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सिद्धू ने इशारों में फिर उठाया सीएम पद का मुद्दा, कहा- सीएम तो कोई तभी बनेगा, जब 60 विधायक होंगे
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कांग्रेस हाईकमान की ओर से चरणजीत सिंह चन्नी को अगला सीएम चेहरा घोषित करने का पक्का मन बनाए जाने के बाद भी इस पद के प्रबल दावेदार और पंजाब प्रदेश कांग्रेस प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू ने शनिवार को इशारों-इशारों में कह दिया कि मुख्यमंत्री तो कोई तभी बनेगा जब 60 एमएलए होंगे। उन्होंने कहा कि कोई भी 60 एमएलए की बात नहीं कर रहा। कोई यह बात नहीं कर रहा कि सरकार किस रोडमैप पर बनेगी। इसे बना दो, उसे बना दो। 500 लोग हायर करके, सरकारी पैसा लगाकर, यह हो गया, वह हो गया। लेकिन सिद्धू कभी मुद्दों की राजनीति से पीछे नहीं हटा।
चुनावी जनसभा के दौरान सिद्धू ने सीएम चेहरे के मुद्दे को लेकर किसी का नाम लिए बिना कांग्रेस और चन्नी पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या नवजोत सिद्धू ने कोई रेत खड्ड ली या अपनी शराब की दुकान खोली? उन्होंने कहा कि वही लोग याद किए जाते हैं जो समाज की बेहतरी के लिए काम करते हैं। सिद्धू ने अपने पंजाब माडल का हवाला देते हुए कहा कि यह पंजाब के लोगों की जिंदगी बदलने का माडल है।
सिद्धू ने कहा कि यह पंजाबियों को तय करना है कि कौन सा चेहरा इसे लागू करेगा। 60 एमएलए किसके नाम पर बनेंगे, सबसे बड़ा सवाल यह है कि उसकी नीति क्या है, उसका किरदार क्या है, उसकी नैतिकता क्या है। सिद्धू ने सवाल किया कि माफिया का हिस्सा रहा व्यक्ति, माफिया को रोक देगा? बीते 30 साल में दो मुख्यमंत्रियों ने माफिया चलाया, जिससे निजात पाने का तरीका पंजाब माडल है। उन्होंने कहा कि पंजाब माडल उनका नहीं है, बल्कि उनका अनुभव है। सिद्धू ने कहा कि पंजाब तय करे कि पंजाब माडल को लागू कौन करेगा, क्योंकि वोट इसी पर मिलेंगे।
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सीएम चेहरा घोषित करने का कोई बड़ा लाभ नहीं होगा : प्रताप बाजवा
पंजाब प्रदेश कांग्रेस के पूर्व प्रधान और कादियां सीट से पार्टी के प्रत्याशी प्रताप सिंह बाजवा ने हाईकमान द्वारा पंजाब में चुनाव पूर्व सीएम चेहरा घोषित किए जाने के फैसले पर सवाल उठाया है। सीएम पद के लिए खुद भी दावेदारी पेश कर चुके बाजवा ने कहा है कि मेरी पार्टी को राय है कि जैसा चल रहा है, वैसे ही चलने दिया जाए और कलेक्टिव लीडरशिप के साथ चुनाव में उतरा जाए।
पत्रकारों से बातचीत में बाजवा ने कहा कि अगर उनकी सलाह मानी जाए तो मुख्यमंत्री चेहरे के एलान से पार्टी को बहुत बड़ा लाभ नहीं होने वाला। उन्होंने कहा कि ऐसा करके पार्टी दरअसल विरोधी पार्टियों के हाथों में खेल रही है। उन्होंने कहा कि चरणजीत चन्नी पहले से मुख्यमंत्री है, नवजोत सिद्धू प्रदेश प्रधान हैं और कई अन्य सीनियर नेता भी हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री के चेहरे के एलान से कोई फायदा नहीं होगा। इससे विपक्ष को पार्टी पर निशाने साधने का मौका मिल सकता है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री चेहरे की दौड़ में चन्नी और सिद्धू के बाद प्रताप बाजवा, सुनील जाखड़ और सुखजिंदर सिंह रंधावा भी हैं।
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चुनावी जनसभा के दौरान सिद्धू ने सीएम चेहरे के मुद्दे को लेकर किसी का नाम लिए बिना कांग्रेस और चन्नी पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या नवजोत सिद्धू ने कोई रेत खड्ड ली या अपनी शराब की दुकान खोली? उन्होंने कहा कि वही लोग याद किए जाते हैं जो समाज की बेहतरी के लिए काम करते हैं। सिद्धू ने अपने पंजाब माडल का हवाला देते हुए कहा कि यह पंजाब के लोगों की जिंदगी बदलने का माडल है।
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सिद्धू ने कहा कि यह पंजाबियों को तय करना है कि कौन सा चेहरा इसे लागू करेगा। 60 एमएलए किसके नाम पर बनेंगे, सबसे बड़ा सवाल यह है कि उसकी नीति क्या है, उसका किरदार क्या है, उसकी नैतिकता क्या है। सिद्धू ने सवाल किया कि माफिया का हिस्सा रहा व्यक्ति, माफिया को रोक देगा? बीते 30 साल में दो मुख्यमंत्रियों ने माफिया चलाया, जिससे निजात पाने का तरीका पंजाब माडल है। उन्होंने कहा कि पंजाब माडल उनका नहीं है, बल्कि उनका अनुभव है। सिद्धू ने कहा कि पंजाब तय करे कि पंजाब माडल को लागू कौन करेगा, क्योंकि वोट इसी पर मिलेंगे।
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सीएम चेहरा घोषित करने का कोई बड़ा लाभ नहीं होगा : प्रताप बाजवा
पंजाब प्रदेश कांग्रेस के पूर्व प्रधान और कादियां सीट से पार्टी के प्रत्याशी प्रताप सिंह बाजवा ने हाईकमान द्वारा पंजाब में चुनाव पूर्व सीएम चेहरा घोषित किए जाने के फैसले पर सवाल उठाया है। सीएम पद के लिए खुद भी दावेदारी पेश कर चुके बाजवा ने कहा है कि मेरी पार्टी को राय है कि जैसा चल रहा है, वैसे ही चलने दिया जाए और कलेक्टिव लीडरशिप के साथ चुनाव में उतरा जाए।
पत्रकारों से बातचीत में बाजवा ने कहा कि अगर उनकी सलाह मानी जाए तो मुख्यमंत्री चेहरे के एलान से पार्टी को बहुत बड़ा लाभ नहीं होने वाला। उन्होंने कहा कि ऐसा करके पार्टी दरअसल विरोधी पार्टियों के हाथों में खेल रही है। उन्होंने कहा कि चरणजीत चन्नी पहले से मुख्यमंत्री है, नवजोत सिद्धू प्रदेश प्रधान हैं और कई अन्य सीनियर नेता भी हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री के चेहरे के एलान से कोई फायदा नहीं होगा। इससे विपक्ष को पार्टी पर निशाने साधने का मौका मिल सकता है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री चेहरे की दौड़ में चन्नी और सिद्धू के बाद प्रताप बाजवा, सुनील जाखड़ और सुखजिंदर सिंह रंधावा भी हैं।