना कम निकलेगा। दूसरा नुकसान गिरे हुए गन्ने की फसल को उठाने की मजदूरी देने का होगा। जिला कृषि विभाग के अनुसार जिले में संयुक्त रूप से तीस प्रतिशत फसल बारिश के कारण नुकसान ग्रस्त हुई है।बारिश की मार के ऊपर पड़ी भाव की मार तेज बारिश के कारण जहां किसानों की फसल खराब हो रही है। वहीं इसी बीच मंडियों में धान के भाव भी कम हो गए हैं। जहां 1509 की शुरुआत तेईसौ रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से बिकने से हुई थी जो बारिश से पहले 25 सौ तक पहुंच गई थी, लेकिन बारिश आने के कारण धान का दाना रंग बदल रहा है। जिस कारण मंडियों में 1509 धान 2000 से 2100 रुपये प्रति क्विंटल तक ही बिक रही है।किसानों का दुख उन्हीं की जुबानीबारिश के कारण 5 क्विंटल धान घटेगा :- किसान शमशेर सिंहगांव आट्टा के किसान शमशेर सिंह ने कहा कि मेरे पास कुल 5 एकड़ 1121 धान की फसल है, जो बारिश आने से पहले बेहद शानदार खड़ी हुई थी। उन्होंने कहा कि उनके अनुमान अनुसार प्रति एकड़ 25 क्विंटल धान निकलना था। जो अब मुश्किल से 20 क्विंटल निकलेगा। जिससे उसको लगभग 20% नुकसान का सामना करना पड़ेगा। वहीं गिरी हुई फसल में दाना हल्का होने के कारण भी फसल का भाव मंडी में कम रहेगा। जिससे उन पर दोहरी मार पड़ेगी जो बेहद ही पीड़ादायक है।बारिश के कारण 40% धान की फसल खराब :- जोगिंद्र सिंह गांव गढ़ी केवल के किसान जोगिंदर सिंह ने बताया कि उसके पास 5 एकड़ 1509 धान की फसल खड़ी है। बारिश से पहले जो लगभग पक चुकी थी लेकिन बारिश आने के कारण सारी फसल बिछ गई है व उसमे पानी खड़ा हो गया है। जिससे 40% फसल नष्ट हो गई है।जिले में 30 प्रतिशत फसल हुई नष्ट :- डिप्टी डायरेक्टरएग्रीकल्चर विभाग के डिप्टी डायरेक्टर पवन शर्मा के अनुसार जिले में अनुमानित 30% फसल संयुक्त रूप से खराब हुई है। उन्होंने कहा कि जिन किसानों को नुकसान हुआ है 72 घंटे के अंदर अपने नुकसान की रिपोर्ट कराए।उन्होंने कहा कि विभाग के सभी अधिकारी व संबंधित कर्मचारी अपने अपने क्षेत्र में फसल के नुकसान का सर्वे करने में जुटे हुए हैं। जिन किसानों ने योजना के तहत बीमा करवाया है उनको समय पर लाभ दिलवाने के लिए विभाग पूरी तरह प्रयासरत है।
बारिश से नुकसान 2 दिन में आए 710 आवेदन :- उप कृषि निदेशकगत 2 दिनों में ही 710 किसानों द्वारा अपनी फसल में नुकसान को लेकर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ लेने के लिए उप कृषि निदेशक कार्यालय में अपने आवेदन जमा करवाए गए हैं। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के परियोजना निदेशक रामनिवास ने बताया कि खरीफ सीजन में 23 सितंबर तक मात्र 345 आवेदन फसल नुकसान बारे जमा हुए थे, लेकिन बारिश के कारण 2 दिन में ही 710 आवेदन आ चुके ह ैंब और अभी और भी आवेदन आने की संभावना है।
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4 दिन की बारिश से किसानों की मेहनत पर फिरा पानी, जिले में तीस प्रतिशत फसल हुई खराब
- सर्वाधिक 40 प्रतिशत नुकसान धान की किस्म 1509 में बासमती में 10 से 15 प्रतिशत तो वहीं 1121 में 20 से 25 प्रतिशत नुकसान
- बारिश के साथ तेज हो होने के कारण गन्ने की फसल गिरने से भी प्रति एकड़ 30 क्विंटल हुआ नुकसान
- मंगलवार तक फसलों के नुकसान की भरपाई के लिए 710 किसानों ने किया बीमा कराने के लिए आवेदन
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। 3 दिन तक लगातार चली बारिश ने किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया है। जहां पिछले तीन-चार दिनों तक किसानों की फसल बहुत अच्छी खड़ी थी, वहीं बारिश के कारण किसानों की 30% फसल खराब हो गई है। जिले में सर्वाधिक नुकसान सब्जी की खेती करने वाले व धान की किस्म 1509 की बुआई करने वाले किसान को हुआ है। जमुना की तलहटी में बीस प्रतिशत भूमिहीन किसान ऐसे हैं जो जमीन ठेके पर लेकर या किसी बड़े किसान के साथ साझेदारी में सब्जी की फसल उगाते हैं। तेज बारिश होने के कारण बेल वाली फसलों में पानी खड़ा होने से सब्जी की बेल सड़ गई है। जिस कारण करेला, लौकी, तोरी, जैसी फसलें 80% नष्ट हो गई है। वहीं जान की कसम 1509 लगभग पक चुकी थी। कुछ किसानों ने तो फसल काटकर खेत में ही छोड़ रखी थी जो तेज बारिश के कारण जलमग्न हो गई। जिस से फसल में 40% नुकसान हो गया है। बारिश के कारण धान का दाना भी रंग बदल गया है। जिस कारण मंडियों में भी अचानक से धान के भाव गिर गए हैं। मंडियों में भाव गिरने से भी किसान पर दोहरी मार पड़ी है। जिले में धान की 74000 एकड़ फसल खड़ी है। जिसमें तीस प्रतिशत के के लगभग 1509 की बुवाई की गई है। 1509 के अलावा 1121 किस्म की बुवाई 45 प्रतिशत के लगभग है, जिसमें 20% के लगभग नुकसान हुआ है। 1121 में कम नुकसान होने का कारण यह है कि 1121 अभी पकनी ही शुरू हुई थी। फसल में अब तक पूरी तरह से फूल भी नहीं आया है।जिस कारण दाने पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। जबकि फसल गिर जाने के कारण 4 से 5 क्विंटल प्रति एकड़ धान कम निकलेंगे। बासमती राइस नुकसान फिलहाल सबसे कम माना जा रहा है क्योंकि बासमती धान अभी 2 माह बाद पकेगा। जिस वजह से वर्तमान समय में हुई बारिश के कारण बासमती की फसल पर ज्यादा असर नहीं है। परंतु बहुत से इलाकों में तेज हवा के कारण बासमती धान भी बिछ गए हैं। जिस कारण 10% नुकसान तो किसान को उठाना ही पड़ेगा। धान के अलावा जिले में 18702 एकड़ गन्ने की फसल की बुवाई की गई है। गन्ना किसानों ने बताया कि बारिश के साथ तेज हवा होने के कारण ईंख गिर गया है। जिससे किसानों को दो नुकसान हुए हैं। पहला तो गन्ना गिरने के कारण टूट गया है जिस कारण प्रति एकड़ 30 क्विंटल गन्ना कम निकलेगा। दूसरा नुकसान गिरे हुए गन्ने की फसल को उठाने की मजदूरी देने का होगा। जिला कृषि विभाग के अनुसार जिले में संयुक्त रूप से तीस प्रतिशत फसल बारिश के कारण नुकसान ग्रस्त हुई है।बारिश की मार के ऊपर पड़ी भाव की मार तेज बारिश के कारण जहां किसानों की फसल खराब हो रही है। वहीं इसी बीच मंडियों में धान के भाव भी कम हो गए हैं। जहां 1509 की शुरुआत तेईसौ रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से बिकने से हुई थी जो बारिश से पहले 25 सौ तक पहुंच गई थी, लेकिन बारिश आने के कारण धान का दाना रंग बदल रहा है। जिस कारण मंडियों में 1509 धान 2000 से 2100 रुपये प्रति क्विंटल तक ही बिक रही है।किसानों का दुख उन्हीं की जुबानीबारिश के कारण 5 क्विंटल धान घटेगा :- किसान शमशेर सिंहगांव आट्टा के किसान शमशेर सिंह ने कहा कि मेरे पास कुल 5 एकड़ 1121 धान की फसल है, जो बारिश आने से पहले बेहद शानदार खड़ी हुई थी। उन्होंने कहा कि उनके अनुमान अनुसार प्रति एकड़ 25 क्विंटल धान निकलना था। जो अब मुश्किल से 20 क्विंटल निकलेगा। जिससे उसको लगभग 20% नुकसान का सामना करना पड़ेगा। वहीं गिरी हुई फसल में दाना हल्का होने के कारण भी फसल का भाव मंडी में कम रहेगा। जिससे उन पर दोहरी मार पड़ेगी जो बेहद ही पीड़ादायक है।बारिश के कारण 40% धान की फसल खराब :- जोगिंद्र सिंह गांव गढ़ी केवल के किसान जोगिंदर सिंह ने बताया कि उसके पास 5 एकड़ 1509 धान की फसल खड़ी है। बारिश से पहले जो लगभग पक चुकी थी लेकिन बारिश आने के कारण सारी फसल बिछ गई है व उसमे पानी खड़ा हो गया है। जिससे 40% फसल नष्ट हो गई है।जिले में 30 प्रतिशत फसल हुई नष्ट :- डिप्टी डायरेक्टरएग्रीकल्चर विभाग के डिप्टी डायरेक्टर पवन शर्मा के अनुसार जिले में अनुमानित 30% फसल संयुक्त रूप से खराब हुई है। उन्होंने कहा कि जिन किसानों को नुकसान हुआ है 72 घंटे के अंदर अपने नुकसान की रिपोर्ट कराए।उन्होंने कहा कि विभाग के सभी अधिकारी व संबंधित कर्मचारी अपने अपने क्षेत्र में फसल के नुकसान का सर्वे करने में जुटे हुए हैं। जिन किसानों ने योजना के तहत बीमा करवाया है उनको समय पर लाभ दिलवाने के लिए विभाग पूरी तरह प्रयासरत है।
बारिश से नुकसान 2 दिन में आए 710 आवेदन :- उप कृषि निदेशकगत 2 दिनों में ही 710 किसानों द्वारा अपनी फसल में नुकसान को लेकर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ लेने के लिए उप कृषि निदेशक कार्यालय में अपने आवेदन जमा करवाए गए हैं। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के परियोजना निदेशक रामनिवास ने बताया कि खरीफ सीजन में 23 सितंबर तक मात्र 345 आवेदन फसल नुकसान बारे जमा हुए थे, लेकिन बारिश के कारण 2 दिन में ही 710 आवेदन आ चुके ह ैंब और अभी और भी आवेदन आने की संभावना है।
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