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गांवों में पराली तो शहर में कचरे का धुआं, लोगों का घुटने लगा दम
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पंचकूला। पिछले दो दिन से शहर का औसत एक्यूूआई लगातार 200 से पार चल रहा है। अधिकतम एक्यूआई 350 तक पहुंच चुका है। ऐसा हो भी क्यूं नहीं, शहर में कूड़ा और खेतों में पराली जलाई जा रही है। धुएं के उठता गुबार सीधा लोगों की सांसों पर हमला कर रहा है। प्रदूषण का स्तर बढ़ने के कारण दमा ओर सांस की बीमारी से पीड़ित लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं, वहीं सामान्य लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी ओर इन हालातों को रोकने की जिम्मेवारी जिन अधिकारियों की है, वे कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। यही कारण है कि पंचकूला के हालात दिल्ली की तरह ही खराब होने लगे हैं।
धान की फसल काटने के बाद किसान बचे हुए अवशेष में आग लगा देते हैं। सोमवार को गांव कोट में धान के अवशेषों में आग लगाई गई। वहीं दूसरी ओर शहर के सेक्टर-16 की डिवाइडिंग रोड, सेक्टर-10 की डिवाइडिंग रोड, सेक्टर-20 और निफ्ट के पास कूड़े के ढेर में आग लगा दी गई। वहां पर कई पेड़ भी आग लगने के कारण झुलस गए। हालांकि अधिकारियों ने जानकारी नहीं होने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया। सोमवार को शहर का औसत एक्यूआई 225 और अधिकतम 393 रहा। मंगलवार को औसत एक्यूआई 212 और अधिकतम 357 रहा।
कार्रवाई के सिर्फ दावे होते हैं
खुले में कचरे को या खेतों में फसल अवशेषों को आग लगाना कानूनी अपराध है। इसकी निगरानी के लिए अधिकारियों को जिम्मेवारी भी दी जाती है। जिम्मेवार अधिकारियों की ओर से ऐसा करने पर कार्रवाई करने और मुकदमे दर्ज करवाने के दावे किए जाते हैं। मगर हकीकत यह है कि न कोई निगरानी की जाती है और न ही कार्रवाई होती है।
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कहीं भी डाल देते हैं कचरा
शहर में लगाए गए सफाई कर्मचारी शहर से कचरा उठाने के बाद कहीं भी एक जगह एकत्र कर देते हैं। हर रोज कचरे के छोटे-छोटे ढेर शहर में कई जगह दिखाई देते हैं। सोमवार को इस कचरे में आग भी लगाई गई। ये आग सफाई कर्मचारियों ने लगाई या किसी और ने इस बारे में तो नहीं कहा जा सकता है, मगर यह साफ है कि नगर निगम की ओर से इसकी कोई निगरानी नहीं की जा रही है।
कचरे को खुले में जलाना कानूनन अपराध है। इसकी जांच कराई जाएगी और ऐसा करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। अधिकारियों को भी इस पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए टीम का गठन किया जाएगा। - कुलभूषण गोयल, मेयर, पंचकूला
हेल्थ विशेषज्ञ, डॉ. मनकीरत सिंह
ये होते हैं प्रदूषण बढ़ने के नुकसान
- प्रदूषण बढ़ने के कारण सांस और दमा संबंधी मरीजों की हालत खराब हो जाती है।
- सामान्य इंसान को भी परेशानी तो होती है, मगर जल्दी उसकी हालत नहीं बिगड़ती।
- जिन लोगों को एलर्जी है, उनको भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
- फेफड़ों में इंफेक्शन होने का डर रहता है।
ये बरतें सावधानी
- प्रदूषण का स्तर अगर ज्यादा है तो बहुत जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलें।
- घर से बाहर निकलते समय मास्क का प्रयोग करें। मास्क फिल्टर वाला हो तो और भी बेहतर है।
- घर में एयर प्योरिफायर का उपयोग भी किया जा सकता है।
- अगर तबियत बिगड़ती है तो तुरंत चिकित्सक के पास पहुंचें।
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धान की फसल काटने के बाद किसान बचे हुए अवशेष में आग लगा देते हैं। सोमवार को गांव कोट में धान के अवशेषों में आग लगाई गई। वहीं दूसरी ओर शहर के सेक्टर-16 की डिवाइडिंग रोड, सेक्टर-10 की डिवाइडिंग रोड, सेक्टर-20 और निफ्ट के पास कूड़े के ढेर में आग लगा दी गई। वहां पर कई पेड़ भी आग लगने के कारण झुलस गए। हालांकि अधिकारियों ने जानकारी नहीं होने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया। सोमवार को शहर का औसत एक्यूआई 225 और अधिकतम 393 रहा। मंगलवार को औसत एक्यूआई 212 और अधिकतम 357 रहा।
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कार्रवाई के सिर्फ दावे होते हैं
खुले में कचरे को या खेतों में फसल अवशेषों को आग लगाना कानूनी अपराध है। इसकी निगरानी के लिए अधिकारियों को जिम्मेवारी भी दी जाती है। जिम्मेवार अधिकारियों की ओर से ऐसा करने पर कार्रवाई करने और मुकदमे दर्ज करवाने के दावे किए जाते हैं। मगर हकीकत यह है कि न कोई निगरानी की जाती है और न ही कार्रवाई होती है।
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कहीं भी डाल देते हैं कचरा
शहर में लगाए गए सफाई कर्मचारी शहर से कचरा उठाने के बाद कहीं भी एक जगह एकत्र कर देते हैं। हर रोज कचरे के छोटे-छोटे ढेर शहर में कई जगह दिखाई देते हैं। सोमवार को इस कचरे में आग भी लगाई गई। ये आग सफाई कर्मचारियों ने लगाई या किसी और ने इस बारे में तो नहीं कहा जा सकता है, मगर यह साफ है कि नगर निगम की ओर से इसकी कोई निगरानी नहीं की जा रही है।
कचरे को खुले में जलाना कानूनन अपराध है। इसकी जांच कराई जाएगी और ऐसा करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। अधिकारियों को भी इस पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए टीम का गठन किया जाएगा। - कुलभूषण गोयल, मेयर, पंचकूला
हेल्थ विशेषज्ञ, डॉ. मनकीरत सिंह
ये होते हैं प्रदूषण बढ़ने के नुकसान
- प्रदूषण बढ़ने के कारण सांस और दमा संबंधी मरीजों की हालत खराब हो जाती है।
- सामान्य इंसान को भी परेशानी तो होती है, मगर जल्दी उसकी हालत नहीं बिगड़ती।
- जिन लोगों को एलर्जी है, उनको भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
- फेफड़ों में इंफेक्शन होने का डर रहता है।
ये बरतें सावधानी
- प्रदूषण का स्तर अगर ज्यादा है तो बहुत जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलें।
- घर से बाहर निकलते समय मास्क का प्रयोग करें। मास्क फिल्टर वाला हो तो और भी बेहतर है।
- घर में एयर प्योरिफायर का उपयोग भी किया जा सकता है।
- अगर तबियत बिगड़ती है तो तुरंत चिकित्सक के पास पहुंचें।