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SYL: कैप्टन अमरिंदर बोले- राष्ट्रीय सुरक्षा भंग कर सकता है एसवाईएल मुद्दा, नहीं दे सकते पानी
Wed, 19 Aug 2020 09:54 AM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Wed, 19 Aug 2020 09:54 AM IST
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कैप्टन अमरिंदर सिंह
केंद्र सरकार को सतलुज यमुना लिंक नहर (एसवाईएल) के मुद्दे पर सचेत रहने की अपील करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मंगलवार को कहा कि यह मुद्दा देश की सुरक्षा को भंग करने की क्षमता रखता है। मुख्यमंत्री ने तय समय में पानी की उपलब्धता का ताजा मूल्यांकन करने के लिए ट्रिब्यूनल की जरूरत दोहराते हुए मांग की कि उनके राज्य को यमुना नदी सहित उपलब्ध कुल स्रोतों में से पूरा हिस्सा मिलना चाहिए।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के साथ वीडियो कांफ्रेंस मीटिंग में कैप्टन ने केंद्र से कहा, ‘आप इस मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से देखें। अगर आपने एसवाईएल के साथ आगे बढ़ने का फैसला किया तो पंजाब जलेगा और यह राष्ट्रीय समस्या बन जाएगी, जिससे हरियाणा और राजस्थान भी प्रभावित होंगे।’ मुख्यमंत्री ने बाद में मीटिंग को ‘सकारात्मक और दोस्ताना’ माहौल में हुई बताते हुए कहा कि केंद्रीय मंत्री पंजाब के नजरिए को समझते हैं।
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पाकिस्तान द्वारा राज्य में गड़बड़ी फैलाने और प्रतिबंधित सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) संस्था द्वारा अलगाववादी लहर को फिर से शुरू करने की कोशिशों की तरफ इशारा करते हुए कैप्टन ने कहा कि पंजाब हर तरफ से खतरे में है। उन्होंने चेतावनी दी कि पानी का मुद्दा राज्य को और अस्थिर कर देगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब को यमुना के पानी पर अधिकार था, जो उनको राज्य के 1966 में हुए विभाजन के समय हरियाणा के साथ 60:40 अनुपात के बंटवारे के अनुसार नहीं मिला।
उन्होंने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल के साथ टेबल पर बैठकर इस भावनात्मक मुद्दे पर चर्चा करने के लिए अपनी इच्छा भी जाहिर की। उन्होंने सुझाव दिया कि एसवाईएल नहर/रावी-ब्यास पानी के मुद्दे पर चर्चा के लिए राजस्थान को भी शामिल किया जाए, क्योंकि वह भी एक हिस्सेदार है। मीटिंग में फैसला किया गया कि पंजाब और हरियाणा के मुख्यमंत्री इस मुद्दे पर आगे की चर्चा के लिए चंडीगढ़ में मिलेंगे, जिसकी तारीख बाद में तय की जाएगी। इसके बाद ही केंद्रीय मंत्री के पास जाएंगे।
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केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के साथ वीडियो कांफ्रेंस मीटिंग में कैप्टन ने केंद्र से कहा, ‘आप इस मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से देखें। अगर आपने एसवाईएल के साथ आगे बढ़ने का फैसला किया तो पंजाब जलेगा और यह राष्ट्रीय समस्या बन जाएगी, जिससे हरियाणा और राजस्थान भी प्रभावित होंगे।’ मुख्यमंत्री ने बाद में मीटिंग को ‘सकारात्मक और दोस्ताना’ माहौल में हुई बताते हुए कहा कि केंद्रीय मंत्री पंजाब के नजरिए को समझते हैं।
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पाकिस्तान द्वारा राज्य में गड़बड़ी फैलाने और प्रतिबंधित सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) संस्था द्वारा अलगाववादी लहर को फिर से शुरू करने की कोशिशों की तरफ इशारा करते हुए कैप्टन ने कहा कि पंजाब हर तरफ से खतरे में है। उन्होंने चेतावनी दी कि पानी का मुद्दा राज्य को और अस्थिर कर देगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब को यमुना के पानी पर अधिकार था, जो उनको राज्य के 1966 में हुए विभाजन के समय हरियाणा के साथ 60:40 अनुपात के बंटवारे के अनुसार नहीं मिला।
उन्होंने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल के साथ टेबल पर बैठकर इस भावनात्मक मुद्दे पर चर्चा करने के लिए अपनी इच्छा भी जाहिर की। उन्होंने सुझाव दिया कि एसवाईएल नहर/रावी-ब्यास पानी के मुद्दे पर चर्चा के लिए राजस्थान को भी शामिल किया जाए, क्योंकि वह भी एक हिस्सेदार है। मीटिंग में फैसला किया गया कि पंजाब और हरियाणा के मुख्यमंत्री इस मुद्दे पर आगे की चर्चा के लिए चंडीगढ़ में मिलेंगे, जिसकी तारीख बाद में तय की जाएगी। इसके बाद ही केंद्रीय मंत्री के पास जाएंगे।
कैप्टन ने बैठक में स्पष्ट किया, नहीं दे सकते हरियाणा को पानी
वीडियो कांफ्रेंस में पंजाब का पक्ष रखते हुए कैप्टन ने कहा कि पानी की उपलब्धता का सही अदालती आदेश हासिल करने के लिए यह जरूरी है कि ट्रिब्यूनल बनाया जाए। इराडी कमीशन द्वारा प्रस्तावित पानी का बंटवारा 40 साल पुराना है, जबकि अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार स्थिति का पता लगाने के लिए हर 25 साल बाद समीक्षा जरूरी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वास्तव में अभी तक पंजाब के पानी संबंधी कोई ठोस फैसला और तकनीकी मूल्यांकन उपलब्ध नहीं है।
बीबीएमबी के मुताबिक रावी-ब्यास के पानी की उपलब्धता सन 1981 में अंदाजन 17.17 एमएएफ से कम होकर 13.38 एमएएफ रह गई है। गैर-बेसिन राज्य होने के बावजूद और कम आबादी होने के साथ-साथ कम काश्तकारी वाले जमीनी क्षेत्र होते हुए भी हरियाणा के लिए नदी के पानी की कुल उपलब्धता पंजाब के 12.42 एमएएफ के मुकाबले 12.48 एमएएफ रही है। उन्होंने बताया कि पानी के ट्रांस-बेसिन हस्तांतरण को सिर्फ अतिरिक्त उपलब्धता के आधार पर ही आज्ञा दी जा सकती है लेकिन आज पंजाब एक कम पानी वाला राज्य है, ऐसे में हरियाणा को पानी हस्तांतरित करने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता।
कैप्टन ने कहा कि पंजाब के हितों की रक्षा के लिए और राज्य में उठती हिंसक प्रदर्शनों की हवा को रोकने के लिए उन्होंने 2004 में किए पानी के सभी समझौते वापस लेने का ठोस फैसला लिया था, ताकि पंजाब को जलने से बचाया जा सके। उसके बाद भी स्थिति और बिगड़ गई क्योंकि राज्य के 128 ब्लॉकों में से 109 को अधिकृत तौर पर ‘डार्क जोन’ घोषित कर दिया गया है।
पिघल रहे ग्लेशियरों का जिक्र करते हुए कैप्टन ने केंद्र सरकार को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को ध्यान में रखने की अपील की। कैप्टन ने चेतावनी देते हुए कहा कि चीन द्वारा अपने क्षेत्र में डैम बनाने से स्थिति और बदतर होने की आशंका है, इससे सतलुज नदी में भी पानी की कमी आ जाएगी। उन्होंने कहा कि अगर हमारे पास यह होता तो मुझे पानी देने में कोई समस्या नहीं थी। दक्षिणी हरियाणा के कुछ क्षेत्र पहले की पटियाला एस्टेट का हिस्सा रहे हैं और उनको निजी तौर पर इस क्षेत्र के साथ विशेष प्यार है।
केंद्र एसवाईएल बनाने के पक्ष में : शेखावत
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का बैठक में विचार था कि एसवाईएल को मुकम्मल किया जा सकता है और सिंचाई के लिए तैयार रखा जा सकता है। वहीं पानी के बंटवारे पर विचार-विमर्श जारी रहे और अंतिम फार्मूले का फैसला बाद में लिया जाए।
बीबीएमबी के मुताबिक रावी-ब्यास के पानी की उपलब्धता सन 1981 में अंदाजन 17.17 एमएएफ से कम होकर 13.38 एमएएफ रह गई है। गैर-बेसिन राज्य होने के बावजूद और कम आबादी होने के साथ-साथ कम काश्तकारी वाले जमीनी क्षेत्र होते हुए भी हरियाणा के लिए नदी के पानी की कुल उपलब्धता पंजाब के 12.42 एमएएफ के मुकाबले 12.48 एमएएफ रही है। उन्होंने बताया कि पानी के ट्रांस-बेसिन हस्तांतरण को सिर्फ अतिरिक्त उपलब्धता के आधार पर ही आज्ञा दी जा सकती है लेकिन आज पंजाब एक कम पानी वाला राज्य है, ऐसे में हरियाणा को पानी हस्तांतरित करने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता।
कैप्टन ने कहा कि पंजाब के हितों की रक्षा के लिए और राज्य में उठती हिंसक प्रदर्शनों की हवा को रोकने के लिए उन्होंने 2004 में किए पानी के सभी समझौते वापस लेने का ठोस फैसला लिया था, ताकि पंजाब को जलने से बचाया जा सके। उसके बाद भी स्थिति और बिगड़ गई क्योंकि राज्य के 128 ब्लॉकों में से 109 को अधिकृत तौर पर ‘डार्क जोन’ घोषित कर दिया गया है।
पिघल रहे ग्लेशियरों का जिक्र करते हुए कैप्टन ने केंद्र सरकार को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को ध्यान में रखने की अपील की। कैप्टन ने चेतावनी देते हुए कहा कि चीन द्वारा अपने क्षेत्र में डैम बनाने से स्थिति और बदतर होने की आशंका है, इससे सतलुज नदी में भी पानी की कमी आ जाएगी। उन्होंने कहा कि अगर हमारे पास यह होता तो मुझे पानी देने में कोई समस्या नहीं थी। दक्षिणी हरियाणा के कुछ क्षेत्र पहले की पटियाला एस्टेट का हिस्सा रहे हैं और उनको निजी तौर पर इस क्षेत्र के साथ विशेष प्यार है।
केंद्र एसवाईएल बनाने के पक्ष में : शेखावत
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का बैठक में विचार था कि एसवाईएल को मुकम्मल किया जा सकता है और सिंचाई के लिए तैयार रखा जा सकता है। वहीं पानी के बंटवारे पर विचार-विमर्श जारी रहे और अंतिम फार्मूले का फैसला बाद में लिया जाए।
पंजाब जलने लगेगा
पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने सतलज-यमुना संपर्क(एसवाईएल) नहर का विरोध करते हुए मंगलवार को कहा कि अगर राज्य को हरियाणा के साथ पानी साझा करने के लिए कहा जाता है तो पंजाब जलने लगेगा। हरियाणा के अपने समकक्ष मनोहर लाल खट्टर और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के साथ एक बैठक के दौरान सिंह ने एसवाईएल को भावनात्मक मुद्दा बताते हुए कहा कि इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता है।
पिछले महीने उच्चतम न्यायालय ने दोनों ही राज्यों के मुख्यमंत्रियों को निर्देश दिया था कि वे इस नहर के निर्माण कार्य को पूरा करने के संबंध में चर्चा करें। इसी निर्देश के मद्देनजर यह बैठक हुई है। एसवाईएल का निर्माण कार्य कई दशक से चल रहा है। हरियाणा और राजस्थान के साथ पंजाब पानी साझा नहीं करना चाहता है। राज्य का कहना है कि उसके खुद के इस्तेमाल के बाद साझा करने के लिए पानी नहीं बचेगा।
पंजाब सरकार के एक बयान के अनुसार सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंस से हो रही बातचीत के दौरान शेखावत से कहा कि आप को इस मुद्दे को राष्ट्रीय सुरक्षा के नजर से भी देखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अगर आप एसवाईएल के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं तो पंजाब जलेगा और यह राष्ट्रीय समस्या होगी तथा हरियाणा और राजस्थान को भी इसका प्रभाव झेलना होगा।
खट्टर और शेखावत दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेंस से जुड़े थे। हरियाणा के मुख्यमंत्री ने बाद में संवाददाताओं को बताया कि दोनों मुख्यमंत्री इस मुद्दे पर दोबारा चर्चा करेंगे।
पिछले महीने उच्चतम न्यायालय ने दोनों ही राज्यों के मुख्यमंत्रियों को निर्देश दिया था कि वे इस नहर के निर्माण कार्य को पूरा करने के संबंध में चर्चा करें। इसी निर्देश के मद्देनजर यह बैठक हुई है। एसवाईएल का निर्माण कार्य कई दशक से चल रहा है। हरियाणा और राजस्थान के साथ पंजाब पानी साझा नहीं करना चाहता है। राज्य का कहना है कि उसके खुद के इस्तेमाल के बाद साझा करने के लिए पानी नहीं बचेगा।
पंजाब सरकार के एक बयान के अनुसार सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंस से हो रही बातचीत के दौरान शेखावत से कहा कि आप को इस मुद्दे को राष्ट्रीय सुरक्षा के नजर से भी देखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अगर आप एसवाईएल के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं तो पंजाब जलेगा और यह राष्ट्रीय समस्या होगी तथा हरियाणा और राजस्थान को भी इसका प्रभाव झेलना होगा।
खट्टर और शेखावत दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेंस से जुड़े थे। हरियाणा के मुख्यमंत्री ने बाद में संवाददाताओं को बताया कि दोनों मुख्यमंत्री इस मुद्दे पर दोबारा चर्चा करेंगे।