{"_id":"6ae4fef6a563093d1706b578","slug":"vikram-wadhwa-bail-plea-rejected-in-rs-504-crore-government-fund-scam-132-conversations-with-rishi-ribhav-revealed-panchkula-news-c-290-1-pkl1067-24833-2026-10-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"Panchkula News: रिभव ऋषि से 132 बार बात, 504 करोड़ के सरकारी फंड घोटाले में विक्रम वाधवा की जमानत खारिज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Panchkula News: रिभव ऋषि से 132 बार बात, 504 करोड़ के सरकारी फंड घोटाले में विक्रम वाधवा की जमानत खारिज
विज्ञापन
-सीबीआई जांच में 37.82 करोड़ रुपये मिलने और पांच संपत्तियों में 55 करोड़ रुपये निवेश करने का दावा
-सरकारी अधिकारियों से संपर्क कराने और फंड ट्रांसफर में मदद करने का आरोप
माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। हरियाणा के सरकारी विभागों से करीब 504 करोड़ रुपये फर्जी कंपनियों के जरिये ट्रांसफर करने के मामले में रियल एस्टेट कारोबारी विक्रम वाधवा को अदालत से झटका लगा है। सीबीआई की विशेष अदालत ने उसकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है। सीबीआई ने आरोपी पर मुख्य आरोपी रिभव ऋषि के लिए बिचौलिए की भूमिका निभाने और सरकारी अधिकारियों से संपर्क कराने का आरोप लगाया है।
जांच एजेंसी के अनुसार, हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों की राशि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में जमा थी। खातों और एफडीआर में अनियमितताएं सामने आने के बाद जांच शुरू हुई। आरोप है कि सरकारी खातों से करीब 504 करोड़ रुपये निकालकर फर्जी कंपनियों के माध्यम से दूसरी जगह ट्रांसफर किए गए।
37.82 करोड़ रुपये मिलने का दावा
सीबीआई का दावा है कि चंडीगढ़ निवासी विक्रम वाधवा को इस मामले में 37.82 करोड़ रुपये मिले। इसमें 4.57 करोड़ रुपये नकद और 33.25 करोड़ रुपये शेल कंपनियों के जरिये बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए। इसके अलावा पांच अचल संपत्तियों में करीब 55 करोड़ रुपये निवेश किए जाने की बात भी सामने आई है।
विज्ञापन
132 बार हुई फोन पर बातचीत
जांच में जून 2024 से जनवरी 2026 के बीच विक्रम वाधवा और रिभव ऋषि के बीच 132 बार फोन पर बातचीत होने का दावा किया गया है। एक अन्य आरोपी के मोबाइल में मिले नोट में भी वाधवा का नाम और रकम का उल्लेख मिला।
वहीं, बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोपी का बैंक या सरकारी विभागों से सीधा संबंध नहीं था और उसके लेनदेन सामान्य कारोबारी गतिविधियों का हिस्सा थे। हालांकि, अदालत ने मामले की गंभीरता और जांच में सामने आए तथ्यों को देखते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया।
विज्ञापन
-सरकारी अधिकारियों से संपर्क कराने और फंड ट्रांसफर में मदद करने का आरोप
माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। हरियाणा के सरकारी विभागों से करीब 504 करोड़ रुपये फर्जी कंपनियों के जरिये ट्रांसफर करने के मामले में रियल एस्टेट कारोबारी विक्रम वाधवा को अदालत से झटका लगा है। सीबीआई की विशेष अदालत ने उसकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है। सीबीआई ने आरोपी पर मुख्य आरोपी रिभव ऋषि के लिए बिचौलिए की भूमिका निभाने और सरकारी अधिकारियों से संपर्क कराने का आरोप लगाया है।
जांच एजेंसी के अनुसार, हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों की राशि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में जमा थी। खातों और एफडीआर में अनियमितताएं सामने आने के बाद जांच शुरू हुई। आरोप है कि सरकारी खातों से करीब 504 करोड़ रुपये निकालकर फर्जी कंपनियों के माध्यम से दूसरी जगह ट्रांसफर किए गए।
विज्ञापन
37.82 करोड़ रुपये मिलने का दावा
सीबीआई का दावा है कि चंडीगढ़ निवासी विक्रम वाधवा को इस मामले में 37.82 करोड़ रुपये मिले। इसमें 4.57 करोड़ रुपये नकद और 33.25 करोड़ रुपये शेल कंपनियों के जरिये बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए। इसके अलावा पांच अचल संपत्तियों में करीब 55 करोड़ रुपये निवेश किए जाने की बात भी सामने आई है।
विज्ञापन
132 बार हुई फोन पर बातचीत
जांच में जून 2024 से जनवरी 2026 के बीच विक्रम वाधवा और रिभव ऋषि के बीच 132 बार फोन पर बातचीत होने का दावा किया गया है। एक अन्य आरोपी के मोबाइल में मिले नोट में भी वाधवा का नाम और रकम का उल्लेख मिला।
वहीं, बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोपी का बैंक या सरकारी विभागों से सीधा संबंध नहीं था और उसके लेनदेन सामान्य कारोबारी गतिविधियों का हिस्सा थे। हालांकि, अदालत ने मामले की गंभीरता और जांच में सामने आए तथ्यों को देखते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया।