फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Panchkula News ›   When Pakistani soldiers asked him to recite Kalma, he expressed his inability and was caught

Panchkula News: जब पाकिस्तानी सैनिकों ने कलमा पढ़ने को कहा तो उन्होंने असमर्थता जताई और पकड़े गए

Fri, 23 May 2025 01:30 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 23 May 2025 01:30 AM IST
विज्ञापन
When Pakistani soldiers asked him to recite Kalma, he expressed his inability and was caught
द गुरुकुल स्कूल के विद्या​र्थियों से बात करते सेवानिवृत्त वायुसेना पायलट जवाहर लाल भार्गव।
सेवानिवृत्त भारतीय वायुसेना पायलट जवाहर लाल भार्गव ने बच्चों से बातचीत में यादें सांझा की
विज्ञापन

माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। पाकिस्तान के एक गांव में जब पाकिस्तानी रेंजर्स से मुलाकात हुई और उन्होंने मुझसे कलमा पढ़ने को कहा तो मैंने असमर्थता जताई तो पहचान उजागर हो गई। इसके बाद पाकिस्तान में गिरफ्तार कर सेना के हवाले कर दिया गया। इसके बाद एक साल पाकिस्तान में कैद में बिताने के बाद 1 दिसंबर 1972 को भारत भेजा गया। यह बात सेवानिवृत्त भारतीय वायुसेना पायलट जवाहर लाल भार्गव ने सेक्टर-20 द गुरुकुल में बच्चों से बातचीत के दौरान बताई। उन्होंने कहा कि पहलगाम के बैसरन में हाल ही में हुई घटना, जहां आतंकवादियों ने पर्यटकों से गोलीबारी से पहले कलमा पढ़ने को कहा था। यह घटना याद करने से उनकी रीढ़ की हड्डी में सिहरन पैदा हो जाती है। इस मौके पर अपनी दिवंगत पत्नी अनु को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि वह उन्हें खुद से भी ज्यादा साहसी मानते हैं। विमान दुर्घटना की सूचना मिलने के बावजूद अनु अपने विश्वास में दृढ़ रहीं और सभी को भरोसा दिलाया कि भार्गव सुरक्षित लौट आएंगे।

उन्होंने विद्यार्थियों से बातचीत में बताया कि भारत-पाकिस्तान का युद्ध 1971 में लड़ा गया था। उन्होंने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान एक ऐसी ही घटना साझा की। उन्होंने बताया कि 5 दिसंबर 1971 एक युवा फ्लाइट लेफ्टिनेंट थे। राजस्थान के बाड़मेर वायुसेना स्टेशन से उड़ान भरते हुए उन्होंने एक हमले के मिशन पर एचएफ-24 मारुत विमान उड़ाया। हालांकि, सुबह करीब 9 बजे उनके विमान पर जमीनी गोलीबारी हुई, जिससे उन्हें बाहर निकलना पड़ा। जैसे ही वे नीचे कूदे, भार्गव का पैराशूट मुश्किल से खुला और उनका विमान सीमा के पाकिस्तानी हिस्से में रेत के टीले से टकरा गया। भार्गव ने जल्दी से अपने सरवाइवल पैक से जरूरी सामान निकाला और अपनी घड़ी को पाकिस्तान के मानक समय पर सेट कर दिया। इसके बाद उन्होंने पाकिस्तानी वायुसेना के पायलट मंसूर अली का वेश धारण करते हुए दुर्घटनास्थल से दूर मार्च करना शुरू कर दिया। कक्षा 10 के विद्यार्थी अंश ने उनसे पूछा कि ऐसे संकट की स्थिति में जेएल भार्गव को मंसूर अली का नाम कैसे सूझा। भार्गव ने हंसते हुए बताया कि वे सैफ अली खान के पिता महान मंसूर अली खान पटौदी के साथ क्रिकेट खेलते हुए बड़े हुए हैं। उस पल में यह पहला नाम था जो स्वाभाविक रूप से उनके दिमाग में आया। इसके बाद उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने पाकिस्तानी मुद्रा दिखाकर लोगों को यह विश्वास दिलाया कि वह वास्तव में एक पाकिस्तानी वायुसेना के पायलट हैं, जिसका विमान भारतीय सेना ने मार गिराया था। उल्लेखनीय रूप से पाकिस्तान के ग्रामीणों ने उनकी असली पहचान से अनजान रहते हुए उनकी सहायता की और घायल अवस्था के कारण उनके साथ दयालुता से व्यवहार किया। कक्षा 10 के मयंक ने पूछा कि पाकिस्तान में कारावास के दौरान कमोडोर भार्गव का रवैया क्या था, जिस पर उन्होंने बहादुरी से उत्तर देते हुए सकारात्मक और गर्वित रहा है। गुरुकुल स्कूल के निदेशक संजय थरेजा ने कहा कि युवा, संवेदनशील छात्रों को ऐसे लोगों के साथ बातचीत करने से उनका उत्साह बढ़ता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed