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Panchkula News: चाकू मारकर मोबाइल लूटने के चार साल पुराने मामले में किशोर बरी
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अदालत में पहचान नहीं सके पीड़ित और चश्मदीद, सबूतों के अभाव में मिला संदेह का लाभ
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। सेक्टर-20 में मजदूर को चाकू मारकर मोबाइल और 500 रुपये लूटने के चार साल पुराने मामले में चिल्ड्रन्स कोर्ट ने आरोपी किशोर को बरी कर दिया है। अदालत ने सबूतों के अभाव और चश्मदीद गवाहों द्वारा आरोपी की पहचान न कर पाने के आधार पर किशोर को संदेह का लाभ दिया।
मामला 1 अगस्त 2021 का है। बिहार निवासी संजीव कुमार अपने साथी केदार शर्मा के साथ काम खत्म कर ढकोली लौट रहा था। सेक्टर-20 के पास दो युवकों ने हथियार के बल पर उन्हें रोक लिया और विरोध करने पर संजीव की पीठ पर चाकू से वार कर मोबाइल व नकदी लूट ली थी।
पहचान और बरामदगी पर उठे सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान पीड़ित और चश्मदीद गवाह दोनों ही अदालत में आरोपी की पहचान नहीं कर सके। गवाहों ने तर्क दिया कि घटना के समय अंधेरा था और चार साल का लंबा समय बीत जाने के कारण वे पहचान करने में असमर्थ हैं। इसके अलावा पुलिस द्वारा किशोर से लोहे की रॉड बरामद करने के दावे पर भी अदालत ने पाया कि जब्ती के समय कोई स्वतंत्र गवाह मौजूद नहीं था। अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में विफल रहा, जिसके चलते अदालत ने आरोपी को बरी करने का फैसला सुनाया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। सेक्टर-20 में मजदूर को चाकू मारकर मोबाइल और 500 रुपये लूटने के चार साल पुराने मामले में चिल्ड्रन्स कोर्ट ने आरोपी किशोर को बरी कर दिया है। अदालत ने सबूतों के अभाव और चश्मदीद गवाहों द्वारा आरोपी की पहचान न कर पाने के आधार पर किशोर को संदेह का लाभ दिया।
मामला 1 अगस्त 2021 का है। बिहार निवासी संजीव कुमार अपने साथी केदार शर्मा के साथ काम खत्म कर ढकोली लौट रहा था। सेक्टर-20 के पास दो युवकों ने हथियार के बल पर उन्हें रोक लिया और विरोध करने पर संजीव की पीठ पर चाकू से वार कर मोबाइल व नकदी लूट ली थी।
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पहचान और बरामदगी पर उठे सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान पीड़ित और चश्मदीद गवाह दोनों ही अदालत में आरोपी की पहचान नहीं कर सके। गवाहों ने तर्क दिया कि घटना के समय अंधेरा था और चार साल का लंबा समय बीत जाने के कारण वे पहचान करने में असमर्थ हैं। इसके अलावा पुलिस द्वारा किशोर से लोहे की रॉड बरामद करने के दावे पर भी अदालत ने पाया कि जब्ती के समय कोई स्वतंत्र गवाह मौजूद नहीं था। अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में विफल रहा, जिसके चलते अदालत ने आरोपी को बरी करने का फैसला सुनाया।
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