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हालात : वर्ल्ड क्लास स्टेशन कागजों में, धरातल में समस्याओं का अंबार
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पंचकूला। वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन के धरातल पर आने से पहले पंचकूला के लोग परेशान हैं। पंचकूला साइड इस स्टेशन का ज्यादा विस्तार
होना है, लेकिन 14 साल से यह प्रोजेक्ट कागजों में केवल टेंड प्रक्रिया तक पहुंचा है। नेताओं और जनप्रतिनिधियों के आश्वासन के बाद भी ढाई साल से लोग रेलवे स्टेशन और आसपास के परिसर में सुविधाओं की बाट जोह रहे हैं, लेकिन हालात बदतर हैं। प्रस्तावित परियोजना में इसका विस्तार पंचकूला की तरफ 493.4 एकड़ में होना है। इसका लाभ सिर्फ पंचकूला को ही नहीं बल्कि चंडीगढ़ के मनीमाजरा और मौलीजागरां के लोगों को भी मिलना है। यह प्रोजेक्ट धरातल पर कब तक उतरेगा, इसकी जानकारी डिवीजनल अधिकारियों को भी नहीं है। बता दें कि नगर निगम चुनाव के दौरान भाजपा ने रेलवे स्टेशन के पंचकूला की तरफ फूड कोर्ट, बेहतर पार्किंग, कनेक्टिविटी का दाव किया था।
एक भी फूड स्टॉल नहीं
रेलवे स्टेेशन के बाहर पंचकूला की तरफ एक भी फूड स्टॉल नहीं है। रेलवे स्टेशन के एक से दो किलोमीटर के भीतर भी कोई स्टॉल नहीं है। नतीजा रेलवे स्टेशन पर पंचकूला की तरफ आने वाले लोगों को प्लेटफार्म टिकट लेकर चंडीगढ़ की तरफ जाना पड़ता है। पैसे तो खर्च होते ही हैं, समय की बर्बादी भी होती है।
यहां के गड्ढों को मिट्टी का सहारा
पंचकूला साइड रेलवे स्टेशन की सड़कें भी टूट चुकी हैं। यहां निजी कंपनी वाले गड्ढों में मिट्टी भरकर काम चला रहे हैं। यह सिलसिला काफी समय से चल रहा है। पंचकूला रेलवे स्टेशन को आने वाली सड़क भी कई जगह टूटी है। इस पर नगर निगम पंचकूला ध्यान नहीं दे रहा है।
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सुरक्षा व्यवस्था भी जीरो
रेलवे स्टेशन के दूसरी छोर की सुरक्षा व्यवस्था जीरो है। यहां चोरी, स्नैचिंग और हत्या जैसे वारदात को अंजाम देकर बदमाश आसानी से निकल जाते हैं। जीआरपी के मुुलाजिम शाम ढलने के बाद रेलवे स्टेशन पर नजर नहीं आते हैं। इस मामले को अमर उजाला पहले भी कई बार उठा चुका है, लेकिन विभाग के आला अधिकारी सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर आंखें मूंदे हैं। यहां पुलिस बूथ बनाए जाने की मांग स्थानीय लोग कई बार कर चुके हैं। खुद प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने भी कुछ साल पहले पंचकूला की तरफ पुलिस बूथ बनाने का निर्देश दे चुके हैं, लेकिन यहां पुलिस बूथ नहीं बनाया गया।
एक भी एटीएम बूथ नहीं
रेलवे स्टेशन के पंचकूला साइड कुछ साल पहले एमटीएम बूथ की सुविधा थी, लेकिन अब वह भी बंद हो गई है। अगर रेलवे स्टेशन पर पंचकूला साइड किसी यात्री को पैसे की जरूरत पड़ जाए तो उसे पंचकूला सेक्टर-17 या 18 रेलवे स्टेशन से दो से ढाई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है, क्योंकि रेलवे स्टेशन के चंडीगढ़ साइड एटीएम बूथ की सुविधा नहीं है।
शाम चार बजे के बाद नहीं होता रिजर्वेशन
सेक्टर-16 निवासी सुभाष पपनेजा ने बताया कि पंचकूला साइड रेलवे स्टेशन पर शाम चार बजे के बाद रिजर्वेेशन काउंटर बंद हो जाता है। इस संबंध में अंबाला डिविजन के आला अधिकारियों को कई बार सूचित कराया जा चुका है। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि शाम को रिजर्वेशन के लिए पंचकूला साइड यात्री आते ही नहीं हैं। इसलिए काउंटर बंद कर दिया गया है। पंचकूला के स्थानीय लोग टिकट बुकिंग काउंटर बंद होने से परेशान हैं। उन्हें टिकट बुकिंग के लिए चंडीगढ़ साइड की तरफ जाना पड़ता है।
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होना है, लेकिन 14 साल से यह प्रोजेक्ट कागजों में केवल टेंड प्रक्रिया तक पहुंचा है। नेताओं और जनप्रतिनिधियों के आश्वासन के बाद भी ढाई साल से लोग रेलवे स्टेशन और आसपास के परिसर में सुविधाओं की बाट जोह रहे हैं, लेकिन हालात बदतर हैं। प्रस्तावित परियोजना में इसका विस्तार पंचकूला की तरफ 493.4 एकड़ में होना है। इसका लाभ सिर्फ पंचकूला को ही नहीं बल्कि चंडीगढ़ के मनीमाजरा और मौलीजागरां के लोगों को भी मिलना है। यह प्रोजेक्ट धरातल पर कब तक उतरेगा, इसकी जानकारी डिवीजनल अधिकारियों को भी नहीं है। बता दें कि नगर निगम चुनाव के दौरान भाजपा ने रेलवे स्टेशन के पंचकूला की तरफ फूड कोर्ट, बेहतर पार्किंग, कनेक्टिविटी का दाव किया था।
एक भी फूड स्टॉल नहीं
रेलवे स्टेेशन के बाहर पंचकूला की तरफ एक भी फूड स्टॉल नहीं है। रेलवे स्टेशन के एक से दो किलोमीटर के भीतर भी कोई स्टॉल नहीं है। नतीजा रेलवे स्टेशन पर पंचकूला की तरफ आने वाले लोगों को प्लेटफार्म टिकट लेकर चंडीगढ़ की तरफ जाना पड़ता है। पैसे तो खर्च होते ही हैं, समय की बर्बादी भी होती है।
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यहां के गड्ढों को मिट्टी का सहारा
पंचकूला साइड रेलवे स्टेशन की सड़कें भी टूट चुकी हैं। यहां निजी कंपनी वाले गड्ढों में मिट्टी भरकर काम चला रहे हैं। यह सिलसिला काफी समय से चल रहा है। पंचकूला रेलवे स्टेशन को आने वाली सड़क भी कई जगह टूटी है। इस पर नगर निगम पंचकूला ध्यान नहीं दे रहा है।
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सुरक्षा व्यवस्था भी जीरो
रेलवे स्टेशन के दूसरी छोर की सुरक्षा व्यवस्था जीरो है। यहां चोरी, स्नैचिंग और हत्या जैसे वारदात को अंजाम देकर बदमाश आसानी से निकल जाते हैं। जीआरपी के मुुलाजिम शाम ढलने के बाद रेलवे स्टेशन पर नजर नहीं आते हैं। इस मामले को अमर उजाला पहले भी कई बार उठा चुका है, लेकिन विभाग के आला अधिकारी सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर आंखें मूंदे हैं। यहां पुलिस बूथ बनाए जाने की मांग स्थानीय लोग कई बार कर चुके हैं। खुद प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने भी कुछ साल पहले पंचकूला की तरफ पुलिस बूथ बनाने का निर्देश दे चुके हैं, लेकिन यहां पुलिस बूथ नहीं बनाया गया।
एक भी एटीएम बूथ नहीं
रेलवे स्टेशन के पंचकूला साइड कुछ साल पहले एमटीएम बूथ की सुविधा थी, लेकिन अब वह भी बंद हो गई है। अगर रेलवे स्टेशन पर पंचकूला साइड किसी यात्री को पैसे की जरूरत पड़ जाए तो उसे पंचकूला सेक्टर-17 या 18 रेलवे स्टेशन से दो से ढाई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है, क्योंकि रेलवे स्टेशन के चंडीगढ़ साइड एटीएम बूथ की सुविधा नहीं है।
शाम चार बजे के बाद नहीं होता रिजर्वेशन
सेक्टर-16 निवासी सुभाष पपनेजा ने बताया कि पंचकूला साइड रेलवे स्टेशन पर शाम चार बजे के बाद रिजर्वेेशन काउंटर बंद हो जाता है। इस संबंध में अंबाला डिविजन के आला अधिकारियों को कई बार सूचित कराया जा चुका है। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि शाम को रिजर्वेशन के लिए पंचकूला साइड यात्री आते ही नहीं हैं। इसलिए काउंटर बंद कर दिया गया है। पंचकूला के स्थानीय लोग टिकट बुकिंग काउंटर बंद होने से परेशान हैं। उन्हें टिकट बुकिंग के लिए चंडीगढ़ साइड की तरफ जाना पड़ता है।