Punjab: दिव्यांग को नशा तस्करी में बनाया आरोपी, मौके से फरार बताया, अब पुलिस को देने पड़ेंगे डेढ़ लाख रुपये
हाईकोर्ट ने कहा कि बेकसूर याचिकाकर्ता को शराब तस्करी मामले में आरोपी बना दिया, जिससे वह अदालत के चक्कर लगाने को मजबूर हुआ। याचिका दाखिल करते हुए कुलविंदर सिंह ने हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत की मांग की थी।
विस्तार
शराब की तस्करी के मामले में दिव्यांग व्यक्ति जो पैरों पर खड़ा नहीं हो सकता उसे मौके से फरार दिखाना पंजाब पुलिस को भारी पड़ गया। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने इस उत्पीड़न के लिए पंजाब पुलिस को कड़ी फटकार लगाते हुए पीड़ित को मुआवजे के तौर पर डेढ़ लाख रुपये देने का आदेश दिया है। पहले यह राशि सरकारी देगी और बाद में दोषी पाए जाने वाले अफसर से यह वसूली जा सकेगी।
हाईकोर्ट ने कहा कि बेकसूर याचिकाकर्ता को शराब तस्करी मामले में आरोपी बना दिया, जिससे वह अदालत के चक्कर लगाने को मजबूर हुआ। याचिका दाखिल करते हुए कुलविंदर सिंह ने हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत की मांग की थी।
याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट को बताया कि पठानकोट पुलिस ने नाका लगाकर अवैध शराब बरामद की थी। इस कार्रवाई में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया था और उनके बयान के आधार पर याची को आरोपी बना दिया। पुलिस के अनुसार याचिकाकर्ता मौके से फरार हो गया था। याची ने बताया कि वह पोलियो के कारण 80 प्रतिशत दिव्यांग है और अपने पैरों पर खड़ा भी नहीं हो सकता है। चलने के लिए वह व्हील चेयर और अटेंडेंट का मोहताज है।
इस मामले में हाईकोर्ट के आदेश पर एसएचओ मंजीत कौर और एएसआई सरताज सिंह कोर्ट में पेश हुए और कहा कि यह पूरा मामला गलत पहचान का है। असल में याची का भाई इस मामले में आरोपी था और इस जानकारी के बाद डीडीआर दर्ज कर याची को बेकसूर बता दिया गया था। इस जानकारी के साथ ही दोनों ने हाईकोर्ट से बिना शर्त माफी भी मांगी। हाईकोर्ट ने कहा कि माफी केवल अपने किए गए कार्यों के परिणाम से बचने का प्रयास मात्र है।
अधिकारियों पर लटकी कार्रवाई की तलवार
हाईकोर्ट ने पठानकोट के एसएसपी को जांच का आदेश दिया है कि क्या यह मामला गलत पहचान का है। यदि हां तो जिला अदालत में जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान इस बारे में जानकारी पुलिस ने क्यों नहीं दी और इस सब के लिए दोषी कौन है। इस बारे में उन्हें पठानकोट के जिला जज को रिपोर्ट देनी होगी। पठानकोट के जिला जज यदि उपयुक्त समझें तो दोषी पुलिस अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश जारी करें। ऐसे में अब जांच अधिकारी सहित एसएचओ और एएसआई पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है।
दोषियों से होगी राशि की वसूली
पुलिस की चूक के चलते याची को पहले जिला अदालत और फिर हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल करनी पड़ी। इसके लिए हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को मुआवजे के तौर पर याची को डेढ़ लाख रुपये देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पहले यह राशि सरकारी देगी और बाद में इस मामले में दोषी पाए जाने वाले अफसर से यह राशि वसूली जा सकेगी।