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जो गांव है ही नहीं उसे जारी कर दिया गया योजनाओं का फंड, हाईकोर्ट का पंजाब को नोटिस
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चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में अपनी तरह का अलग ही मामला पहुंचा है जिसमें पंजाब सरकार ने ऐसे गांव की पंचायत को विभिन्न योजनाओं के फंड जारी किए हैं जो सरकारी रिकॉर्ड में है ही नहीं। इसके खिलाफ दाखिल याचिका पर हाईकोर्ट ने अब पंजाब की मुख्य सचिव सहित पंचायत विभाग, जालंधर के डीसी व अन्य को 7 सितंबर के लिए नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
नूरमहल निवासी पूरन सिंह और गुरनाम सिंह ने सीनियर एडवोकेट बलतेज सिद्धू के माध्यम से याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया कि दिव्य ग्राम नाम का कोई गांव ही नहीं है और ऐसा कोई गांव सरकार के राजस्व दस्तावेज में भी मौजूद नहीं है। इसके बावजूद इस गांव की पंचायत के नाम पर पंजाब इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड के 13वें और 14वें वित्त आयोग, एमपी लैड, मनरेगा आदि के फंड जारी किए जा रहे हैं। याची ने बताया कि इस बारे में तथ्य जुटाने के लिए उन्होंने पीएसपीसीएल से आरटीआई में जानकारी मांगी और पूछा कि इस गांव में कितने बिजली के कनेक्शन दिए गए हैं। जवाब में पीएसपीसीएल ने बताया कि उनकी ओर से यहां न तो कोई बिजली का कनेक्शन जारी किया गया है और न ही कोई ट्रांसफॉर्मर लगाने की जानकारी है।
इसके बाद तहसीलदार से इस गांव के बारे में जानकारी मांगी गई तो, तहसीलदार ने जवाब में बताया कि ऐसा कोई गांव सरकार के राजस्व दस्तावेज में है ही नहीं। बीडीपीओ से जानकारी मिली कि इस गांव को 2015-16 से 2019-20 के बीच पंजाब इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड के 13वें और 14वें वित्त आयोग, एमपी लैड, मनरेगा आदि की ग्रांट जारी हुई हैं। इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने पिछले साल 5 मार्च को लीगल नोटिस भेज कार्रवाई की मांग की थी जिस पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। अब इस मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर हाईकोर्ट से गुहार लगाई गई है।
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नूरमहल निवासी पूरन सिंह और गुरनाम सिंह ने सीनियर एडवोकेट बलतेज सिद्धू के माध्यम से याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया कि दिव्य ग्राम नाम का कोई गांव ही नहीं है और ऐसा कोई गांव सरकार के राजस्व दस्तावेज में भी मौजूद नहीं है। इसके बावजूद इस गांव की पंचायत के नाम पर पंजाब इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड के 13वें और 14वें वित्त आयोग, एमपी लैड, मनरेगा आदि के फंड जारी किए जा रहे हैं। याची ने बताया कि इस बारे में तथ्य जुटाने के लिए उन्होंने पीएसपीसीएल से आरटीआई में जानकारी मांगी और पूछा कि इस गांव में कितने बिजली के कनेक्शन दिए गए हैं। जवाब में पीएसपीसीएल ने बताया कि उनकी ओर से यहां न तो कोई बिजली का कनेक्शन जारी किया गया है और न ही कोई ट्रांसफॉर्मर लगाने की जानकारी है।
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इसके बाद तहसीलदार से इस गांव के बारे में जानकारी मांगी गई तो, तहसीलदार ने जवाब में बताया कि ऐसा कोई गांव सरकार के राजस्व दस्तावेज में है ही नहीं। बीडीपीओ से जानकारी मिली कि इस गांव को 2015-16 से 2019-20 के बीच पंजाब इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड के 13वें और 14वें वित्त आयोग, एमपी लैड, मनरेगा आदि की ग्रांट जारी हुई हैं। इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने पिछले साल 5 मार्च को लीगल नोटिस भेज कार्रवाई की मांग की थी जिस पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। अब इस मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर हाईकोर्ट से गुहार लगाई गई है।
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