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Traders angry over bringing canned, marked food items under GST
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चंडीगढ़। डिब्बा बंद, मार्का और अन्य खाद्य पदार्थों को जीएसटी के दायरे में लाने की सिफारिश से खाद्यान्न व्यापारी निराश हैं। उन्हें आशंका है कि आम सामान की कीमत पर बड़े ब्रांड का कारोबार बढ़ेगा। अब तक ब्रांडेड नहीं होने पर विशेष खाद्य पदार्थों, अनाज आदि को जीएसटी से छूट दी गई थी। जीएसटी परिषद के निर्णय से प्री-पैक, प्री-लेबल दही, लस्सी, पनीर, भुजिया, नमकीन, बिस्किट, दालें, चीनी, मक्खन और दूध पर जीएसटी लगने से देश भर की 6500 से अधिक अनाज मंडियों में खाद्यान्न व्यापारियों के व्यापार में बहुत बड़ी अड़चन आएगी।
हरियाणा व्यापार मंडल ने इसे देखते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर इसमें राहत देने की मांग की है। मंडल के प्रदेशाध्यक्ष विजय लक्ष्मी चंद गुप्ता ने पत्र में कहा है कि निश्चित रूप से जीएसटी कर संग्रह में वृद्धि होनी चाहिए, लेकिन आम लोगों की वस्तुओं को कर स्लैब में लाने के बजाय कर का दायरा बड़ा करने की जरूरत है। जो लोग अभी तक कर दायरे में नहीं आए हैं, उनको भी कर दायरे में लाया जाए। केंद्र एवं राज्य सरकारों का इससे राजस्व और बढ़ेगा। आजादी से अब तक खाद्यान्न पर कभी किसी तरह का कर नहीं था।
वर्ष 2017 में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इन जरूरी वस्तुओं को कर से बाहर रखा था। इसके मद्देनजर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से आग्रह है कि प्री पैक्ड एवं प्री-लेबल वस्तुओं को पूर्व की भांति जीएसटी के दायरे से बाहर रखा जाएगा। देश के सभी राज्यों में छोटे निर्माताओं का अपना स्थानीय मार्का होता है, ये देश की 85 प्रतिशत आबादी की मांग को पूरा करते हैं। इन वस्तुओं को जीएसटी के दायरे में लाने से जहां छोटे निर्माताओं एवं व्यापारियों पर कर का बोझ बढ़ेगा, वहीं आम लोगों को मिलने वाली बुनियादी वस्तुएं भी महंगी हो जाएंगी।
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हरियाणा व्यापार मंडल ने इसे देखते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर इसमें राहत देने की मांग की है। मंडल के प्रदेशाध्यक्ष विजय लक्ष्मी चंद गुप्ता ने पत्र में कहा है कि निश्चित रूप से जीएसटी कर संग्रह में वृद्धि होनी चाहिए, लेकिन आम लोगों की वस्तुओं को कर स्लैब में लाने के बजाय कर का दायरा बड़ा करने की जरूरत है। जो लोग अभी तक कर दायरे में नहीं आए हैं, उनको भी कर दायरे में लाया जाए। केंद्र एवं राज्य सरकारों का इससे राजस्व और बढ़ेगा। आजादी से अब तक खाद्यान्न पर कभी किसी तरह का कर नहीं था।
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वर्ष 2017 में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इन जरूरी वस्तुओं को कर से बाहर रखा था। इसके मद्देनजर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से आग्रह है कि प्री पैक्ड एवं प्री-लेबल वस्तुओं को पूर्व की भांति जीएसटी के दायरे से बाहर रखा जाएगा। देश के सभी राज्यों में छोटे निर्माताओं का अपना स्थानीय मार्का होता है, ये देश की 85 प्रतिशत आबादी की मांग को पूरा करते हैं। इन वस्तुओं को जीएसटी के दायरे में लाने से जहां छोटे निर्माताओं एवं व्यापारियों पर कर का बोझ बढ़ेगा, वहीं आम लोगों को मिलने वाली बुनियादी वस्तुएं भी महंगी हो जाएंगी।
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