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हालात : प्रशासन का दूसरा डोज शत-प्रतिशत लगाने का दावा, सैकड़ों ने पहली ही नहीं लगवाई
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पंचकूला। कोरोना की तीसरी लहर से बचाव के लिए जहां स्वास्थ्य विभाग टीकाकरण के साथ संक्रमितों को चिह्नित करने का भरसक प्रयास कर रहा है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में अनेक लोग टीकाकरण से दूर भाग रहे हैं। प्रशासन टीके की दूसरी डोज लगाने का शत-प्रतिशत दावे कर रहा है, लेकिन ऐसे भी कई गांव हैं, जहां लोगों ने टीके की पहली डोज ही नहीं लगवाई है। अपने स्तर पर सभी प्रयास पूरे करने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने डिपो होल्डरों की सहायता से ऐसे लोगों को घेरने का मन बनाया है।
प्रयास किया जा रहा है कि जिस दिन डिपो होल्डर द्वारा खाद्य सामग्री वितरित की जाएगी, उसी दिन टीकाकरण भी किया जाएगा। वर्तमान में हंगोला सीएचसी के करीब आधा दर्जन गांवों के लोगों ने टीके की पहली डोज भी नहीं लगाई है। इनमें सुल्तानपुर के 500, रेहना के 400, घनौली के 90, टिब्बड़ के 90, हरिओली के 70, गड़ी कोटहा के 150 ग्रामीण शामिल हैं। इसके अलावा हंगोली में 100 के करीब ऐसे लोग हैं, जिन्होंने बड़ी मुश्किल से पहली डोज लगवाई, अब स्वास्थ्य विभाग की लाख कोशिशों के बाद भी दूसरी डोज के लिए सामने नहीं आ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार मन में बैठी गलत धारणा की वजह से ये लोग टीका लगवाने से इनकार कर रहे हैं। टीका लगवाने के लिए गांव-गलियों की खाक छान रहे स्वास्थ्य कर्मचारियों ने कई मौके पर असहज होने वाले अनुभव भी हासिल किए हैं। कई गांवों में इन्हें देखकर लोग घर के दरवाजे बंद कर लेते हैं, तो कहीं उल्टी-सीधी बातें भी सुननी पड़ती है। सुल्तानपुर, रेहना में तो विभाग कई बार कैंप लगा चुका है। डॉ. अश्वनी ने बताया कि कई बार लोगों से अपील की लेकिन टीकाकरण के नाम पर लोग बात करने को तैयार नहीं हैं।
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स्वास्थ्य कर्मचारी रमनप्रीत ने बताया कि सुल्तानपुर में कई बार कैंप लगा चुके हैं। जब भी टीकाकरण की बात स्थानीय लोगों के घरों में जाकर करते हैं तो कुछ लोग तो बीमार होने का बहाना बनाकर घर का गेट ही बंद लेते हैं। वहीं कुछ लोग कहते हैं कि अभी घर के मुखिया नहीं हैं, आप उन्हीं से बात कर लेना। जब घर के मालिक से संपर्क किया जाता है, तो कहते हैं कि अभी बाहर हूं, आऊंगा तो विचार करूंगा। अब सारे प्रयास फेल हो गए हैं, तो विचार किया गया है कि डिपो होल्डर की मदद से राशन वितरित करने वाले दिन टीकाकरण किया जाएगा। इसके लिए आसपास के क्षेत्र के डिपो होल्डरों से संपर्क किया जा रहा है।
तीन दिन बाद भी ले सकते हैं छुट्टी
कोरोना मरीजों को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से जारी नई गाइड लाइन के अनुसार हल्के लक्षण वाले सात दिन बाद भी अस्पताल से डिस्चार्ज हो सकते हैं। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद टेस्ट कराने की जरूरत नहीं है। वहीं कोरोना संक्रमित मिलने के तीन बाद भी कोई चिह्न नहीं मिलने पर भी अस्पताल से छुट्टी मिलेगी।
डेंटल ओपीडी में जाने से पहले कराएं टेस्ट
आरटीपीसीआर टेस्ट यानी रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पॉलीमर्स चेन रिएक्शन टेस्ट कराने के बाद ही डेंटल ओपीडी में उपचार के लिए जाएं। यह नियम सेक्टर-6 नागरिक अस्पताल की डेंटल ओपीडी से लेकर अन्य डिस्पेंसरियों में लागू हैं। इसके बिना उपचार संभव नहीं है।
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प्रयास किया जा रहा है कि जिस दिन डिपो होल्डर द्वारा खाद्य सामग्री वितरित की जाएगी, उसी दिन टीकाकरण भी किया जाएगा। वर्तमान में हंगोला सीएचसी के करीब आधा दर्जन गांवों के लोगों ने टीके की पहली डोज भी नहीं लगाई है। इनमें सुल्तानपुर के 500, रेहना के 400, घनौली के 90, टिब्बड़ के 90, हरिओली के 70, गड़ी कोटहा के 150 ग्रामीण शामिल हैं। इसके अलावा हंगोली में 100 के करीब ऐसे लोग हैं, जिन्होंने बड़ी मुश्किल से पहली डोज लगवाई, अब स्वास्थ्य विभाग की लाख कोशिशों के बाद भी दूसरी डोज के लिए सामने नहीं आ रहे हैं।
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जानकारी के अनुसार मन में बैठी गलत धारणा की वजह से ये लोग टीका लगवाने से इनकार कर रहे हैं। टीका लगवाने के लिए गांव-गलियों की खाक छान रहे स्वास्थ्य कर्मचारियों ने कई मौके पर असहज होने वाले अनुभव भी हासिल किए हैं। कई गांवों में इन्हें देखकर लोग घर के दरवाजे बंद कर लेते हैं, तो कहीं उल्टी-सीधी बातें भी सुननी पड़ती है। सुल्तानपुर, रेहना में तो विभाग कई बार कैंप लगा चुका है। डॉ. अश्वनी ने बताया कि कई बार लोगों से अपील की लेकिन टीकाकरण के नाम पर लोग बात करने को तैयार नहीं हैं।
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स्वास्थ्य कर्मचारी रमनप्रीत ने बताया कि सुल्तानपुर में कई बार कैंप लगा चुके हैं। जब भी टीकाकरण की बात स्थानीय लोगों के घरों में जाकर करते हैं तो कुछ लोग तो बीमार होने का बहाना बनाकर घर का गेट ही बंद लेते हैं। वहीं कुछ लोग कहते हैं कि अभी घर के मुखिया नहीं हैं, आप उन्हीं से बात कर लेना। जब घर के मालिक से संपर्क किया जाता है, तो कहते हैं कि अभी बाहर हूं, आऊंगा तो विचार करूंगा। अब सारे प्रयास फेल हो गए हैं, तो विचार किया गया है कि डिपो होल्डर की मदद से राशन वितरित करने वाले दिन टीकाकरण किया जाएगा। इसके लिए आसपास के क्षेत्र के डिपो होल्डरों से संपर्क किया जा रहा है।
तीन दिन बाद भी ले सकते हैं छुट्टी
कोरोना मरीजों को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से जारी नई गाइड लाइन के अनुसार हल्के लक्षण वाले सात दिन बाद भी अस्पताल से डिस्चार्ज हो सकते हैं। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद टेस्ट कराने की जरूरत नहीं है। वहीं कोरोना संक्रमित मिलने के तीन बाद भी कोई चिह्न नहीं मिलने पर भी अस्पताल से छुट्टी मिलेगी।
डेंटल ओपीडी में जाने से पहले कराएं टेस्ट
आरटीपीसीआर टेस्ट यानी रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पॉलीमर्स चेन रिएक्शन टेस्ट कराने के बाद ही डेंटल ओपीडी में उपचार के लिए जाएं। यह नियम सेक्टर-6 नागरिक अस्पताल की डेंटल ओपीडी से लेकर अन्य डिस्पेंसरियों में लागू हैं। इसके बिना उपचार संभव नहीं है।